‘अब हम अपना कटोरा और बड़ा करेंगे’
सियासत और अदावत में कमजोर शरीफ इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से दो कदम आगे ही हैं। इतना ही नहीं वे युद्ध और शांति जैसे अहम मुद्दे पूल में स्वीमिंग करते हुए तय करते...

दो चुटकी ‘सिंदूर’ की कीमत पता चलने पर बोले शरीफ बाबू
हरीश मलिक,
वरिष्ठ लेखक और व्यंग्यकार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उनके देशवासी मजाक में पांच शादियों वाला शौहर पीएम भी कहते हैं। सियासत और अदावत में कमजोर शरीफ इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से दो कदम आगे ही हैं। इतना ही नहीं वे युद्ध और शांति जैसे अहम मुद्दे पूल में स्वीमिंग करते हुए तय करते हैं! ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मिली करारी हार के बावजूद अपनी सेना के समक्ष ढींगें हांकने वाले पीएम शरीफ का एक साक्षात्कार तो बनता है। पीओके में मिसाइल स्ट्राइक में ध्वस्त आतंकियों के मरकज में उनसे हुई मजाकिया बातचीत के चुनिंदा अंश…
सवाल – आर्थिक तंगी के बीच आपने युद्ध लड़ा! इससे पाकिस्तान को क्या फायदा हुआ?
शरीफ : क्या आप किसी हट्टे-कट्टे आदमी को भीख दे सकते हैं। नहीं ना। यदि वह लूला-लंगड़ा, बीमार और अपाहिज हो तो आपको उस पर दया आना स्वाभाविक है। युद्ध से हमने कई घाव और ले लिए हैं। भारत हमारी बर्बादी के वीडियो दिखा-दिखाकर एक तरह से हम पर दया ही कर रहा है। अब हम वैश्विक दीन-हीन बन गए हैं। खुदा ने बहुत अच्छा अवसर बख्शा है। अब हम आराम से अपना कटोरा बड़ा कर सकते हैं। हमारी दुर्दशा और बदहाली से इंशाअल्लाह भीख भी निश्चित रूप से ज्यादा मिलेगी।
सवाल – पाकिस्तान तीन दिन में टायं-टायं फिस्स हो गया! आपने ने कहा था कि हम किसी से डरने वाले नहीं हैं। तैयारी पूरी कर रखी है।
शरीफ : हां, हमारी तैयारी तो एकदम दुरस्त रही थी। आप चाहें तो इसकी तस्दीक पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर से भी कर सकते हैं। हमारी इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई से यह भनक मिलते ही कि भारत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कर सकता है, हम दोनों ने ही अपने रिश्तेदारों और करीबियों को तत्काल ही विदेश में शिफ्ट कर सेफ कर दिया था। हमारे ऊपर मिसाइल आती तो हमारी भी पूरी तैयारी थी। हां, मुनीर साहब को कश्मीर को पाकिस्तान के ‘गले की नस’ नहीं बताना चाहिए था। इसे हिंदोस्तान ने बहुत गंभीरता से ले लिया और इसी का परिणाम है कि हमारा मुल्क हारकर गले-गले तक शर्मिंदा हो गया है।
सवाल – इस जंग में तो भारत का साथ कई मुस्लिम मुल्कों ने भी दिया है?
शरीफ : बिल्कुल दिया है। हमने ऐसे मुल्कों की लिस्ट बनाने का आर्डर कर दिया है, जिन्होंने हिंदोस्तान का साथ दिया है। उनका ही असली आर्थिक नुकसान होने वाला है, क्योंकि हमने आर्डर में यह भी जोड़ा है कि ऐसे मुल्कों से लिया गया कर्ज कभी अदा ना किया जाए। भले ही वो चक्रवर्ती स्कायर ब्याज ही क्यों ना लगा दें। पाक को तो रिवाज रहा है- ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं!
सवाल – युद्ध में इतने देशों ने भारत का समर्थन किया, आपके साथ क्यों नहीं खड़े हुए?
शरीफ : बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि तुर्की के अलावा कोई मुल्क हमारे साथ नहीं आया। ना अरब दुनिया ना ही कोई और ताकतवर देश। सबने हमारी पुकार को नजरअंदाज कर दिया। वसाइल की कमी, सियासी तन्हाई और दुश्मन की ताकत ने हमें मुश्किल में डाल दिया। लेकिन आपको क्या लगता है कि आपके वजीरेआजम विदेशों में सिर्फ सैर करने जाते हैं? जी नहीं, वो दूसरे देशों का सर्वोच्च सम्मान इसी शर्त पर लेते हैं कि जब कभी जरूरत पड़े तो उनके साथ खड़े नजर आएं। वो सम्मान देने की मजबूरी में उनके साथ खड़े हैं। क्योंकि आज मोदी को सम्मान देना, सम्मान को सम्मान देने जैसा हो गया है।
सवाल – पीएम मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए सेना को खुली छूट दी थी। इस पर आप कुछ कहेंगे?
