तूफान ‘साइक्लोनर’ का
साइक्लोनर टीम अस्तित्व में आने के बाद से देश के अलग अलग कौनों में बैठे मादक पदार्थ के तस्करों तक पहुंच कर इन्हें गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर रही...

मारवाड़ में मादक पदार्थ तस्करों में खलबली, सैकड़ों अपराधी पहुंचे सींखचों के पीछे
डूंगरसिंह,
पत्रकार
‘जनता में विश्वास, अपराधियों में खौफ’ राजस्थान पुलिस का यह ध्येय वाक्य भले ही पूरे प्रदेश में बढ़ते आपराधिक आंकड़ों के सामने फीका पड़ता नजर आता हो, लेकिन पुलिस की जोधपुर रेंज में अपराधियों में खौफ वाली बात तो चरितार्थ होती नजर आ रही है। कारण, रेंज के आईजीपी यानी पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में साइक्लोनर टीम की ओर से की जा रही ताबड़तोड़ कार्रवाइयां। साइक्लोनर टीम ने न सिर्फ मादक पदार्थ तस्करों, बल्कि कई खौफनाक अपराधियों में भी डर सा बैठा दिया है।
मादक पदार्थो की तस्करी और इसमें लिप्त वांछित तस्करों के खिलाफ जोधपुर रेंज पुलिस की साइक्लोनर टीम लगातार कार्रवाई कर सफलता के झंडे गाढ़ रही है। नशे के कारोबार से जुड़े लोगों में तो इस टीम का जबरदस्त खौफ और भय व्याप्त है। साइक्लोनर टीम का खौफ इतना है कि मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त किंगपिन हो या देश के अन्य राज्यों में खुद को सुरक्षित समझने वाले व जगह- जगह से अपना नेटवर्क संचालित करने वाले तस्कर, वे भी साइक्लनोर टीम के तूफान में उड़ते नजर आ रहे हैं। साइक्लोनर टीम अस्तित्व में आने के बाद से देश के अलग- अलग कौनों में बैठे मादक पदार्थ के तस्करों तक पहुंच कर इन्हें गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर रही है।
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जोधपुर रेंज पुलिस की साइक्लोनर टीम अब तक 113 कार्रवाइयां कर 25 लाख रूपए से अधिक के इनामी वांछित अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भिजवा चुकी है। रेंज आईजी विकास कुमार ने पश्चिमी राजस्थान में नशे के कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चला रखा है। इसके तहत नशे के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ तो कार्रवाई की ही जाती है, साथ ही उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है, जो नशा करते हैं। यदि किसी का नशा करते का वीडियो सामने आ जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई होना तय है।
नामों की रोचकता
आइजीपी विकास कुमार ने रेंज के जिलों में विभिन्न मामलों में लम्बे समय से फरार बदमाशों की धरपकड़ के लिए एक साल पहले साइक्लोनर टीम गठित की थी। आईजीपी के सरकारी बंगले में ही टीम का विशेष ऑफिस बनाया गया है। इन्हें पकड़ने के लिए ऑपरेशन के अलग- अलग नाम रखे गए। सबसे बड़ी बात साइक्लोनर टीम के अभियान के नाम भी अलग- अलग और काफी रौचक हैं। ये नाम उन वांछित तस्करों के नाम, कारनामों और कार्रवाई से जुड़े होते हैं। इनके नाम बोर्ड पर स्कैच पेन से लिखे गए हैं। आरोपी के पकड़े जाते ही ऑपरेशन के नाम पर क्रॉस कर दिया जाता है।
खुद पुलिस वाले भी निशाने पर
पुलिस के कई कर्मचारी-अधिकारी भी साइक्लोनर टीम के निशाने पर आए हैं। कई पुलिस वालों को निलम्बित व बर्खास्त तक किया गया है। कुछ मामलों में सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान पुलिस कर्मियों के नशा करते हुए वीडियो या तथ्य सामने आए तो इन्हें निलम्बन की तलवार झेलनी पड़ी, मुकदमा हुआ वो अलग।
नशे पर करारी चोट
आईजीपी ने साफ संदेश दे दिया कि नशा कोई भी नहीं करेगा, चाहे आम हो या खास और चाहे पुलिस महकमे के कर्मचारी ही क्यों नहीं, गाज गिरना तय है। नतीजतन, जोधपुर रेंज के जिलों में इन दिनों मादक पदार्थ डोडा पोस्त, अफीम और अन्य मादक पदार्थ लेते लोग घबराते हैं। ऐसे में सामाजिक आयोजनों में मादक पदार्थो का चलन काफी कम हो गया है। यदि होता भी है तो चोरी छिपे।
ऐसे होती है कार्रवाई
साइक्लोनर टीम एक साल में 113 कार्रवाई कर चुकी है। वांछित अपराधी को पकड़ने के लिए उसकी पूरी जानकारी एकत्रित की जाती है। अपराध करने का तरीका व आपराधिक बायोडाटा का पूरा विश्लेषण करते हैं। उसी के आधार पर ऑपरेशन के नाम भी तय किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अपराधी को पकड़ने तक गोपनीयता बनाए रखना है। ऑपरेशन के नाम से ही कार्य करते हैं। इंटरेस्टिंग नाम से अपराधी की पहचान भी होती है। अभियान के नाम रेंज आईजी विकास कुमार खुद तय करते हैं।






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