जब जोधपुर की पहाड़ी से दुनिया ने जाना एक पौधे का नाम
प्रोफेसर एम. एम. भंडारी ने मसूरिया पहाड़ी पर एक पौधे की खोज की, उसका नाम रखा – Pavonia arabica var. massuriensis। जो जोधपुर और भारत के लिए गर्व की बात...

जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी पर एक दिन एक छोटा सा पौधा खिला। बहुत लोग उसे देखे होंगे, पर एक व्यक्ति ने उसमें कुछ खास देखा। वो थे – प्रोफेसर एम. एम. भंडारी। उन्होंने उस पौधे की पहचान की, उसका नाम रखा – Pavonia arabica var. massuriensis। यह नाम केवल एक पौधे का नहीं था, यह एक नई खोज थी, जो जोधपुर और भारत के लिए गर्व की बात बनी।
प्रोफेसर भंडारी वनस्पति विज्ञान यानी पौधों के अध्ययन के विशेषज्ञ थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन थार के रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ों, पौधों, झाड़ियों और फूलों को समझने, पहचानने और उनका रिकॉर्ड बनाने में लगा दिया। जब दुनिया रेगिस्तान को सिर्फ रेत और धूप समझती थी, तब उन्होंने बताया कि यहां भी सैकड़ों तरह के अनोखे पौधे पाए जाते हैं।
उनकी लिखी हुई किताब “Flora of the Indian Desert” इस विषय पर सबसे अहम पुस्तक मानी जाती है। इसमें उन्होंने विस्तार से बताया कि राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में कौन-कौन से पौधे होते हैं, वे कैसे जीते हैं और किस काम आते हैं।
भंडारी जी के लिए पौधे सिर्फ पेड़ या घास नहीं थे। वे उन्हें जीते-जागते जीव मानते थे — जैसे कोई तपस्वी, जो मुश्किल हालात में भी टिके रहते हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि रेगिस्तान में भी जीवन की एक अनोखी दुनिया बसती है।






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