शरीफ : हां, हम मानते हैं कि ये हमसे गलती हुई। हमें नकल नहीं करनी चाहिए थी। तुम्हारे वजीरेआजम की तरह हमने भी अपनी सेना को खुली छूट दे दी! लेकिन हमारी सेना ने इसका गलत अर्थ निकाल लिया। उनको लगा कि छूट का मतलब है जंग लड़ो या ना लड़ो तुम्हारी मर्जी। आर्मी के कुछ बड़े अफसर तो इसका अपना अर्थ निकालकर जान बचाकर विदेश में भाग छूटे। ये लोग जंग में पाकिस्तान जिंदाबाद की जगह ‘पाकिस्तान जिंदा भाग’ के नारे लगाने लग गए। छूट देने का हमें जंग में बहुत नुकसान हुआ है।
सवाल – सेना से ज्यादा छूट तो आपने आतंकवादियों को दी हुई है। ट्रेनिंग कैंप से लेकर आतंकी अब हमले धर्म पूछकर करने लगे हैं?
शरीफ : आपका सवाल कुछ हद तक सही है। हमारे रिश्ते अड़ोसी-पड़ोसी से चाहे जैसे हों, लेकिन कट्टर भाइयों से बड़े गहरे और दोस्ताना है। दुनिया पता नहीं क्यों इन्हें आतंकवादी कहती है। ये तो सबसे अधिक कट्टरता से अपना धर्म निभाते हैं। बताइए, अपने धर्म का उसूल मानना क्या गलत है? इसके बावजूद हिंदुस्तानी मिसाइलों ने हमारा वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूट और मरकज उड़ा दिए।
सवाल – लेकिन वो तो आतंकी मसूद अजहर और हाफिज सईद के मुख्यालय और ट्रेनिंग कैंप थे?
शरीफ : आपने ठीक फरमाया। लेकिन ये नाम हिंदुस्तान वालों ने ही दिए हैं। हमारे लोगों के लिए तो वही कालेज-यूनिवर्सिटी हैं। वे वहां पवित्र किताब पर अमल करना सीखते और सिखाते हैं। इतना ही नहीं, जन्नत के लिए जंग तक की परवाह नहीं करते। वो तो आपके वजीरेआजम ने पहले हमारा पानी बंद किया और फिर मिसाइलों से आग लगाई! आग बुझाने को पानी होता तो किसी भी हद तक जा सकते थे।
सवाल- अच्छा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप तो कह रहे हैं कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान गिड़गिड़ाया था?
शरीफ : अरे आप किस गप्पी की बात पर यकीं कर रहे हैं। वो पहले बोले- ‘भारत-पाक में मैंने सीजफायर कराया।’ उसके बाद पलटी मार ली- ‘मैंने सिर्फ वॉर प्रॉब्लम में मदद की, मध्यस्थता नहीं की।’ पहले हमारे मित्र देश चीन पर इतना टैरिफ लगा दिया। उसने हड़काया को कम कर दिया। और तो और, हमसे भी छोटे देश यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ट्रंप को उनके ही दफ्तर में हड़का दिया था। फिर भी वो बाज नहीं आते। जिस पर चाहे प्रतिबंध लगा देते हैं। सबके फटे में टांग अड़ाते हैं। वो कौन होते हैं हमारा सीजफायर डिक्लेयर करने वाले? आप बताइए, जिस देश के एयरबेस, ड्रोन और मिसाइलों की हालत बद-से-बदतर हो गई हो, वो भला दूसरे देश के राष्ट्रपति के सीजफायर डिक्लेयर करने का वेट क्यों करेगा?
सवाल – फिर आप जंग हारकर भी ‘यौम-ए-तशक्कुर’ (जीत पर धन्यवाद दिवस) का उत्सव क्यों मना रहे हैं?
शरीफ : आपने कई बार सुना होगा कि गंभीर किस्म के संक्रमण के चलते किसी व्यक्ति के हाथ या पैर काटने पड़े। लेकिन इससे उसकी जान तो बच गई। अब आप कहते हैं कि जान बच जाने पर व्यक्ति खुशी भी ना मनाए! सांसों से बड़ी नियामत और क्या होगी! वो तो चल रही हैं ना। और हमारी सेना पहली बार थोड़ी हारी है, जो इसका रंज मनाए। हमारी तो हारने में पीएचडी है। हर बार हार पर बेजार हमारे पुराने हुक्मरां होते थे। इस बार हमने हारकर भी जश्न मनाकर दुनियाभर को कंफ्यूज कर दिया है।
चलते-चलते
विराट कोहली ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा क्यों कर दी?
उसे डर था कि सीजफायर की तरह कहीं ट्रंप ही उसका संन्यास डिक्लेयर ना कर दें!






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