‘हम क्रांति करके शांति का नोबेल लेकर रहूंगा’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पसंदीदा शौक शादियां करने के अलावा दूसरों के फटे मे टांग अड़ाना भी है। वे भारत-पाक के बीच युद्ध रुकवाने का तीस-मारखांनुमा दावा इतना दोहरा चुके हैं कि अब नींद...

बोल हरि बोल – यू-टर्न का पैटेंट करा चुके अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से डिमेंशिया भी शर्मिंदा
हरीश मलिक,
वरिष्ठ व्यंग्यकार और पत्रकार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पसंदीदा शौक शादियां करने के अलावा दूसरों के फटे मे टांग अड़ाना भी है। वे भारत-पाक के बीच युद्ध रुकवाने का तीस-मारखांनुमा दावा इतना दोहरा चुके हैं कि अब नींद में भी सीजफायर-सीजफायर की आवाजें आती हैं। अरबपति एलन मस्क से लेकर चीन तक उनके कितने ही बयानों से वे इतनी बार मुकर चुके हैं कि अब डिमेंशिया भी शरमाने लगा है। ट्रम्प ने यू-टर्न का तो जैसे पैटेंट ही करा लिया है। इसलिए वे जब चाहे, जैसे चाहे यू-टर्न ले सकते हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के यू-टर्न स्पॉट पर उनसे हुई चकल्लस के चुनिंदा अंश….
सवाल – ट्रंप 2.0 के साथ आप बड़े जोर-शोर से टैरिफ वार लाए। कभी बढ़ाया, कभी घटाया। कभी लगाया, फिर हटाया। और चीन की चकाचौंध के आगे आपकी चूं क्यों बोल गई?
ट्रम्प : आप सवाल को अनावश्यक लंबा खींच रहे हैं। सीधे-सीधे पूछिए ना कि हमने यू-टर्न क्यों लिया? देखिए, पहले आप ये समझिए कि यू-टर्न बना ही क्यों है? यू-टर्न दरअसल यू-टर्न लेने के लिए ही बना है। अब आप यू-टर्न नहीं लेंगे तो इसके कोई मायने ही नहीं रह जाएंगे। अभी तो इस दूसरे कार्यकाल की शुरुआत ही है। तीन-तीन महीने के एक्सटेंशन के अलावा कई यू-टर्न और आ सकते हैं। (मुस्कराकर) तब चीन की भी चूं बोल जाएगी!
सवाल – हमने आपके पहले कार्यकाल में मैनहट्टन में आपका ट्रम्प टावर देखा था। वहां बेहद उम्दा किस्म का बार बनाने की कोई खास वजह?
ट्रम्प : हंसते हुए…आप जर्नालिस्ट की नजर पहले वाइन एंड व्हिस्की पर ही क्यों जाती है? भव्य ट्रंप टावर में 60 फुट ऊंचा झरना और कई यादगार वस्तुएं नहीं दिखीं थीं? अब आपने बार की याद दिलाई है तो बता दूं कि वाकई में दो-चार पैग के बाद ही हमें दुनिया की चिंता सताने लगती है। यही वो जगह है जहां पर हमें मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (एमएजीए) के लिए अपने बिजनेस को और बढ़ाने के आइडिया आने लगते हैं। यू नो, बेसिकली आई एम ए सक्सेसफुल बिजनेसमेन। पॉलिटिक्स तो पार्ट-टाइम है!
सवाल – यू आर राइट! शायद इसीलिए आप रूस-यूक्रेन का युद्ध रुकवा नहीं पाए। अब इजराइल-ईरान के बीच क्यों कूद रहे हैं?
ट्रम्प : लुक, वी आर ट्राइंग अवर बेस्ट….। हमने अपनी ओर से पूरी कोशिश की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जैलेंस्की को व्हाइट हाउस बुलाया। डराया-धमकाया और लंच भी कराया। लेकिन वो पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख मुनीर की तरह हमारे बहकावे में नहीं आए। दरअसल, वो बेसिकली कॉमेडियन हैं। इसलिए वॉर को भी कॉमेडी ही समझ रहे हैं। अब हमारा बिजनेस आइडिया ये है कि इनको बेचे जाने वाले हथियारों की कीमतें बढ़ा दी जाएं। युद्ध रुका तो ठीक, वरना अपना खजाना तो भर ही जाएगा। और जहां तक ईरान पर हमले की बात है, तो इसकी उलटी गिनती पहले ही शुरू हो गई थी। दुनिया को अब दिखा। भला इस्लामिक कंट्री ईरान का परमाणु बम हम कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं?
सवाल – परमाणु बम तो पाकिस्तान के पास भी है। फिर आप ईरान का ही विरोध क्यों कर रहे हैं?
