सियासत और अकर्मण्यता की भेंट चढ़ रहा एक सपना
बाड़मेर राजस्थान का सीमावर्ती जिला, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, रेगिस्तानी खूबसूरती और तेल भंडारों के लिए जाना जाता है, पिछले कुछ समय से एक अनूठे अभियान के लिए चर्चा में है। पढ़िए वरिष्ठ...

नवो बाड़मेर अभियान
दुर्गसिंह राजपुरोहित
वरिष्ठ पत्रकार
बाड़मेर राजस्थान का सीमावर्ती जिला, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, रेगिस्तानी खूबसूरती और तेल भंडारों के लिए जाना जाता है, पिछले कुछ समय से एक अनूठे अभियान के लिए चर्चा में है। यह अभियान है ‘नवो बाड़मेर’, जिसे बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी ने सितंबर 2024 में शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य बाड़मेर को एक स्वच्छ, सुंदर और मॉडल सिटी के रूप में स्थापित करना था, जिसमें स्वच्छता, यातायात व्यवस्था, शहरी विकास, और पर्यावरण संरक्षण जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया। शुरुआत में इस अभियान को ब्यूरोक्रेसी, राजनीति, और आम जनता ने खूब सराहा। भामाशाहों (दानदाताओं) ने उदारता से धनराशि दी, और शहर की सड़कों पर स्वच्छता के लिए बड़े-बड़े कदम उठाए गए। लेकिन, समय के साथ यह अभियान सियासत की चपेट में आया और नगर परिषद की अकर्मण्यता ने इसकी रफ्तार को धीमा कर दिया। आज, कई महीनों बाद, ‘नवो बाड़मेर’ अभियान अपनी शुरुआती चमक खोता नजर आ रहा है। इस लेख में हम इस अभियान के उद्देश्यों, शुरुआती सफलताओं, चुनौतियों, और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
नवो बाड़मेर अभियान की शुरुआत: एक प्रेरणादायक पहल
टीना डाबी, जो अपनी नवाचारी सोच और सक्रिय प्रशासनिक शैली के लिए जानी जाती हैं, ने सितंबर 2024 में बाड़मेर जिला कलेक्टर का पद संभालते ही ‘नवो बाड़मेर’ अभियान की शुरुआत की। यह अभियान बाड़मेर को स्वच्छ, सुंदर, और व्यवस्थित बनाने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास था। टीना डाबी ने इस अभियान को न केवल प्रशासनिक स्तर पर लागू किया, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “बाड़मेर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है”
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अभियान की शुरुआत भामाशाह तनसिंह चौहान मार्ग से हुई, जहां टीना डाबी ने खुद श्रमदान किया और स्थानीय लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया। इस दौरान, 21 भामाशाहों ने शहर के विभिन्न सड़कों, चौराहों, और पार्कों को गोद लिया, और उनके साथ 32 एमओयू साइन किए गए। भामाशाह जोगेंद्र सिंह चौहान जैसे समाजसेवियों ने तनसिंह चौहान मार्ग को 24 घंटे में नया रूप दिया, जिसमें सड़क की मरम्मत, सफाई, और सौंदर्यीकरण शामिल था।
अभियान के तहत कई नवाचार किए गए। टीना डाबी ने ‘नवो बाड़मेर’ ऐप लॉन्च किया, जिसके जरिए लोग स्वच्छता से संबंधित शिकायतें दर्ज कर सकते थे। इसके अलावा, 2 आईएएस, 3 आरएएस, और 18 अन्य अधिकारियों की एक विशेष टीम बनाई गई, जो नालों की सफाई और सड़कों की मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार थी। अभियान के पहले चरणr में 2 अक्टूबर 2024 तक शहर को कचरा-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया।

शुरुआती सफलताएं: बाड़मेर की बदलती तस्वीर
‘नवो बाड़मेर’ अभियान की शुरुआत ने बाड़मेर में एक नई ऊर्जा का संचार किया। सड़कों पर जमा कचरे को हटाया गया, नालों की सफाई शुरू हुई, और शहर के मुख्य चौराहों का सौंदर्यीकरण किया गया। टीना डाबी की सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा। 17 सितंबर 2024 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर, टीना डाबी ने स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत सड़कों पर झाड़ू लगाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
