पेंशन नहीं, परीक्षा चल रही है साहब!
जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में दिनों शिक्षा नहीं, शंका का माहौल है। सात महीने से पेंशन नहीं मिली, पर विश्वविद्यालय प्रशासन कह रहा है, “सब ठीक है, प्रक्रिया चल रही...

धरना 51वें दिन में घुस गया है। पेंशनर तपती धूप में तपस्या कर रहे हैं और विश्वविद्यालय के वातानुकूलित कक्षों में बैठे अधिकारी ‘कृपादृष्टि’ से भी दूर हैं। पेंशनर पूछ रहे हैं, “आख़िर हमारा कसूर क्या है?” जवाब मिलता है “आपने रिटायर होने की ग़लती की।”
पुतले फूंके जा रहे हैं, और रास्ता रोका जा रहा है, लेकिन प्रशासन की संवेदनशीलता छुट्टी पर है। लग रहा है जैसे विश्वविद्यालय ने नया पाठ्यक्रम शुरू किया है ‘सेवानिवृत्तों से निपटने की कला।’
यह कोई साधारण आंदोलन नहीं, ये पेंशन की प्रतीक्षा में हो रहा ‘मन का उपवास’ है। मगर साहबान के मन में दया नहीं, सिर्फ़ नोटिंग है।
काश इस विश्वविद्यालय में कभी ‘मानवता विषय’ भी पढ़ाया जाता, तो शायद पेंशनरों की दुर्दशा इतनी शर्मनाक न होती।
जय हो जोधपुर की इस ज्ञानपीठ की। जहां पेंशन नहीं, परीक्षा मिलती है धैर्य की, अपमान की और अनदेखी की!






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