पहलगाम घटना पर पूरे विश्व की नजर, पाकिस्तान पर कसा शिकंजा
भारत आखिर कब तक रहम दिल बना रहेगा। सहनशीलता की भी एक सीमा होती है। कश्मीर की ताजा घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान पर पांच एंगल से शिकंजा कसा...

– राकेश गांधी
आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका नजर आ रही थी। भारत आखिर कब तक रहम दिल बना रहेगा। सहनशीलता की भी एक सीमा होती है। कश्मीर की ताजा घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान पर पांच एंगल से शिकंजा कसा है। पहला- सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित, दूसरा- इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट अटारी बंद, तीसरा- सार्क वीजा छूट योजना से पाकिस्तानियों को भारत यात्रा की इजाजत नहीं, चौथा- पाकिस्तान उच्चायोग में रक्षा/सैन्य सलाहकारों को एक हफ्ते में भारत छोड़ने के आदेश व पाकिस्तान से भी भारतीय अधिकारी लौटेंगे तथा पांचवा- दोनों उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 की जाएगी। ये दुःखद घटना है और दोनों देशों के शांतिप्रिय लोगों को इस घटना का खुलकर विरोध करना होगा। साथ ही इस घटना को लेकर राजनीति या आरोप- प्रत्यारोप करने वालों के विरुद्ध एकजुटता दिखानी होगी।
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सेना को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश
पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले के बाद अपनी सऊदी अरब यात्रा को बीच में छोड़कर लौटे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तत्काल हरकत में आ गए। उन्होंने इससे पहले हालात की समीक्षा व नियंत्रण के लिए गृहमंत्री अमित शाह को भी कश्मीर भेजा। बुधवार को पूरे दिन घटना की समीक्षा के बाद आखिर मोदी सरकार ने पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए बड़े फैसले लिए। सीसीएस ने सभी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। तीन आतंकियों के स्केच भी जारी किए गए हैं। उधर पाकिस्तान में पिछली पूरी रात खौफ में कटी। रह- रह कर भारत की जवाबी कार्रवाई का डर सता रहा था। वहां भी आर्मी चीफ ने अपनी तीनों फोर्स के कमाण्डरों की बैठक ली। भारतीय सीमा के पास अपने एयरफोर्स स्टेशनों पर 18 फाइटर जेट तैनात किए गए। कुल मिलाकर इस घटना का असर पाकिस्तान में भी नजर आया।
पहचान व नाम पूछकर गोली मारना शर्मनाक
एक अरसे बाद शांति की दौर में लौटे कश्मीर को फिर से आतंक के साए में झकड़ने की नापाक कोशिश की जा रही है। ये पूरे देश के लिए शर्म की बात है जब भारत की धरती पर एक इंसान को उसकी पहचान व नाम पूछकर गोली से भून दिया गया। वो भी उसके मासूम परिवार के सामने। ऐसी नृशंस घटनाओं को आखिर कौनसा धर्म समर्थन देता होगा? कौनसी राजनीतिक पार्टियां समर्थन देती होंगी? ऐसा सोचना भी गलत है और ऐसा हो भी नहीं सकता। दशकों पूर्व की आतंकी घटनाओं से निजात पाने के बाद जम्मू- कश्मीर कुछ समय से विकास की गति पकड़ने लगा है और यहां का प्रतिभावान युवा हथियारों से दूर रहते हुए विकास के प्रति जागरुक होने लगा है। यहां ये जानना जरूरी है कि मगंलवार दोपहर बाद हुए इस हमले में अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने विभिन्न राज्यों के 26 निहत्थे पर्यटकों को नाम पूछकर मार डाला। इनमें दो विदेशी पर्यटक भी थे। कई पर्यटक तो शादी के बाद प्राकृतिक सौंदर्य से लकदक कश्मीर की घाटियों में प्यार व आनन्द की तलाश में आए थे। श्रीनगर से करीब 90 किलोमीटर दूर पहलगाम से मात्र 6 किलोमीटर दूर स्थित ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर बायसरन घाटी पहुंचे इन पर्यटकों को नहीं पता था कि कायर आतंकी निहत्थे पर्यटकों की जान लेने की फिराक में छुपकर बैठे हैं। आतंकियों द्वारा पति की हत्या के बाद एक महिला ने आतंकियों से कहा कि उसकी भी जान ले लो। इस पर आतंकी ने महिला को कहा कि वो प्रधानमंत्री मोदी को जाकर बता दे। आतंकियों का ये व्यवहार हर भारतीय को चौकन्ना व एकजुट रहने का संदेश देता है। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, यूक्रेन, इज्रायल आदि देशों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और भारत के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है। हमला ऐसे समय हुआ है, जब करीब सवा दो महीने बाद अमरनाथ यात्रा होनी है। सरकार ने पूरे देश के भीड़- भाड़ वाले स्थानों तथा खासकर उत्तरप्रदेश व महाराष्ट्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
सुकून में खलल डालने की हर कोशिश नाकाम
जम्मू- कश्मीर में आतंकी घटनाओं में पहले की तुलना में वैसे काफी कमी आई है और वहां पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ी है। फिर भी दोनों क्षेत्रों में कभी- कभी आतंकियों की मौजूदगी नजर आती रही है। इससे पहले जून 2024 में तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकी हमला हुआ था, जिससे ये बस खाई में गिर गई। इस घटना में 9 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष ही सोनमर्ग (कश्मीर) में सुरंग परियोजना पर काम कर रहे मजदूरों पर हमला कर 7 मजदूरों की हत्या कर दी गई। वर्ष 2024 की घटनाओं पर नजर डालें तो उस पूरे साल जम्मू के आठ जिलों में हुई आतंकी घटनाओं में 44 लोग मारे गए, जिनमें 13 आतंकी थे। इसी तरह सितम्बर 2023 में अनंतनाग के कोकरनाग क्षेत्र में आतंकियों के साथ एक सप्ताह चली मुठभेड़ में 5 सुरक्षाकर्मी हताहत हुए थे। इन घटनाओं के बावजूद पर्याप्त सैन्य सुरक्षा के चलते पर्यटकों के हौसले पस्त नहीं हुए और वहां देश- विदेश के पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि लम्बे समय से कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील में बंद पड़े शिकारे व बोट हाउस वालों को फिर से आमदनी का जरिया मिल गया। युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुल गए। स्थानीय लोग शांति की दिशा में चल पड़े हैं। आतंकियों ने हर बार इस शांति व खुशहाली में दखल देने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें हर बार मुंह की खानी पड़ी।






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