स्थानीय महिलाओं ने भी इस अभियान की खूब सराहना की। एक स्थानीय गृहिणी, सुधा डांगरा, ने कहा, “पहले जहां सालों से गंदगी के ढेर पड़े थे, वहां अब साफ-सफाई हो रही है। टीना डाबी की मेहनत से शहर की सूरत बदल रही है।” इसके अलावा, अभियान के तहत दिव्यांगों के लिए विशेष कैंप लगाए गए, जिसमें 2,000 डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट जारी किए गए। इस मॉडल को राजस्थान सरकार ने पूरे राज्य में लागू करने का फैसला किया।
टीना डाबी ने ग्रामीण महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठा कदम उठाया। उन्होंने आदेश दिया कि सरकारी बैठकों में समोसे और बिस्किट की जगह स्थानीय महिला समूहों द्वारा बनाए गए खाद्य पदार्थ परोसे जाएंगे, जिससे 200 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला। इन सभी प्रयासों ने ‘नवो बाड़मेर’ को एक जन-आंदोलन की शक्ल दी।
चुनौतियां: सियासत और अकर्मण्यता की बाधाएं
हालांकि, ‘नवो बाड़मेर’ अभियान की शुरुआती सफलताओं के बाद इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी बाधा थी सियासत। नवंबर 2024 में, नगर परिषद की बोर्ड बैठक में बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों ने एकजुट होकर अभियान पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिला प्रशासन ने नगर परिषद को नजरअंदाज किया और भामाशाहों के साथ एमओयू साइन किए, जिससे परिषद की भूमिका कमजोर हुई। कार्यवाहक आयुक्त श्रवण सिंह राजावत ने सदन में स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में गलती हुई
इसके अलावा, कुछ पार्षदों ने आरोप लगाया कि अभियान के नाम पर निजी फर्मों को विज्ञापन का अवसर दिया गया, जिससे स्वच्छता और सौंदर्यीकरण का उद्देश्य पीछे छूट गया। इस विवाद के कारण अभियान को बीच में रोकना पड़ा, जिससे इसकी गति प्रभावित हुई।
दूसरी बड़ी चुनौती थी नगर परिषद की अकर्मण्यता। अभियान के लिए नगर परिषद को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। नालों की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए जरूरी मशीनरी और कर्मचारियों की कमी ने अभियान को धीमा कर दिया। कई क्षेत्रों में सफाई कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन उसे नियमित रूप से जारी रखने में असफलता मिली।

दानदाताओं की उदारता, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं
‘नवो बाड़मेर’ अभियान में भामाशाहों ने उदारता से धनराशि दी। जोगेंद्र सिंह चौहान जैसे समाजसेवियों ने सड़कों के सौंदर्यीकरण और मरम्मत में लाखों रुपये खर्च किए। इसके बावजूद, अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई। इसका एक कारण था प्रशासनिक समन्वय की कमी। भामाशाहों द्वारा गोद लिए गए क्षेत्रों में शुरुआती काम तो हुआ, लेकिन दीर्घकालिक रखरखाव के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई
इसके अलावा, कुछ स्थानीय लोगों का सहयोग न मिलना भी एक समस्या रही। टीना डाबी ने स्वीकार किया कि “लोग पॉलीथिन में कचरा बांधकर सड़कों पर फेंक देते हैं। अगर हम अपनी आदतें नहीं बदलेंगे, तो कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता।” यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि अभियान की सफलता के लिए जन-जागरूकता उतनी ही जरूरी है, जितना प्रशासनिक प्रयास।
विरोध और विवाद: ठेले वालों का आक्रोश
