निवेशक चाचा की परम्परा
और कुछ तो ऐसे निवेशक हैं, जो स्टॉक ऐसे पकड़ते हैं जैसे पुरखों की जमींदारी हो — चाहे कितनी भी गिर जाए, बेचेंगे...

भारतीय निवेशक अक्सर शेयर खरीदते हैं जैसे कोई नई बहू घर ला रहे हों
— बिना बायोडेटा देखे, बस किसी ‘भरोसेमंद’ दोस्त की सिफारिश पर।
“अरे बेटा, इस कंपनी में पैसे लगा दे। मेरे साले के लड़के की शादी में उसी कंपनी का घी आया था, बहुत बढ़िया क्वालिटी थी।” — चाचा बोले।
मुहल्ले का शर्मा जी जब भी किसी IPO में पैसा लगाते हैं, तो पहले अपने पंडित जी से ‘शुभ योग’ पूछते हैं
— “मंगलवार को खरीदूं या गुरुवार को?
शुक्राचार्य तो रेट्रोग्रेड में हैं ना!”
अब ये कोई नहीं समझा पाए कि IPO में शनि की दशा नहीं, कंपनी का कैश फ्लो काम आता है।
और कुछ तो ऐसे निवेशक हैं, जो स्टॉक ऐसे पकड़ते हैं जैसे पुरखों की जमींदारी हो
— चाहे कितनी भी गिर जाए, बेचेंगे नहीं!
“बिटिया की शादी इसी स्टॉक से करेंगे”
— कहते हुए यूनिटेक और यस बैंक को 2010 से सीने से लगाए बैठे हैं।
निफ्टी ऊपर जाए तो परिवार में मिठाई बंटती है,
और जब गिर जाए तो TV बंद कर दिया जाता है
— “अरे बच्चों को नजर लग जाएगी इन लाल आकड़ों से!”





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