तेज वर्सेज तेज: लाल हो रहे लालू के लाल
लालू के लाल कमाल कर रहे हैं। धोती फाड़ के रूमाल कर रहे हैं। लालू ने तो दिल पर पत्थर रखकर और अपने सुरक्षित भविष्य के लिए छोटे तेजस्वी से गठजोड़ कर लिया है। लेकिन बेचारी राबड़ी देवी क्या...

बोल हरि बोल
हरीश मलिक,
लेखक और वरिष्ठ व्यंग्यकार
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लालू के लाल कमाल कर रहे हैं। धोती फाड़ के रूमाल कर रहे हैं। लालू ने तो दिल पर पत्थर रखकर और अपने सुरक्षित भविष्य के लिए छोटे तेजस्वी से गठजोड़ कर लिया है। लेकिन बेचारी राबड़ी देवी क्या करे। उसके दोनों लाल एक-दूसरे को देख लाल हो रहे हैं। उसकी ममता दोनों के लिए हिलोरें मार रही है, लेकिन बीच में तेजप्रताप के लिव-इन रिलेशनशिप की कटार आ रही है। लालू को अपना चारा खाना तो बर्दाश्त है, लेकिन बेटे का कहीं और मुंह मारना भी रास नहीं आ रहा है! लालू को भरोसा है कि कुछ भी कर ले, बड़का तेजप्रताप जीत ना पाएगा, लेकिन वो ‘वोट कटुआ’ जरूर साबित हो सकता है। इसीलिए आरजेडी नेताओं की पतलून जरा ढीली हो रही है। इस बीच, भाजपाइयों की तो तेजप्रताप के एक्स हैंडल पर गिद्ध-दृष्टि बनी हुई है। इधर महागठबंधन के खिलाफ कोई ट्वीट किया तो उधर हर प्लेटफार्म पर वायरल हुआ!
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बूमरैंग बना सोनिया गांधी का फर्जी वोट
कांग्रेस के लिए वोट-चोरी की मुद्दा बूमरैंग साबित हो रहा है। दरअसल, वोट चोरी के इस शिगूफे की बीच एक खुलासा हुआ है कि सोनिया गांधी का वोट तो तब ही बन गया था, जब उन्हें भारतीय नागरिकता भी नहीं मिली थी। बोले तो फर्जी वोट की चोरी। लेकिन सरकार अपनी तो फर्जी वोट का बना लेना बड़ी बात नहीं है। उस सरकार के लिए तो बिल्कुल नहीं जो भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में कर सकती है। दिसम्बर 1987 के अखबारों की कतरनें साक्षी हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ससुराल वालों के साथ लक्षद्वीप छुट्टी मनाने के लिए गए थे। चौंकाने वाली बात तो यह भी है युवराज की छुट्टियों में खलल ना पड़े, इसलिए तब वहां माहीलैंड से लक्षद्वीप तक आम लोगों की एंट्री तक को रोक दिया गया। तत्कालीन सरकार के ऐसे बड़े-बड़े कारनामों को आंकने के बाद ही क्या भाजपाइयों को फर्जी वोट जैसे अदने से आरोप लगाने चाहिए?
फैमिली प्लानिंग अब बनी फैमिली फार्मिंग
एक छोटी कहानी का लब्बोलुआब यह है कि दूसरों के लिए गढ्ढा खोदने वाला खुद उसी गढ्ढे में गिर जाता है। चीन चालू होने के बावजूद उसी गढ्ढे में जा गिरा है। चीन में कभी आबादी को बोझ समझते हुए “वन चाइल्ड पॉलिसी” के तहत अतिरिक्त बच्चे पैदा करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता था। इसके बाद पड़ौसी भारत ने चीन को आबादी में पछाड़कर नंबर वन का ताज हासिल कर लिया। उधर चीन को बूढ़ों की बढ़ती फौज के कारण अपना थूका ही चाटना पड़ा। अब ज्यादा बच्चे होने पर चीन जुर्माना लगाने के बजाय माता-पिता को प्रोत्साहन दे रहा है। 2025 से बच्चे के जन्म पर 3,600 युआन सालाना (लगभग ₹44,000) की सब्सिडी या भुगतान का प्रावधान है। बोले तो पहले जहां पर फैमिली प्लानिंग का जोर था, वहां अब फैमिली फार्मिंग पर फोकस हो गया है। बच्चे पैदा करो और पैसा पाओ!
युवराज की बार-बार की माफी काफी नहीं
एक जमाना था जब मतदाता पत्र से वोट डाले जाते थे। बड़ा सरल समय था। जीतने के लिए सिर्फ बैलेट बाक्स को अपने कब्जे में करना होता था। दबंग, लठैत यह बड़ी आसानी से कर भी लेते थे। बाद में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (इवीएम) आई, जो कांग्रेस को कतई नहीं भाई। क्योंकि कांग्रेस को लगता था कि कुछ राज्यों को छोड़ दें तो ज्यादातर में इवीएम भाजपा के ही वोट उगलती है। इस पर अंगुली ही नहीं, कांग्रेस ने अपना पूरा हाथ का चिह्न उठा दिया। लेकिन बात नहीं बनी। अब बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोट-चोरी का बम लाए हैं। इस शिगूफे पर चुनाव आयोग भड़क गया। शपथ-पत्र दो या देश से माफी मांगो। चचा जान बोले हैं कि एक ही बंदे पर बार-बार माफी का दबाव क्यों? यह अलग बात है कि बंदा पहले ही अलग-अलग केस में इतनी बार माफी मांग चुका है तो एक बार और मांग लेने पर उसका क्या बिगड़ेगा।
कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भले ही ईसाई हों, लेकिन वो भगवद् गीता के इस कथन को शिद्दत से स्वीकारते हैं- कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर। सो वह भी बिना इस बात की चिंता किए कि उन्हें इच्छित फल मिलेगा या नहीं, वार्ता पर वार्ता किए जा रहे हैं। भोज पर भोज कर रहे हैं। यह अलग बात है कि युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पुतिन और जेलेंस्की उन्हें भारतीय कोर्ट की तरह तारीख पर तारीख दिए जा रहे हैं। लेकिन बंदा इस उम्र में भी दृढ़ निश्चय और पक्के इरादे वाला है- चाहे कुछ भी हो जाए, नोबेल पीस प्राइज तो लेकर रहूंगा।
चलते-चलते
सवाल – पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ साहब आजकल कहां हैं..?
जवाब – उन्हें तो ट्रंप भी ढूंढ रहे हैं। शायद उनकी ‘चुप रहने की कीमत’ पर मनचाही टैरिफ मिल जाए!






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