AI से धारदार हो रहे जासूसी औजार
हमारे देश में भी अब बहुत खामोशी से भ्रष्टाचार पर नकेल डालने के लिए एल्गोरिदम और एआइ आधारित डिजिटल जासूस और डिटेक्टिव टूल अपनी धार तेज़ करते जा रहे...

खोजबीन व विश्लेषण में डिजिटल औजारों पर बढ़ी निर्भरता
प्रो. (डॉ.) सचिन बत्रा,
वरिष्ठ पत्रकार
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एआइ यानी कृत्रिम मेधा के इस दौर में खोजबीन, पड़ताल, विश्लेषण और आकलन के लिए डिजिटल औजारों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। इसका कारण है कि एक तरफ कम लागत के लाभ और दूसरी ओर सीमित समय में परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं। लिहाजा अब तो भ्रष्टाचार को भांपने के लिए पूरी दुनिया में एआइ औजारों का उपयोग और खोज चरम पर है। दिलचस्प बात यह है कि भ्रष्टाचार को चिन्हित करने से लेकर सबूत हासिल करने में भी एआइ अपनी डिटेक्टिव भूमिका का निर्वाह कर रही है, जिससे जन के धन का दुरुपयोग पाबंद करते हुए सुशासन व पारदर्शिता के लक्ष्य हासिल किए जाने लगे हैं।
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वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार को भंग करने के लिए कदम उठाना, एक ओर साहस तो दूसरी ओर मजबूरी बनती जा रही है। इसका मुख्य कारण प्रक्रियाओं का लगातार ऑनलाइन होना है। जर्मनी में वित्त संबंधी धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले उजागर करने के लिए ‘हॉक’ एआइ नामक टूल विकसित किया है। पेरू की सरकार ने सार्वजनिक खरीद की अनियमितताओं की पहचान करने के लिए ‘प्रोक्योर नेट’ औजार ईजाद किया है। इसी प्रकार अफ्रीकी देशों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की निगरानी और विश्लेषण के लिए ‘इंटिग्रिटी वॉच’ एप का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे ही मनी लॉन्ड्रिंग का पता लगाने सहित वित्तीय गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए सिंगापुर के बैंक ‘साइलेंट ऐट’ एआइ का सफल इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं न्यूजीलैंड में धन संबंधी धांधली की शिनाख्त के लिए ‘वीका’ नामक डेटा माइनिंग टूल बहुत उपयोगी साबित हो रहा है। इसी तरह अमेरिका में सरकारी स्तर पर अनुबंधों में अनियमितता या धोखेबाजी को चिन्हित करने के लिए ‘पोलरिस एआइ’ बहुत कारगर माना गया है। ऐसे ही यूक्रेन में एंटी करप्शन एक्शन सेंटर ने ‘प्रो—जोरो’ नामक एआइ संचालित टूल के जरिए सरकारी अधिकारियों ही नहीं, जनता को भी फर्जीवाड़े व संभावित अनियमितताओं की अग्रिम चेतावनी देना शुरू कर दिया है। मजेदार बात तो यह है कि ब्राजील में तो विविध परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के जोखिम को जानने और उसकी मैपिंग के लिए ‘करप्शन रिस्क मैप’ नामक एआइ औजार को तो हेराफेरी की भविष्यवाणी करने वाला सार्थक ज्योतिषी माना जा रहा है।
सरकारी योजनाओं पर ‘आइ—रश’ से निगरानी
