सुखी जीवन का सूत्र: कम तनाव, अधिक संतुलन
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव एक स्वाभाविक साथी बन चुका है। लेकिन इसे अपनी सोच और जीवन पर हावी होने देना सबसे बड़ी भूल है। तनाव को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है कि हम अपने जीवन में स्पष्ट...

सकारात्मक दृष्टिकोण और सही जीवन प्रबंधन से ही मिल सकता है सच्चा सुख
डॉ. गौरव बिस्सा,
मैनेजमेंट ट्रेनर, मोटिवेशनल स्पीकर
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तनाव और ज़िंदगी लगभग समानार्थक शब्द बन गए हैं। जीवन में यदि सकारात्मक तनाव न हो तो हम कोई भी कार्य करने की प्रेरणा ही नहीं पाएंगे। सकारात्मक तनाव को यूस्ट्रेस कहा जाता है, जो हमें लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है। दौड़ के अंतिम क्षणों में पूरी ताकत लगाना, कठिनाइयों से जूझकर आगे बढ़ना, चुनौतियों को अपनाना, ये यूस्ट्रेस के उदाहरण हैं। लेकिन हमें डिस्ट्रेस यानी नकारात्मक तनाव से बचना चाहिए। यह कार्य का अत्यधिक बोझ, बॉस या सहकर्मियों से कटु संबंध, पारिवारिक क्लेश आदि के रूप में सामने आता है। हाल ही में बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा किए गए मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस क्वोशेंट एट वर्कप्लेस सर्वे से यह साफ हुआ कि डिस्ट्रेस तेजी से बढ़ रहा है।
– कॉर्पोरेट जगत के 73 फीसदी कर्मचारी मानते हैं कि नकारात्मक तनाव उनकी सेहत और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है।
– 48 फीसदी कर्मचारी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक स्थिति में हैं।
– 82 फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य सुधार के लिए छुट्टी और आराम आवश्यक हैं।
– 51 फीसदी कर्मचारियों में कार्यस्थल पर प्रेरणा की कमी देखी जा रही है।
तनाव को खुद पर हावी न होने देने के लिए हमें जीवन में एक सार्वभौमिक सिद्धांत अपनाना होगा— 40-30-20-10 का सिद्धांत।
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40-30-20-10 का सिद्धांत
यह सिद्धांत तनाव को कम करने का एक सरल और प्रभावी उपाय है।
– 40 फीसदी कार्य और लोग- आपके नियंत्रण में होते हैं। इन कार्यों में आप निपुण होते हैं और सफलता लगभग सुनिश्चित होती है। आपके मित्र मंडल में भी लगभग 40 फीसदी लोग ऐसे होते हैं जो वास्तव में आपके अपने होते हैं और आपको बिना शर्त सहयोग देते हैं।
– 30 फीसदी कार्य और लोग- इन पर सफलता पाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। मित्रों या रिश्तेदारों का यह वर्ग “हैंडल विद केयर” वाला है। इनसे अत्यधिक तनाव नहीं होता, बस धैर्य की आवश्यकता होती है।
– 20 फीसदी कार्य और लोग- इनमें आप चाहे जितना प्रयास कर लें, अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। इस 20 फीसदी पर अपनी ऊर्जा व्यर्थ न करें, क्योंकि ये आपके नियंत्रण से बाहर हैं।
-10 फीसदी कार्य- ये आपके दायरे से पूरी तरह बाहर हैं। जैसे एक अध्यापक चाहकर भी पनडुब्बी को रिपेयर नहीं कर सकता।
अब सोचिए, जब आपका नियंत्रण केवल 40 फीसदी कार्यों और लोगों पर है, तो शेष पर तनाव लेने का क्या लाभ? व्यर्थ का तनाव कहीं एल्विस प्रेस्ली जैसी स्थिति न पैदा कर दे।
एल्विस की कथा
रॉक एंड रोल के सितारे एल्विस प्रेस्ली के 500 मिलियन रिकॉर्ड बिक चुके थे। उसके नाम से 70 से अधिक प्रोडक्ट्स बाजार में मौजूद थे। अमेरिका के राष्ट्रपति से ज्यादा सम्पत्ति का मालिक होने के बावजूद एल्विस ने 33 वर्ष की आयु में तनाव और अकेलेपन के चलते नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली। यही है तनाव का सबसे खतरनाक रूप— जब व्यक्ति जीवन के उन 70 फीसदी कार्यों और संबंधों को छोड़कर उन 30 फीसदी में उलझ जाता है जो उसके नियंत्रण से बाहर हैं।