ट्रम्प : एक्चुअली, आई लव पाकिस्तान। यह मुल्क भले ही बहुत गरीब है, लेकिन हमारे दिल के बहुत करीब है। यहां के लोग छोड़िए.. सैन्य प्रमुख तक इतने भोले-भाले हैं कि व्हाइट हाउस के छोटे से लंच पर ही कुर्बान हो जाते हैं। इस गोश्त-युक्त लंच की खातिर अपने जमीर, अपने पाकिस्तान, अपने दोस्त ईरान.. सबका सौदा करने में ये जरा भी देर नहीं लगाते। इस पर भी एक्सट्रा बोनस ये कि पाक ने हमारे लिए नोबेल पीस प्राइज की ऑफिशियल पैरवी भी कर दी है। आई लव दिस स्प्रिट!! ये सारे गुण ईरान में कहीं नजर नहीं आते।
सवाल – लेकिन आपने ऐसा क्या बड़ा काम किया है, जिसके लिए आपको नोबेल पीस प्राइज मिले?
ट्रम्प : काम (आंखें मींचकर) …वो तो इतने किए हैं कि बस पूछो मत। क्या आपको पता है कि सर्बिया और कोसोवो के बीच पहले क्रांति और फिर शांति कौन लाया? डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और रवांडा के बीच पहले झगड़ा और फिर समझौता किसने कराया? वही, जिसके साथ आज आपको इंटरव्यू का सौभाग्य मिला है। मुझे तो मिस्र और इथियोपिया की युद्धभूमि में ही नोबेल पीस प्राइज मिल जाना चाहिए था। रूस के खिलाफ यूक्रेन के राष्ट्रपति को दबाने, धमकाने और हड़काने का काम हमने ही किया। बमुश्किल एक करोड़ की आबादी वाले इजराइल में इतनी शक्ति कहां थी कि वो अकेला ईरान से भिड़ जाए। उसके पीछे भी असली ताकत हम ही हैं। बस आप यह मान लीजिए कि विश्व में जहां-जहां युद्ध है, वहां है अमेरिका और वहां हैं हम। बोले तो हम हैं यम!!
सवाल – तो क्या अब आपको नोबेल पीस प्राइज मिल जाएगा?
ट्रम्प : असलियत में मुझे इतने सारे युद्धों में ‘सक्रिय भूमिका’ निभाने के लिए एक बार नहीं, बल्कि 4-5 बार नोबेल पीस अवार्ड मिल जाना चाहिए था। लेकिन इतना चालाक और स्मार्ट होने के बावजूद नोबेल देने वालों को मेरी शक्ल ही पसंद नहीं आती। कभी-कभी तो मुझे लगता है कि मैं चाहे कुछ भी कर लूं, लेकिन ये लोग नोबेल शांति पुरस्कार मुझे शायद ही देंगे! अपने पास अकूत दौलत है, लेकिन यह ऐसी चीज है जो खरीदी नहीं जा सकती। वरना इतनी मिन्नतें करने की ट्रम्प की आदत नहीं है! लेकिन अभी दुनिया में कितने ही देश हैं, जहां युद्ध नहीं हुआ है, इसलिए मैंने भी हार नहीं मानी है। हम क्रांति से शांति का नोबेल लेकर रहेंगे। जब तक सांस है, विश्वास है।
सवाल – लेकिन आप भारत-पाक वार के बीच सीजफायर कराने का राग बार-बार क्यों अलाप रहे हैं?
ट्रम्प : देखो, पाकिस्तान तो अपना बच्चा है। लेकिन भारत जिस तेजी से दुनियाभर में अपनी पैठ बना रहा है, वह हतप्रभ करने वाला है। इकोनॉमी की रफ्तार बुलेट ट्रेन से भी तेज है। इस ट्रेन को रोकने के लिए कुछ तो करना ही होगा। वरना दूसरे देशों का एक्सीडेंट तय है। इसलिए अपन ने जानबूझकर ऐसा बयान दे डाला। बाकि काम को हर बात के सबूत मांगने वाला आपके यहां का विपक्ष पूरा कर ही रहा है।
सवाल – आप पर यह भी आरोप हैं कि दूसरे देशों में युद्ध भड़काकर अपना खजाना भरने में लगे हैं।
ट्रम्प : इस अमेरिकी राष्ट्रपति पर यह आरोप लगाना एकदम अनर्गल है। इतिहास में जाकर देखिए कि अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा सौदागर कैसे बना? अमेरिका की इकोनॉमी का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ हथियारों के निर्यात पर निर्भर है। साल 2024 में ही अमेरिका ने 318.7 बिलियन डॉलर के हथियार बेचे हैं। सोचिए, अगर दुनिया से युद्ध बंद हो जाएं तो हमारी इकोनॉमी का क्या होगा? इसलिए सभी अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसे ही खजाना भरते रहे हैं। कई बार यह भी देखने को मिला है कि अगर दो देशों में लड़ाई हो रही हो तो अमेरिका उन दोनों देशों को हथियार सप्लाई करता है। वो अमेरिका से हथियार लेकर एक-दूसरे पर आक्रमण करते हैं। यदि जंग में कुछ कमी रह जाए तो हमें मजबूरी में कूदना पड़ता है। ईरान पर अमेरिका का आक्रमण इसका ताजा उदाहरण है। आपको भी यह समझना होगा कि देशों के बीच होने वाले युद्धों पर ही हमारी इकोनॉमी टिकी है। और अपने देश की मजबूती के लिए हम कुछ भी करेगा….!!






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