अब स्कूल नहीं चला सकेंगे दुकान : ब्रांडेड शिक्षा का ब्रेकडाउन
राजस्थान सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसते हुए अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने की आज़ादी दी है।अब शिक्षा मुनाफे का सौदा नहीं, जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम...

सरकार ने निजी स्कूलों पर लगाम क्या लगाई, जैसे बेलगाम घोड़े की रफ्तार थम गई हो। जो स्कूल अब तक मुनाफे की दौड़ में अंधाधुंध दौड़ रहे थे, वे अब ठहरकर अपने रास्ते पर विचार कर रहे हैं।
राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 15 अप्रैल को यह बड़ा फैसला सुनाया। अब कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों पर यूनिफॉर्म और किताबें एक खास दुकान से खरीदने का दबाव नहीं बना सकेगा। यूनिफॉर्म पांच साल तक नहीं बदली जाएगी। किताबों की सूची पहले ही स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी होगी।
अभिभावकों के लिए राहत भरा कदम
हर साल बदलती किताबें, ड्रेस और ब्रांडेड नामों की चकाचौंध में उलझे अभिभावकों के लिए यह फैसला एक राहत की हवा बनकर आया है। अब बच्चों का भविष्य दुकानों की बिक्री पर नहीं, किताबों के ज्ञान पर चमकेगा।
मदन दिलावर की यह पहल न केवल एक ठोस नीति परिवर्तन है, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी, कि शिक्षा व्यापार नहीं, एक पवित्र जिम्मेदारी है।
निजी स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ी
लम्बे समय से चली आ रही ये परिपाटी आगे कब तक कायम रहेगी, ये तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन वाकई सरकार के इस फैसले से निजी संस्थान अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाते हैं तो स्कूलों में किताबों-कापियों के नाम पर चलने वाली दुकानों पर लगाम लगेगी। हर साल बदलने वाली किताबों से भी मुक्ति मिलेगी। अब सरकार को चाहिए कि यदि कोई निजी शिक्षण संस्थान इस फैसले को अनदेखा करता है तो उसकी मान्यता रद्द करने पर भी विचार करे। अन्यथा ये फैसला भी हर बार की तरह हवा बन कर रह जाएगा।






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