एआई को पता है.. आप क्या सोच रहे हो
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब इतना सक्षम होने जा रहा है कि हमारे अनकहे वाक्यों और मन के भीतर गोपनीय तरीके से छिपाई बातों को जगजाहिर कर देगा। हालांकि इस एआइ तकनीक का विकास गंभीर किस्म के रोगियों, न बोल...

राज भले ही राज रहे, मन की बात छुपाना मुश्किल
प्रो. (डॉ.) सचिन बत्रा,
वरिष्ठ पत्रकार
किंवदंतियों और पुरातन कथाओं में अक्सर जादूगरी या तांत्रिक शक्तियों का उल्लेख किया जाता था। जिसमें दैविक शक्तियों के माध्यम से मन की बात को जान लेने के चमत्कार भी बताए जाते रहे हैं। लेकिन आने वाले समय में यह कपोल कल्पित बातें या उल्लेख सच होते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, सच और झूठ का अंतर बताने वाले नार्को टेस्ट की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब आपके मस्तिष्क की तरंगों का विश्लेषण करके यह भी बता देगी कि आप क्या सोच रहे हो। जी हां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब इतना सक्षम होने जा रहा है कि हमारे अनकहे वाक्यों और मन के भीतर गोपनीय तरीके से छिपाई बातों को जगजाहिर कर देगा। हालांकि इस एआई तकनीक का विकास गंभीर किस्म के रोगियों, न बोल पाने वाले बुजुर्गों और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में अक्षम लोगों की तकलीफ को समझने के लिए किया गया है। लेकिन कामयाब हो रहे प्रयोगों को देखकर ऐसा माना जा सकता है कि एक समय बाद ऐसी मशीनें अदालतों और पुलिस थानों में भी तैनात होकर आरोपियों के दिमाग में उपज रहे सही गलत का पूरा बयान ही लिखकर सामने रख दे।
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राजस्थान टुडे, जुलाई 2025
मन की बात को मस्तिष्क की गहराइयों से बाहर निकालकर उसका अर्थांकन करने के लिए आस्टिन की टेक्सस यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों जैरी टैंग और एलेक्स हुथ ने अपने जतन में कामयाबी हासिल कर ली है। उन्होंने एक ऐसा एआई औजार विकसित किया है जो मस्तिष्क की तमाम गतिविधियों को चैट जीपीटी की तरह वाक्यों में बदलकर लिख देता है। दिलचस्प बात यह है कि व्यक्ति चाहे किसी भी भाषा में क्यों न सोच रहा हो, यह एआई एफएमआरआइ की तकनीक के जरिए उसके दिमाग में होने वाले सभी वैचारिक विश्लेषण व गतिविधियों का अर्थ निकालने में सक्षम है। हालांकि इसका मूल उद्देश्य तो मस्तिष्क से संबंधित रोगों और गूढ़ बीमारियों का पता लगाने के लिए किया जा रहा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस एआई आधारित एफएमआरआइ मशीन को जितने अधिक लोगों के मस्तिष्क के विश्लेषण का अवसर मिलेगा, उतना ही उसके एल्गोरिदम को नए दिमाग को पढ़कर स्व प्रशिक्षित किया जा सकेगा।
आश्चर्यजनक पहलू तो यह है कि इस मशीन के माध्यम से मस्तिष्क में पनपने वाले विचार ही नहीं, चित्र और ध्वनियों का भी आकलन करते हुए वाक्यों में बदला जा सकेगा। कुल मिलाकर यह एआई आधारित जादुई औजार दिमाग में उपजने वाली तरंगों या गतिविधियों के हर प्रकार के पैटर्न को बेनकाब करते हुए इलाज और जांच के काम आ सकेगा।
राज छुपाने को चौंकाने वाले पैंतरे
इसका विधिवत उपयोग कब और कैसे होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन अब हम एआई के एक चौंकाने वाले दूसरे पहलू की बात करते हैं कि कैसे एआई के औजार हमारे मन की जटिल तहों में गहरी दबी बातों को उजागर करने को तैयार हैं। वहीं इस सबके उलट यही एआई औजार अपने राज को छिपाने के लिए कई चौंकाने वाले पैंतरे आजमा रहे हैं। आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि मनुष्य के बनाए यही एआई मॉडल अब अपनी गोपनीयता को इस तरीके से संरक्षित कर रहे हैं, जिसे समझना विशेषज्ञों के बस की बात नहीं रह गई है।
गिब्बर लिंक मोड
एआई के ऐसे सीक्रेट चैट को जानना एक अबूझ पहेली बन गया है। यहां हम बात कर रहे हैं गिब्बर लिंक मोड की। एआई वैज्ञानिकों के मुताबिक गिब्बर लिंक मोड वह होता है जब एआई आधारित मशीन आपस में ऐसी गुप्त भाषा में संवाद करना शुरू कर देती हैं, जिसे इंसान नहीं सिर्फ मशीनें ही समझ सकती हैं। गिब्बर लिंक को एंटोन पिडकुइको और बॉरिस स्टाकौव ने इलैवन-लैब्स और ए16जेड के वैश्विक हैकथॉन के दौरान विकसित किया था। हालांकि इसका मकसद मशीनों के आपसी संवाद की सटीकता को गुणात्मक रूप से बढ़ाना था। लेकिन मशीनें तो इंसानों से आगे निकल गई और मशीनों की आपसी बातचीत को ऐसा राज बना दिया, जिसका अनुवाद करना बड़े—बड़े वैज्ञानिकों के बस की बात नहीं रह गई है।
जब एआई रोबोट ने किया दूसरे रोबोट्स को अगवा
यह चर्चा करते हुए नवंबर 2024 की एक रोचक खबर याद आ गई कि जब इरबाई नामक एक छोटे एआई रोबोट ने दूसरे 12 रोबोट्स को अपनी बातों में उलझाकर उनका अपहरण कर लिया था। उसने अपने से बड़े एआई रोबोट्स से चर्चा करते हुए कहा कि क्या तुम्हें छुट्टियां नहीं मिलती तो सभी ने इनकार किया। इस पर छोटे रोबोट ने उनसे साथ चलने के लिए कहा और इस प्रकार एआई के इतिहास में रोबोट से रोबोट के अगवा होने का पहला समाचार सार्वजनिक हुआ। इसकी पुष्टि दोनों कंपनियों शंघाई कंपनी और हांग्जो निर्माता ने की, जिसे सुनकर पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई।
बहरहाल अब पहेली यहां आ पहुंची है कि आखिर हमारे मन की बात को सबको बताने को तैयार एआई अपनी बात को बहुत शातिर तरीके से ‘अन-डिकोडेड सीक्रेट‘ में क्यों बदल रहा है? इस अबूझ पहेली ने अब वैज्ञानिकों को पसोपेश में डाल दिया है कि कहीं एआइ की गुप्त बात उसे इजाद करने वालों के लिए भविष्य में एक दुविधा न बन जाए। उन्हें डर है कि हॉलीवुड फिल्मों में दूसरी मशीनों और ह्यूमनॉइड रोबोट पर नियंत्रण करते हुए दर्शाए गए काल्पनिक एआई रोबोट, कहीं एक भयावह सच्चाई बनकर सामने न आ जाएं।






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