राजनीति नहीं, एकजुटता दिखाने का वक्त
भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां ऑपरेशन सिंदूर को अपने पक्ष में भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी व कांग्रेसाध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कभी ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल...

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भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम हमले के बाद शुरु हुए ऑपरेशन सिंदूर को भले ही स्थगित कर दिया गया है, लेकिन आज भी दोनों देशों के बीच तनाव में कमी महसूस नहीं की जा रही। पाकिस्तान लगातार पहलगाम हमले के बाद साठ साल पुराने सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के मामले में गीदड़ भभकियां दे रहा है। भारत के खिलाफ उसका गलत सूचनाएं फैलाने वाला प्रोपेगेंडा वार अब भी जारी है। पाकिस्तानी की कथित निर्वाचित सरकार ने सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बना दिया। इसके बाद मुनीर के भी भड़काने वाले बयान लगातार सामने आ रहे हैं। इधर, भारत स्थिति पर नजर रखे हुए है तो इस मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस में राजनीति भी शुरू हो गई है।
भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां ऑपरेशन सिंदूर को अपने पक्ष में भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी व कांग्रेसाध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कभी ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हैं तो कभी पाकिस्तान को पहले सूचना दे दिए जाने की बात पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों को विदेशों में भेजकर पाकिस्तान में पल रहे आतंक को बेनकाब करने की रणनीति अपनाई है और इसके अच्छे नतीजे भी सामने आ रहे हैं। इन प्रतिनिधिमंडलों में भाजपानीत एनडीए के अलावा कांग्रेस व अन्य दलों के सांसद भी है, लेकिन कांग्रेस अपने ही नेताओं को प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने के मुद्दे पर भी सरकार से तनातनी करती नजर आई है।
जाहिर है कि पाकिस्तान ने हमेशा आतंक को पाला पोसा है और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान सेना के इशारे पर भारत में आतंकी हमलों में सैकड़ों-हजारों निर्दोष लोगों की जान गई है। पाकिस्तान खुद इस बात को मान चुका है कि उसने अमरीका जैसे देशों के दबाव में आतंकियों को पनपाने का काम किया। ऐसे में मोदी सरकार की इस नीति की सराहना की जानी चाहिए कि उसने पाकिस्तान के एक्सपोज करने के साथ- साथ भारत की संयमित कार्रवाई से दुनिया को अवगत करवाया जा रहा है। ऐसे वक्त में जब राजनीति हो तो पीड़ा होती है।
दुनिया में भारत की पहचान न सिर्फ सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश, बल्कि एक जिम्मेदार मुल्क के रूप में है। सम्भवतः पहली बार भारत ने आतंक को जवाब देने के लिए ऑपरेशन सिन्दूर जैसा आक्रामक नजरिया दिखाया है। हालांकि इससे पहले मोदी के पहले व दूसरे कार्यकाल में सर्जिकल स्ट्राइक हुए हैं, लेकिन इस बार पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया गया है कि उसने दुबारा हिमाकत की तो और सख्त लहजे में जवाब देने में भारत सक्षम है।
हालांकि वैश्विक परिस्थितियों और खासकर चीन-पाकिस्तान के गठजोड़ ने दक्षिण एशिया में कड़ी सामरिक चुनौतियां खड़ी की है, लेकिन भारत आज तक संयम के साथ ही हर स्थिति का जवाब देने का पक्षधर रहा है। इधर, अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चेष्ठा भी भारत-पाकिस्तान के बीच शांति कायम रखने की बजाय इसे और भड़काने की नजर आती है। वे लगभग नौ बार कह चुके हैं कि उन्होंने आपसी व्यापार का हवाला देकर दोनों देशों का झगड़ा रुकवाया। इधर, चीन को चिंता है कि भारत ने पाकिस्तान पर ज्यादा सख्ती की तो उसके पाकिस्तान में निवेश किए गए अरबों डॉलर डूब जाएंगे, इसलिए वह भी पाकिस्तान को परोक्ष-अपरोक्ष रूप से समर्थन दे रहा है। उसने भारत के खिलाफ बांग्लादेश ही नहीं, नेपाल जैसे देशों को भी भड़काने में कोई कमी नहीं रखी है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों का फर्ज बनता है कि वे ऐसे समय में अपना फायदा देखने वाली संकुचित राजनीति की बजाय इन हालात को राष्ट्र की अस्मिता पर चुनौती के रूप में देखें। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार संसद में कहा था कि सरकारें आती हैं व जाती है, लेकिन देश का मस्तक नीचा नहीं होना चाहिए। उनकी यह बात खुद भाजपा और अन्य सभी दलों के लिए आज भी सामयिक है। सरकार को भी चाहिए कि वे खुद श्रेय और सियासी फायदा उठाने की कोशिश से बचे और इस कठिन समय में सभी सियासी दलों को विश्वास में लेते हुए इस संवेदनशील मुद्दे से निपटने का प्रयास करे। वहीं विपक्षी दलों का भी कर्तव्य बनता है कि वे कोई ऐसी बयानबाजी न करे कि जिससे देश को दुनिया के सामने नीचा देखना पड़ा।






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