चंडू पंचांग – जोधपुर की धड़कनों का गवाह
चंडू पंचांग सिर्फ समय बताने वाला पंचांग नहीं, बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है। यह पंचांग हर तिथि और नक्षत्र के माध्यम से शहर की धड़कनों को दिशा देता...

जब सूरज की किरणें मरुप्रदेश की सुनहरी रेत पर गिरती हैं, और उस रेत में एक नयी शुरुआत की उम्मीद झलकती है, तो यही वह पल होता है जब चंडू पंचांग समय के परे जाकर जोधपुर की आत्मा से मिलकर उसे जगाता है। यह सिर्फ पंचांग नहीं, बल्कि एक ऐसा रक्षक है, जो नक्षत्रों की भाषा में जोधपुर के हर दर्द और हर ख़ुशी को बयाँ करता है।यह पंचांग जोधपुर के इतिहास और संस्कृति का हर पल जीवंत रखता है, जैसे एक स्मृतियों का खजाना, जिसमें हर तिथि, हर नक्षत्र, हर पर्व का एक गहरा अर्थ छिपा होता है। यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि समय का एक चुम्बक है, जो पूरे शहर को अपने साथ खींचता है, उसे एक नई दिशा देता है।चंडू पंचांग सिर्फ घरों की अलमारी में पड़ी एक किताब नहीं है; यह हर जोधपुरी का विश्वास और साथी है, जो बताता है कि कब उगना है, कब ढलना है, कब खुशियां मनानी हैं और कब परंपराओं में खो जाना है। यह जैसे समय का एक जादुई चाबुक है, जो हंसी-खुशी के पल से लेकर युद्धों की वीरगाथाओं तक सब कुछ याद दिलाता है।यह पंचांग जोधपुर के हर रंग और हर दिन की चाँदनी रातों की तरह एक कला की तस्वीर बनाता है, जहां हर भविष्यफल केवल राशियों का नहीं, बल्कि जीवन की राहों का नक्शा होता है। और जब इसे पढ़ते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे पंचांग की पंक्तियों में जोधपुर की हवा, धूप और समृद्ध संस्कृति बसी हो।चंडू पंचांग और जोधपुर की गाथाएँ आपस में इस तरह जुड़ी हैं जैसे समय और उसका अनंत इतिहास। इस पंचांग में प्रत्येक तारीख जोधपुर के वीरों और संतों के योगदान को दर्ज करती है, जैसे एक किताब में उन गुमनाम नायकों के नाम पन्ने दर पन्ने अंकित होते हों। यह पंचांग हमें याद दिलाता है कि चाहे वक्त बदले, पर जोधपुर की परंपराओं का रेशमी धागा हमेशा नई पीढ़ी की सोच को प्रेरित करेगा।जोधपुर के गौरव को और चंडू महाराज के इतिहास को जोड़ते हुए, यह पंचांग केवल एक खगोलशास्त्र का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक धरोहर बनकर उभरता है, जो नए और पुराने समय के बीच एक सशक्त सेतु बनता है। जैसे मेहरानगढ़ की दीवारें समय की कसौटी पर खड़ी हैं, वैसे ही चंडू पंचांग की पंक्तियाँ जोधपुर के भविष्य को दृढ़ता से संजोए रखेंगी।






अच्छी जानकारी बलवंत जी।