मरुधर मिंत: जोधपुर से प्रकाशित पहला अखबार
'मरुधर मिंत’ का इतिहास आज सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह याद है उस पहले प्रयास की, जिसने जनता के लिए संवाद की राह...

जब मारवाड़ की गलियों में सूचना की कोई गूंज नहीं थी और हर बात दरबार की चौहद्दी तक सीमित थी, तभी ‘मरुधर मिंत’ ने 1924 में पहली बार एक सार्वजनिक घंटी की तरह बजना शुरू किया। यह अख़बार केवल छपे हुए शब्दों का संग्रह नहीं था, बल्कि वह पहली दस्तक थी, जो जनता की चेतना के बंद दरवाज़े पर दी गई।‘मरुधर मिंत’ उस मोमबत्ती की लौ जैसा था, जो झीने अंधेरे में भी हिम्मत से टिकी रहती है। पहले यह सीमित साधनों से जनता की जिज्ञासाओं का उत्तर देने चला, लेकिन जल्द ही इसने शासन और समाज दोनों को आईना दिखाना शुरू किया। जब 1926 में यह ‘मारवाड़ गजट’ बना और सरकार के अधीन आया, तब भी इसकी कलम की धार कम नहीं हुई।यह पत्र जैसे समाज के बंद कमरे में खिड़की खोलता था—जिससे बाहर की हवा भी आए और भीतर की घुटन भी बाहर जाए। राजनीति से लेकर शासन की कार्यप्रणाली तक, हर विषय पर इसकी टिप्पणी उस समय की मौन व्यवस्था में एक साहसी हस्तक्षेप थी।पर जब इसके इरादों पर संदेह की धूल जमी, और नियंत्रण की जंजीरों ने इसे जकड़ लिया, तो यह धीमे-धीमे अपनी ही आवाज़ में गुम हो गया। वह घंटी जो कभी दूर तक सुनाई देती थी, अब सिसकी बन गई। ‘मरुधर मिंत’ का इतिहास आज सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह याद है उस पहले प्रयास की, जिसने जनता के लिए संवाद की राह खोली। (चित्र काल्पनिक)






No Comment! Be the first one.