पाक की नापाक हरकतें थमना कठिन
भारत ने पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत करके और 100 से ज्यादा आतंकियों का सफाया करके पाकिस्तान के झूठ को एक बार फिर एक्सपोज कर दिया...

ऑपरेशन सिंदूर : आतंकियों के ‘भाईजान’ की आगे की राह और मुश्किलभरी
हरीश मलिक,
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक
Table Of Content
- ऑपरेशन सिंदूर : आतंकियों के ‘भाईजान’ की आगे की राह और मुश्किलभरी
- पाक में जैश के मरकज तबाह
- आतंक का आका 14 करोड़ मसूद को देगा
- पुलवामा और संसद पर हमले का आरोपी
- UNSC में पाकिस्तान को घेरेगा भारत
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तात्कालिक प्रभाव
- उदयपुर के तुर्की से ट्रेड रिलेशन खत्म
- तुर्की से सेब खरीदना पूरी तरह बंद
- बॉयकॉट तुर्की सोशल मीडिया पर ट्रेंड
- चीनी अखबारों का सोशल मीडिया खाता बंद
- बलूचिस्तान की आजादी की गुहार
- सिलेबस में आएगा ‘ऑपरेशन सिंदूर’
पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद सोशल मीडिया पर कई दिलचस्प मीम्स की भी बाढ़-सी आ गई। इनमें से ही एक था- ऑपरेशन सिंदूर तो झांकी है, हल्दी-मंडप अभी बाकी है। इसे एक पुरानी कहावत के जरिए पाकिस्तान ने चरितार्थ कर दिखाया है। यह कहावत है कि कितनी ही कोशिश कर लें कुत्ते की पूंछ टेढ़ी की टेढ़ी ही रहती है। पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इतना बड़ा ऑपरेशन होने के बावजूद कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दुनियाभर के सामने आ गया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की सबसे बड़ी शरणगाह बना हुआ है। पाकिस्तान और उसके हुक्मरां पहले इसे लगातार नकारते रहे हैं, लेकिन अब भारत ने पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत करके और 100 से ज्यादा आतंकियों का सफाया करके पाकिस्तान के झूठ को एक बार फिर एक्सपोज कर दिया है। हालात यह हैं कि अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने वैश्विक आतंकवादी मसूज अजहर को 14 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का फैसला किया है। पाक का तर्क है कि आतंकवादियों के खिलाफ भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में आतंकी मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और 4 करीबी सहयोगी मारे गए। इसी मुआवजे से पता चलता है कि पाकिस्तानी सरकार किस तरह आतंकवादियों का समर्थन करती है। भारत ने पाकिस्तान को लोन देते समय पहले ही आईएमएफ को चेताया था कि पाक सरकार लोन का पैसा आतंकवाद को पालने-पोसने में खर्च करेगी। भारत की बात अक्षरश: सच साबित हुई है।
पाक में जैश के मरकज तबाह
पहलगाम के आतंकी हमले में आंतकियों ने निर्दोष हिंदू पर्यटकों की धर्म पूछ-पूछकर निर्दयता से हत्या कर दी थी। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन लिए। सबसे पहले सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया, साथ ही पाकिस्तान के लिए अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया था। इसके बाद सबसे बड़ा एक्शन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू हुआ, जिसके तहत पीओके और पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य प्रशिक्षण अड्डे मरकज़ सुभान अल्लाह पर कई हवाई हमले किए गए। यह स्थान बहावलपुर के पास कराची-तोरखम राजमार्ग पर लगभग 15 एकड़ में फैला हुआ है। जैश के वास्तविक प्रमुख मसूद अजहर, मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर, मौलाना अम्मार और अन्य बड़े आतंकवादी भी यहीं रहते थे। भारतीय मिसाइल स्ट्राइक के ताबड़तोड़ हमलों में सौ से अधिक आतंकी मारे गए। इन आतंकियों में मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और 4 करीबी सहयोगी भी शामिल थे।
आतंक का आका 14 करोड़ मसूद को देगा
पाकिस्तान सरकार भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मारे गए वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर को 140 मिलियन पाकिस्तानी रुपए का मुआवजा देने जा रही है। क्योंकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उसके 14 परिजन मारे गए थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रत्येक मृतक के लिए एक करोड़ रुपए मुआवजा मंजूर किया है, जो मारे गए लोगों के कानूनी उत्तराधिकारियों को दिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि मसूद अजहर को कुल 14 करोड़ रुपए तक मिलेंगे। पाकिस्तानी मीडिया में अजहर के हवाले से जारी एक बयान में पुष्टि की गई है कि मारे गए 14 लोगों में उसकी बड़ी बहन और उसका पति, एक भतीजा और उसकी पत्नी, एक भतीजी और उसके परिवार के अन्य पांच बच्चे शामिल थे। अपने परिजनों के शवों पर बिलखते आंतकी अजहर ने यह भी कहा कि इस हमले में मैं ही क्यों नहीं मर गया?
