पानी-पानी हुई सियासत
कार्यकर्ता बोले, "मैडम! नल है, मगर जल नहीं!" जवाब में वसुंधरा जी का गुस्सा यूं फूटा, जैसे सूखी धरती पर अचानक बादल गरज उठे हों। उन्होंने अफसरों को ऐसा निचोड़ा, जैसे किसी पुराने नल से आखिरी बूंद...

झालावाड़ की धरती पर जब वसुंधरा राजे का काफिला उतरा, तो तपती ज़मीन से एक ही आवाज़ आई — “पानी चाहिए!” और तभी सियासत के कुएं में हलचल मच गई। कार्यकर्ता बोले, “मैडम! नल है, मगर जल नहीं!” जवाब में वसुंधरा जी का गुस्सा यूं फूटा, जैसे सूखी धरती पर अचानक बादल गरज उठे हों। उन्होंने अफसरों को ऐसा निचोड़ा, जैसे किसी पुराने नल से आखिरी बूंद निचोड़ी जाती है। कहा, “हजारों करोड़ बहा दिए, लेकिन जनता की बाल्टी अब भी खाली है!” अब भला कोई सरकार को आईना दिखाए तो केंद्र भी जाग गया— जलशक्ति मंत्रालय का पंप अचानक चालू हो गया। सीआर पाटिल ने भी ट्वीट से नल की टोंटी खोली — “मैडम ने चिंता जताई है, अब रिपोर्ट तैयार करो!” एक रिपोर्ट जाएगी, दूसरी आएगी, तब तक जनता ‘थोथा चना, बाजे घना’ की तर्ज पर अपनी बाल्टी को बजाकर सरकारों को सुनाती रहेगी। राजस्थान में पानी नहीं, पर राजनीति की नहरें खूब बह रही हैं। जनता पूछ रही है — “क्या इस बार भी वोटों का पानी हमारे हिस्से में नहीं आएगा?”
जब कोबरा ने दिए वीआईपी दर्शन
सर्किट हाउस की वीआईपी गैलरी में उस दिन असली वीआईपी आ गया— ना तो सिक्योरिटी पास चाहिए, ना बायोमेट्रिक एंट्री, सीधा फन फैलाकर हाज़िर! सात फुट का कोबरा यूं आया जैसे किसी ने रॉयल एन्ट्री के लिए रेड कार्पेट बिछा रखा हो। स्टाफ और आगंतुक ऐसे भागे जैसे इनकम टैक्स की रेड पड़ गई हो। प्रबंधक जी मौके पर पहुंचे— चेहरे पर वही गंभीरता, जो बजट कटने की खबर पर होती है। वन विभाग को फोन गया, स्नेक कैचर बंटी जी आए। बंटी जी वैसे तो चुप रहते हैं, पर जब हाथ में टॉर्च और बैग लिए निकलते हैं, तो जंगल भी रास्ता दे देता है। कोबरा साहब को कायलाना झील की ओर रवाना कर दिया गया, जहां शायद उनके पुराने रिटायरमेंट प्लान सेट थे। उन्होंने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी आंखों में लिखा था— “सिर्फ चूहे चाहिए, चर्चा नहीं।” वैसे तो 80 फीसदी सांप ज़हरीले नहीं होते, पर जो वीआईपी गैलरी में दिख जाए, वो 100 फीसदी डरावना बन जाता है। कोबरा का फन उठाना ऐसा था, जैसे कोई मंत्री जी माइक के सामने आ गए हों — गर्दन सीधी, भाषा फुफकारती हुई। और इंसान का हाल? वही जो वेटिंग लिस्ट में टिकट कटवाने वाले का होता है— न सांस आती है, न शब्द।






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