फिर से माॅरीशस का हुआ चागोस द्वीप
ब्रिटेन ने ऐतिहासिक निर्णय करते हुए चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का फैसला किया है। दशकों से चले आ रहे उपनिवेशवादी विवाद के समाधान के रूप में देखा जा रहा यह समझौता अंतरराष्ट्रीय न्याय...

ब्रिटेन ने ऐतिहासिक निर्णय करते हुए चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का फैसला किया है। दशकों से चले आ रहे उपनिवेशवादी विवाद के समाधान के रूप में देखा जा रहा यह समझौता अंतरराष्ट्रीय न्याय और भू-राजनीतिक संतुलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। भारत ने इस समझौते का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इसे मॉरीशस की पूर्ण स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक बताया है।
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए इस समझौते के तहत, यूके ने आधिकारिक रूप से चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थित सैन्य अड्डा आगामी 99 वर्षों तक अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त नियंत्रण में रहेगा। इस समझौते के अनुसार, ब्रिटेन हर वर्ष मॉरीशस को £101 मिलियन की सहायता राशि देगा, जिससे द्वीपसमूह में विकास और पुनर्वास की योजनाएं चलाई जा सकेंगी।
भारत की महत्वपूर्ण भूमिका
भारत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “यह समझौता अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय के अनुरूप है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए इस कदम को सकारात्मक मानता है।” मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने इस प्रक्रिया में शांत भूमिका निभाई और मॉरीशस की वैध संप्रभुता के समर्थन में लगातार अपनी कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट की। भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए यह समझौता भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा, नौवहन स्वतंत्रता और सहयोग को यह निर्णय मजबूती प्रदान करेगा।
माॅरीशस का हिस्सा था ये द्वीप समूह
चागोस द्वीपसमूह मूलतः मॉरीशस का हिस्सा था, जिसे 1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से अलग कर अपने उपनिवेश “ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र” के अंतर्गत रखा था। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस पर ब्रिटेन के अधिकार को अवैध ठहराया था और द्वीपसमूह को मॉरीशस को लौटाने की सिफारिश की थी। इस ऐतिहासिक फैसले को उपनिवेशवाद के अवशेषों को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।






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