सद्भावना पर असहनीय हमला
हमले के लिए शुरुआती तौर से ही दोषी माना जा रहा हमारा पड़ोसी बेशर्मी से भले ही हमले में उसका हाथ होने से इनकार करे, लेकिन यह किसी से छिपा नहीं है कि किस तरह पाकिस्तान हर बार आतंकियों का पनाहगार-मददगार...

दिनेश रामावत
प्रधान सम्पादक
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर पर लौटता अप्रैल एक ऐसा नारकीय दाग लगा गया कि जिसके बारे में कल्पना करते ही हर कोई सहम जाता है। जम्मू-कश्मीर में पर्यटन सीजन के पीक पर पहुंचने से पहले ही देश के दुश्मन आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 लोगों को चुन-चुन कर मौत की नींद सुला दिया। सिर्फ पुरुषों की हत्या की गई। महिलाओं और बच्चों के दिलो-दिमाग में जिंदगी भर न भूल सकने वाला मंजर रह गया। मानवता की आवाज उनकी चीखों में कहीं खो गई, लेकिन कथित तौर पर नाम, जाति और धर्म पूछकर की गई सैलानियों की टार्गेट किलिंग सर्वधर्म-समभाव, समरसता और अनेकता में एकता जैसी खासियतों के कारण दुनिया भर में अलग ही पहचान रखने वाले हिन्दुस्तान की आत्मा और आपसी सद्भावना पर एक ऐसा असहनीय हमला है, जिसकी पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। हमले के लिए शुरुआती तौर से ही दोषी माना जा रहा हमारा पड़ोसी बेशर्मी से भले ही हमले में उसका हाथ होने से इनकार करे, लेकिन यह किसी से छिपा नहीं है कि किस तरह पाकिस्तान हर बार आतंकियों का पनाहगार-मददगार बनकर दुनिया के सामने आता रहा है।
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सिर्फ और सिर्फ सेना के भरोसे पलने और चलने वाले पाकिस्तान ने किस तरह भेड़िया बनकर आतंक के खात्मे के नाम पर कभी अमेरिका तो कभी यूरोपीय देशों के साथ विश्वासघात किया है। उसने आतंकियों के खात्मे के नाम पर आर्थिक व सामरिक मदद तो ली, लेकिन इसका इस्तेमाल अपने नापाक इरादों को पूरा करने की गरज से आतंकियों की मदद में ही किया। अमरीका ने भी बहुत बरस बाद इसे समझा। जब दुनिया के इस ताकतवर मुल्क ने पाकिस्तान को ठेंगा दिखाना शुरू किया तो उसने चीन को व्यापारिक रिश्तों के नाते अपनी चाल में फंसा कर काम चलाया है, लेकिन आतंक की मदद करना बंद नहीं किया। खुद पाकिस्तान के मंत्री ने माना है कि वे अमेरिका व यूरोपीय देशों से मदद के लालच में आतंकी संगठनों की मदद का गंदा काम करते रहे हैं। पहलगाम पर वीभत्स आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के मंत्री की स्वीकारोक्ति भले ही आज हुई है, लेकिन भारत कई बरसों से पाकिस्तान की नापाक हरकतों को संयुक्त राष्ट्र व दुनिया के अन्य मुल्कों के सामने प्रामाणिकता के साथ रखता रहा है। यही कारण है कि पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान अलग-थलग पड़ा हुआ है और उसे भारत की ओर से किसी बड़ी कार्रवाई का डर खाए जा रहा है।
तीनों सेनाओं को दिया फ्री हैंड
निश्चित तौर पर हाल के बरसों में पहलगाम में सैनानियों के कत्ल का आतंकी हमला न सिर्फ सबसे बड़ा, बल्कि मानवता पर सबसे वीभत्स हमला भी है। जाहिर है भारत के लोगों में गुस्सा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लगातार पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि पहलगाम हमले के दोषियों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा, जिसकी किसी ने कल्पना ही नहीं की होगी और इसके तुरंत बाद उन्होंने तीनों सेनाओं को फ्री हैंड देते हुए कह दिया कि सख्त कार्रवाई का समय, किस्म और आकार सेनाएं ही तय करेगी, देश को हमारी सेनाओं पर पूरा भरोसा है। इस सभी तथ्यों पर इस बार हमारी कवर स्टोरी ने पहलगाम हमले के हर पहलू को बारीकी से समझाने की कोशिश की है। साथ ही एक अन्य विश्लेषण में यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि किस तरह जाति और धर्म मानवता का दुश्मन बनता जा रहा है।
जोधपुर स्थापना दिवस
सद्भावना पर असहनीय हमले की बात के साथ हम इस बार सद्भावना, अपनी अपणायत और मीठी बोली के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध जोधपुर के स्थापना दिवस पर भी विशेष सामग्री दे रहे हैं। जोधपुर का खानपान ही नहीं, जोधपुर की सूरत-सीरत और यहां के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती स्टोरीज, उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगी। हर की तरह मई के अंक को भी संग्रहणीय बनाने का प्रयास किया गया है। आपकी प्रतिक्रियाओं का भी इंतजार रहेगा।
शुभकामनाओं सहित-






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