शहरों की प्रशासनिक बिसात पर नए मोहरे
राजस्थान सरकार ने जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों का पुनर्गठन किया। जानें नए प्रशासनिक बदलाव और इसका...

बलवंत राज मेहता
वरिष्ठ पत्रकार
राजस्थान की शहरी प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर नए रंग में ढलने जा रही है। जयपुर, जोधपुर और कोटा की नगर सरकारें, जो बीते वर्षों में दो ध्रुवों में बंट गई थीं, अब फिर से एक हो जाएंगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की स्वीकृति के बाद सरकार ने इस पुनर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। यह कदम वैसा ही है जैसे कोई बिखरी हुई मोहरों को फिर से एक खेल में समेट ले—संभवतः चालें अब और बेहतर होंगी।
2019 में जब कांग्रेस सरकार ने इन तीन शहरों में दो-दो नगर निगम बनाए थे, तब इसे विकास की गंगा बहाने का प्रयास बताया गया था। जयपुर को ग्रेटर और हेरिटेज में, जोधपुर को उत्तर और दक्षिण में, और कोटा को भी इसी तर्ज पर विभाजित किया गया था। मगर वक्त के साथ यह प्रयोग प्रशासनिक समन्वय की कमी और बढ़ते वित्तीय भार की फांस में उलझ गया। दो नावों पर सवार इन शहरों को आखिरकार एक किनारे लगाने का फैसला लिया गया।
नए आदेश के तहत मौजूदा नगर निगम अपना कार्यकाल पूरा होने तक स्वतंत्र रूप से काम करते रहेंगे। इसके बाद, जैसे एक पुरानी इमारत को पुनर्सज्जित किया जाता है, वैसे ही इन निगमों की सीमाओं और वार्डों का पुनर्गठन किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019 में इस बंटवारे को शहरी विकास का अनिवार्य हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा था, “आबादी बढ़ रही है, प्रशासन को विस्तार देना ही होगा।” वहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का मानना है कि “सरल प्रशासन ही सुशासन की पहली शर्त है।”






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