पॉजिटिविटी की ताकत
तनाव से लड़ने का सबसे पहला कदम है खुद को पॉजिटिव बनाना। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टी.एन. चान ने 70,000 महिलाओं पर शोध कर बताया कि सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाली महिलाएं गंभीर बीमारियों से कम ग्रसित होती हैं और अधिक स्वस्थ व युवा दिखती हैं। इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि पॉजिटिविटी के समय शरीर में निकलने वाले सेरोटोनिन और एंडोर्फिन हार्मोन त्वचा को निखारते हैं और व्यक्ति आकर्षक नजर आता है।
अमेरिकी सोशल साइंटिस्ट जेम्स फौलर की स्टडी कहती है कि यदि आपका साथी खुश और पॉजिटिव है तो आपकी उदासी 25 फीसदी तक कम हो जाती है। भारत में लिंक्डइन की रिपोर्ट के अनुसार, 55 फीसदी कर्मचारी नकारात्मकता से परेशान हैं। यही कारण है कि आज मल्टीनेशनल कम्पनियां कर्मचारियों के लिए म्यूजिकल थेरेपी, हैप्पीनेस गेम्स और माइंडफुल एक्सरसाइज जैसे कार्यक्रम चला रही हैं।
तनाव कम करने के उपाय
तनाव को पूरी तरह खत्म करना असंभव है, लेकिन इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
– अस्पताल जाकर गम्भीर रोगियों को देखकर समझें कि आपका तनाव उनसे बड़ा नहीं है।
– इंट्रोस्पेक्शन के लिए अपनी उपलब्धियां लिखें, पुरानी यादें ताज़ा करें, तस्वीरें देखें। यह आत्मबल बढ़ाता है।
– मनोरोगियों की दशा को समझें, जैसे उनके उल-जुलूल शब्दों पर आप ध्यान नहीं देते, वैसे ही आलोचकों की बातों से विचलित न हों।
– उम्मीदें कम करें, हर किसी से अपेक्षा न रखें। ईसा मसीह को भी सैकड़ों रोगियों में से केवल एक ने धन्यवाद दिया था।
– रबर बैंड तकनीक अपनाएं। नकारात्मक विचार आते ही कलाई में बंधे रबर बैंड को खींचें और छोड़ें। हल्का दर्द दिमाग को सतर्क करेगा।
– हंसना भी जरूरी है। बच्चे दिन में 500 बार हंसते हैं, जबकि वयस्क सिर्फ 5-7 बार। लाफ्टर थेरेपी तनाव घटाने में बेहद कारगर है।
– 60 फीसदी समय दूसरों को सुनने में लगाएं और केवल 40 फीसदी बोलें।
– नकारात्मक बातें न कहें और न सुनें। कुछ दिनों में लोग समझ जाएंगे कि आप नेगेटिविटी पसंद नहीं करते।
गीता और तनाव प्रबंधन
श्रीमद्भगवद्गीता स्पष्ट कहती है कि अत्यधिक इच्छाएं ही तनाव का मूल कारण हैं।
– अनियंत्रित इच्छाएं विवेक को ढक देती हैं और व्यक्ति को परेशानियों की ओर ले जाती हैं।
– अपने कर्तव्यों को निष्ठा से निभाना ही स्वधर्म है। इसे निभाने वाला व्यक्ति तनाव से दूर रहता है।
गीता का यही संदेश है कि निष्काम भाव से कर्म करें, परिणाम की चिंता न करें। यही सुखी जीवन का सबसे बड़ा सूत्र है।
वर्क-लाइफ बैलेंस
आजकल कार्यस्थल पर लम्बे समय तक काम करने की चर्चाएं तेज हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि काम और आराम में संतुलन रहना चाहिए। जर्मनी में फिएराबैंड नामक परम्परा के तहत कानून है कि 24 घंटे में से 11 घंटे केवल आराम के लिए तय होंगे। चर्च की घंटी बजते ही लोग काम छोड़कर घर लौट आते थे। हम भी इस सिद्धांत को अपनाएं। न तो काम से भागें और न ही इतना बोझ लें कि “बैल मार खेती” की तरह अपनी ही ऊर्जा खत्म कर लें।
जीवन प्रबंधन का मूल
आनंदित होकर कार्य करना, परिवार और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाए रखना ही जीवन प्रबंधन का सबसे बड़ा रहस्य है। याद रखिए—खुशी बाहर नहीं, बल्कि हमारे दृष्टिकोण में है।






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