यही नहीं हमारे देश में भी अब बहुत खामोशी से भ्रष्टाचार पर नकेल डालने के लिए एल्गोरिदम और एआइ आधारित डिजिटल जासूस और डिटेक्टिव टूल अपनी धार तेज़ करते जा रहे हैं। उदाहरण के लिए ‘आइ—रश’ नामक एप सरकारी योजनाओं की निगरानी करता है। वहीं ‘विजिलेंस एप’ के माध्यम से जनता भ्रष्टाचार के मामलों को रिपोर्ट कर सकती है। इसी प्रकार ‘ओजीडीपी’ यानी ओपन गवर्नमेंट डाटा प्लेटफार्म सरकारी डाटा की निगरानी करते हुए असामान्य गतिविधियों की पहचान करता है। दूसरी ओर ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ इंडिया नामक संगठन भ्रष्टाचार के विविध पहलुओं का अध्ययन और पहचान करते हुए उसका समाधान मुहैया कराने सहित एआइ उपकरण विकसित करता है। ऐसे ही स्टेक्यू टेक्नोलॉजी नामक कंपनी ने ‘क्राइम जीपीटी’ नामक एक एआइ टूल तैयार किया है, जो पुलिस के लिए भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में बहुत सहयोगी माना जाता है। उल्लेखनीय है कि इसका सफल इस्तेमाल जी—20 सम्मेलन के दौरान किया गया था। इससे पुलिस को साक्ष्य जुटाने में भी मदद मिली थी। हालांकि यह सच है कि एंटी—करप्शन के मामले बहुत पेचीदा होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस, ‘प्रिडिक्टिव पोलिसिंग एआइ’ औजार के माध्यम से वित्तीय प्रक्रियाओं का विश्लेषण करते हुए भ्रष्टाचार के मामलों की पहचान कर रही है। यही नहीं, इन नवविकसित औजारों की मदद से अदालतों में अपराधियों के खिलाफ साक्ष्य पेश करना भी अब संभव हो गया है। इसी प्रकार हमारी सरकार ने आधार डाटा एनालिसिस में एल्गोरिदम एआइ का उपयोग कर भ्रष्टाचार ही नहीं, नकली लाभार्थियों की पहचान करते हुए फर्जीवाड़े रोकने के सराहनीय प्रयास किए हैं। उधर तेलंगाना सरकार भी ‘टी—स्केन’ एआइ टूल का उपयोग करते हुए सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों को बेनकाब करते हुए गबन और घपलेबाजी की रोकथाम करने में जुटी है।
गबन के जटिल मामले सुलझाना आसान
दुनिया भर के विशेषज्ञों की माने तो अब धन गबन के जटिल मामले भी एआइ की मदद से सुलझाना बेहद आसान हो गया है। एक बहुत ही रोचक उदाहरण पेरू के समाचार संस्थान ‘ओजो पब्लिको’ का है, जिसके विकसित किए गए ‘फ्यून’ नामक एल्गोरिदम आधारित औजार ने ढाई लाख पब्लिक कांट्रेक्ट की जांच करते हुए भ्रष्टाचार के खतरे का प्रतिशत भी बताया और मामले भी उजागर किए। इसे वर्ष 2020 में श्रेष्ठ नवाचार की श्रेणी में सिग्मा अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार आइसीआइजे यानी इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्टस ने एआइ की मदद से लाखों दस्तावेजों की जांच करते हुए बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा करते हुए पनामा पेपर्स और पापर पेपर्स जैसी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट सार्वजनिक की थी। इसके चलते अब भ्रष्टाचार की पड़ताल के लिए एआइ समाधानों की मांग भी बढ़ती जा रही है। लिहाजा औजार ईजाद करके समाधान सुलभ कराने का एक नया कारोबार करवट ले रहा है। दुनिया भर में ग्लोबल इंटीग्रिटी, ग्लोबल विट्नेस, सनलाइट फाउंडेशन, द इन्वेस्टिगेटिव फंड और स्टेक्यू टेक्नोलॉजी जैसी कंपनियां भ्रष्टाचार के विरुद्ध औजार बनाने में जुटी हैं तो दूसरी ओर कई कंपनियां लालफीताशाही और गबन की जांच सुविधा और सेवाएं देने में जुट गई हैं।
कुल मिलाकर मिलीभगत, मुनाफाखोरी, मिलावट और मनमानी के खेल को एआइ औजार जेल तक पहुंचाने में कामयाब हो रहे हैं। वहीं एल्गोरिथम आधारित डिजिटल औजार सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार को चिन्हित करने में सक्षम माने जा रहे हैं। इन एआइ एप्स के माध्यम से डाटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, पैटर्न रिकॉग्निशन, एल्गोरिथम डिटेक्शन और डाटा माइनिंग करते हुए संदिग्ध लेनदेन और रहस्यमय घोटाले भी सार्वजनिक करना बेहद आसान हो गया है।






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