पुलवामा और संसद पर हमले का आरोपी
काबिले जिक्र है कि मसूद अजहर एक वैश्विक आतंकवादी है। उसे 2019 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा “वैश्विक आतंकवादी” घोषित किया गया था। उसने 2019 में पुलवामा में आत्मघाती हमले की साजिश रची थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। भारत ने इसके बाद भी सर्जिकल स्ट्राइक करते पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों को तहस-नहस कर दिया था। इसके अलावा 2001 में संसद पर हुए हमले में भी मसूद अजहर का नाम सामने आया था। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान युद्ध की कगार पर आ गए थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान ने आतंकवादियों के समर्थन में भारत पर हमला करने का प्रयास किया, जिसे भारत ने जबरदस्त तरीके से विफल कर दिया तथा एक दर्जन पाकिस्तानी एयरबेसों और सैन्य प्रतिष्ठानों को बुरी तरह तबाह कर दिया।
UNSC में पाकिस्तान को घेरेगा भारत
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध समिति की आगामी बैठक में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मामला जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर ली है। आतंकियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाली संयुक्त राष्ट्र की समिति के साथ भारतीय अधिकारी काम कर रहे हैं। इसके तहत भारतीय अधिकारी लश्कर-ए-तैयबा की फ्रंटल शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका पर विस्तृत सबूत पेश करेंगे। इसी ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। भारत अब TRF को वैश्विक आतंकी सूची में डालने और इसके नेताओं पर यात्रा प्रतिबंध तथा आर्थिक पाबंदियां लगाने की मांग करेगा। भारत एक ओर जहां TRF को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करवाने की कोशिश करेगा, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसे घेरने की रणनीति अपनाएगा। बेहद हैरानी की बात है कि एक और भारत में आपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान ऐसे दुर्दांत आतंकवादी के पक्ष में खड़ा हो गया है और भारतीय हमलों में नष्ट हुए घरों के पुनर्निर्माण के लिए मुआवजा योजना का प्रावधान किया है। भारतीय रक्षा अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इन पुनर्निर्मित ढांचों का उपयोग दोबारा आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। भारत ने पहले भी पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को उजागर करने के प्रयास किए हैं, लेकिन चीन कई बार पाकिस्तान का दोस्त बनाकर अपनी वीटो का इस्तेमाल करता है। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में UNSC में पहलगाम हमले की निंदा वाले प्रस्ताव से TRF का नाम हटवाने में भी चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी। इसके साथ ही, भारत पाकिस्तान को फिर से एफएटीएफ (FATF) की ग्रे लिस्ट में डालने के लिए प्रयास तेज कर रहा है और पाकिस्तान को दी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता को भी चुनौती देने की रणनीति बना रहा है। यह कूटनीतिक मोर्चा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है, जिसमें भारत ने नियंत्रण रेखा पार किए बिना पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर स्पष्ट संदेश दिया था कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तात्कालिक प्रभाव
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तात्कालिक प्रभाव अब सामने आने लगे हैं। इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान के ‘भाईजान’ बने तुर्किए, अजरबैजान और चीन की भारत में दुकान बंद होने की तैयारी है। तुर्की और अजरबैजान के खिलाफ तो भारत में ट्रेड स्ट्राइक के तहत इन देशों का हर स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। पाकिस्तान ने जो चीन की फुस्स मिसाइल और तुर्की के ड्रोन भारत पर हमले में इस्तेमाल किए, उनके अवशेष अब देश में मौजूद हैं। चीन और तुर्की अब इन सबूतों को नकार नहीं सकता है। भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ऐसी चोट दी कि वो घुटनों पर आ गया और सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा। पाकिस्तान को सबक सिखा दिया गया है अब उसके ‘भाईजान’ चीन, तुर्की और अजरबैजान को भी आर्थिक चोट पहुंचाई जाएगी।
उदयपुर के तुर्की से ट्रेड रिलेशन खत्म
तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के बाद एशिया की बड़े बाजार में से एक उदयपुर की मशहूर मार्बल मंडी ने तुर्की के साथ अपने सभी ट्रेड रिलेशन खत्म करने का ऐलान किया है। उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स समिति ने यह फैसला राष्ट्रहित और देशभक्ति के चलते लिया है। समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इस फैसले की जानकारी दी है और स्पष्ट किया है कि वे हर उस कदम का समर्थन करेंगे, जो भारत सरकार राष्ट्रहित में उठाएगी। उदयपुर में 50 से अधिक बड़े व्यापारी तुर्की से मार्बल आयात करते थे। भारत हर साल तुर्की से करीब 14 लाख टन मार्बल आयात करता है, जिसमें से 5,000 करोड़ रुपए का व्यापार अकेले उदयपुर से होता था।
तुर्की से सेब खरीदना पूरी तरह बंद
तुर्की के खिलाफ पुणे के व्यापारियों ने भी ‘ट्रेड स्ट्राइक’ का ऐलान कर दिया है। वे अपने देश के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब मंगवा रहे हैं। महाराष्ट्र के पुणे में व्यापारियों ने तुर्की से आयात होने वाले सेबों की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी है। स्थानीय बाजारों से ये सेब गायब हो गए हैं और ग्राहकों ने भी इसका बहिष्कार कर दिया है। हर साल पुणे के फलों के बाजार में तुर्की सेबों की हिस्सेदारी लगभग 1,000 से 1,200 करोड़ रुपए की होती है, लेकिन अब यह कारोबार ठप हो गया है।
बॉयकॉट तुर्की सोशल मीडिया पर ट्रेंड
तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों की इकोनॉमी में टूरिज्म का बहुत बड़ा रोल है। इन दोनों के देश की कुल जीडीपी का 10 फीसदी हिस्सा टूरिज्म से ही आता है। अजरबैजान की बात करें तो यहां 70 प्रतिशत पर्यटक भारत से ही जाते हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का एक और इफेक्ट सोशल मीडिया पर हैशटैग बॉयकॉट-तुर्की ट्रेंड करना भी है। वहीं ट्रेवल एजेंसियों ने भी अजरबैजान और उज्बेकिस्तान के लिए टूर ट्रिप लेना कैंसिल कर दिया है। ऑल इंडिया टूरिस्ट फेडरेशन के मुताबिक दिनों में सिर्फ पूर्वांचल से 15000 से ज़्यादा पर्यटकों ने अपना प्लान और टिकट कैंसिल करा लिया है। उम्मीद की जा रही है कि ये संख्या 25 हज़ार से 30 हज़ार के बीच जा सकती है। ट्रैवल कंपनियां भी इसमें लोगों का साथ दे रही है। कॉक्स एन्ड किंग, एसओटीसी और इज़ माय ट्रिप जैसी ट्रैवेल कम्पनियां लोगों से कोई कैंसिलेशन चार्ज भी नही ले रही हैं।
चीनी अखबारों का सोशल मीडिया खाता बंद
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के दो भोंपू ग्लोबल टाइम्स और शिन्हुआ न्यूज के सोशल मीडिया अकाउंट्स के बाद अब टीआरटी वर्ल्ड के एक्स अकाउंट को भी बंद कर दिया गया है। टीआरटी वर्ल्ड, तुर्की का ब्रॉडकास्टर है, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद लगातार भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैला रहा था। तुर्की और चीन के ब्रॉडकास्टर लगातार भारत के खिलाफ फर्जी खबरें और भ्रामक जानकारियां फैला रहे थे।
बलूचिस्तान की आजादी की गुहार
ऑपरेशन सिंदूर से उत्साहित बलूच नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान से आजादी की घोषणा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत से समर्थन मांगा है। उन्होंने बलूचों को “पाकिस्तानी” कहने से बचने की अपील की और POK पर भारत के रुख का समर्थन किया। पाकिस्तान में अलगाववाद की उठ रही आवाजों में से सबसे मुखर आवाज बलूचिस्तान की है। यहां लंबे समय से पाकिस्तान से अलग होने की मांग की जाती रही है। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान की आवाज को कई बार क्रूरता से दबाया है और कई बलूच नेताओं की हत्याएं भी की गई हैं। अब इस संघर्ष में बड़ा मोड़ आया है और पाकिस्तान के दोबारा टूटने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।
सिलेबस में आएगा ‘ऑपरेशन सिंदूर’
राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है जो ऑपरेशन सिंदूर को स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल कर रहा है। बताया जा रहा है कि एक पुस्तक को नया नाम ‘सिंदूर’ दिया जा रहा है। इसमें भारत द्वारा पाकिस्तान को दिए मुंहतोड़ जवाब की वीरगाथा अब स्कूल और कालेजों में पढ़ाई जाएगी। इस बार स्टूडेंट के सिलेबस में बदलाव किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इसी सत्र से पहले फेज में कक्षा एक से पांचवी तक का पूरा सिलेबस बढ़ेगा। उसके दूसरे और तीसरे फेज में 6 से 12 तक का सिलेबस बदलेगा। ऐसे में सरकार नए शिक्षा सत्र से स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव और अपग्रेडेशन कर रही है। इसमें स्टूडेंट्स को देश प्रेम जागृत करने के लिए भारतीय सेना के साहस और उनके द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किए गए भरपूर एक्शन के बारे में बताया जाएगा।






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