फरवरी 2025 में, अभियान फिर से शुरू हुआ, लेकिन इस बार यह नए विवादों में घिर गया। शहर के वेंडिंग जोन से ठेले और रेहड़ी वालों को हटाने का निर्णय लिया गया, जिससे स्थानीय दुकानदारों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना था कि किराया जमा करने के बावजूद उनके ठेलों को हटाया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया। ठेले वालों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। यह पहला मौका था जब टीना डाबी को बाड़मेर में खुले विरोध का सामना करना पड़ा।
फिर प्रयास: नई शुरुआत की उम्मीद
इन चुनौतियों के बावजूद, टीना डाबी ने हार नहीं मानी। मई 2025 में, उन्होंने अभियान को फिर से शुरू किया। इस बार नालों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। सुबह 4 बजे से शुरू होने वाले इस अभियान में सैकड़ों अधिकारी शामिल हुए। सोशल मीडिया पर भी अभियान की सराहना हुई, जिसमें कई यूजर्स ने टीना डाबी की नेतृत्व क्षमता को प्रेरणादायक बताया।
हालांकि, कुछ पत्रकारों ने अभियान की आलोचना की और इसे ‘प्रचार-प्रधान’ करार दिया। उनका कहना था कि अभियान की शुरुआत तो शानदार थी, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहे। यह आलोचना इस बात की ओर इशारा करती है कि अभियान को सफल बनाने के लिए केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति काफी नहीं है; बल्कि, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, और नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है।
भविष्य की संभावनाएं: क्या नवो बाड़मेर सपना पूरा होगा?
‘नवो बाड़मेर’ अभियान की कहानी एक मिश्रित अनुभव है। एक ओर, टीना डाबी की नवाचारी सोच और सक्रियता ने बाड़मेर में स्वच्छता और विकास के लिए नई उम्मीद जगाई। दूसरी ओर, सियासत, प्रशासनिक समन्वय की कमी, और जन-जागरूकता का अभाव इस अभियान की राह में रोड़े बने।
अभियान को सफल बनाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं:
- नगर परिषद के साथ बेहतर समन्वय: नगर परिषद को अभियान का एक अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनकी भूमिका को स्पष्ट करते हुए संसाधनों का उचित आवंटन किया जाए।
- जन-जागरूकता अभियान: स्कूलों, कॉलेजों, और सामुदायिक केंद्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- दीर्घकालिक योजना: भामाशाहों द्वारा गोद लिए गए क्षेत्रों के लिए रखरखाव की दीर्घकालिक योजना बनाई जाए।
- स्थानीय दुकानदारों का सहयोग: ठेले और रेहड़ी वालों को वैकल्पिक वेंडिंग जोन प्रदान किए जाएं ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: ‘नवो बाड़मेर’ ऐप को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि लोग अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज कर सकें और उनका त्वरित समाधान हो।
‘नवो बाड़मेर’ अभियान टीना डाबी की दूरदर्शिता और नेतृत्व का प्रतीक है। इसने बाड़मेर को एक स्वच्छ और मॉडल सिटी बनाने का सपना दिखाया, लेकिन सियासत और अकर्मण्यता ने इसकी राह में बाधाएं खड़ी कीं। भामाशाहों की उदारता और स्थानीय लोगों की शुरुआती उत्साह के बावजूद, अभियान अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच सका। फिर भी, टीना डाबी की मेहनत और अभियान की पुनर्जनन की कोशिशें इस बात की उम्मीद जगाती हैं कि बाड़मेर एक दिन वाकई ‘नवो बाड़मेर’ बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि, और नागरिक मिलकर इस सपने को साकार करें। बाड़मेर की रेतीली धरती पर यह अभियान एक नई कहानी लिखने की शुरुआत हो सकता है, बशर्ते सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाएं।






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