राजमार्ग पर रेंगता कछुआ और गरजती शेरनी!
उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी की नजर में पचपदरा-बागुंडी खंड पर बन रही सड़क...

बलवंत राज मेहता
वरिष्ठ पत्रकार
पचपदरा-बागुंडी खंड पर बन रही सड़क की रफ्तार देखकर यही लगा कि ठेकेदारों और अधिकारियों ने निर्माण कार्य को ‘सदियों की परंपरा’ समझ लिया है—धीरे, सुस्त और कभी खत्म न होने वाला! जब जनता को लगा कि जल्द ही उन्हें धूल और गड्ढों से मुक्ति मिलेगी, तब पता चला कि सड़क तो कछुए से भी धीमी गति से रेंग रही है।
लेकिन इस ‘कछुआ राजमार्ग’ पर जब उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी की नजर पड़ी, तो जंगल की रानी की दहाड़ गूंज उठी। उन्होंने ठेकेदारों और इंजीनियरों को ऐसा लताड़ा कि उनके सरकारी आरामगाहों की दीवारें भी हिल गईं। नोटिस की तलवार चली, रिपोर्ट की गाज गिरी और निर्देशों की गरज ने अफसरों की नींद उड़ा दी।
मार्च 2025 तक का एक्सटेंशन मिलने के बावजूद सिर्फ 60% काम पूरा हुआ? यानी सड़क बनाने वालों ने इसे कोई पुरानी ऐतिहासिक इमारत का जीर्णोद्धार समझ लिया था—”आराम से करेंगे, पीढ़ियों तक चलेगा!” पर यह भूल गए कि जब शेरनी जागती है, तो जंगल की सुस्ती खत्म हो जाती है। अब देखना ये है कि ये कछुआ सड़क खरगोश की तरह दौड़ने लगती है या फिर शेरनी की अगली दहाड़ के इंतजार में दुबक जाती है!





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