सकारात्मक व्यक्तित्व का जादू
हर इंसान के चारों ओर फैली अदृश्य ऊर्जा, जिसे औरा कहते हैं, उसके विचारों, भावनाओं और कर्मों का दर्पण होती है। यह ऊर्जा न सिर्फ इंसान के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और...

संतुलन, साधना और मर्यादा: औरा का सशक्त सूत्र
रंजना विजय गांधी,
लेखिका
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दुनिया को देखने और समझने का हमारा तरीका सिर्फ आंख या कान से ही नहीं होता, वरन कई बार हमारा आभामंडल यानी हमारी ऊर्जा भी हमारे व्यक्तित्व और जीवन को आकार देती है। “औरा” वह अदृश्य परत है जो हर इंसान के साथ साये की तरह उसके चारों ओर फैली होती है। यह न केवल हमारे मानसिक और भावनात्मक स्थिति का दर्पण होती है, बल्कि यह हमारे संबंधों व सामाजिक प्रभाव को भी निर्धारित करती है।
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“औरा” आखिर है क्या..?
“औरा” को आम भाषा में एक व्यक्ति के कर्मों का आभामंडल, उसकी ऊर्जा, उसके विचारों व भावनाओं का पिटारा है। इसे हम उस चमक या आकर्षण के तौर पर समझ सकते हैं जो किसी इंसान को अन्य लोगों से अलग व प्रभावशाली बनाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें तो औरा हमारे शरीर के ऊर्जा केंद्रों यानी विभिन्न चक्रों और मानसिक स्थिति के साथ जुड़ा होता है। मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक अध्ययन दोनों यह मानते हैं कि हमारी मानसिक और भावनात्मक स्थिति हमारे आस-पास की ऊर्जा पर प्रभाव डालती है। ये हकीकत भी है।
विचारों की शक्ति और औरा
विचार को हम “औरा” का मूल आधार मान सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के विचार नकारात्मक, अविश्वासी या द्वेषपूर्ण हैं, तो उसका आभामंडल कभी स्थिर और आकर्षक नहीं रह पाता। इसके विपरीत, सकारात्मक, प्रेमपूर्ण और रचनात्मक विचार ही किसी इंसान के आभामंडल को आकर्षक बनाते हैं। उदाहरण के लिए, विवेकानंद की सरल और निस्वार्थ सोच ने न केवल लोगों को आकर्षित किया, बल्कि उनके कार्यों में भी ऊर्जा का प्रवाह बना। उनके साथ रहकर लोग प्रेरित होते थे, और इसे हम उनके आभामंडल की शक्ति का जीवंत उदाहरण मान सकते हैं।
भावनाओं का संतुलन
हमारे भावनात्मक अनुभव व विचार भी “औरा” के विकास में महत्ती भूमिका निभाते हैं। क्रोध, ईर्ष्या और भय जैसी नकारात्मक भावनाएं जहां औरा को धुंधला कर देती हैं, वहीं करुणा, सहनशीलता और प्रेम इसे प्रखर व ऊर्जावान बनाते हैं। ये मान कर चलिए कि कैसा भी संकट क्यों न हो, शांत और संतुलित रहने वाला नेता, शिक्षक या संत अपने चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। नेल्सन मंडेला का जीवन इसका जीवंत प्रमाण है। लम्बी जेल की यातनाओं और अन्याय के बाद भी उनके भीतर करुणा और क्षमा का भाव कायम रहा। उनके व्यक्तित्व की यह आभा लोगों को प्रेरित करती रही और उनका औरा स्थायी रूप से प्रभावशाली बना।
कर्म की मर्यादा और औरा
किसी भी इंसान का आचरण व उसके कर्म भी उसके औरा को गहराई प्रदान करते हैं। ईमानदारी, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा से किए गए कार्य किसी भी व्यक्ति को आकर्षक बना सकते हैं। आप देखें, चिकित्सकों और शिक्षकों का औरा अक्सर उनके कार्य के प्रति निष्ठा और सामाजिक सेवाओं से विकसित होता है। ऐसे लोग जब भी लोगों की मदद करते हैं, उन्हें दिशा प्रदान करते हैं, तो उसका आभामंडल प्राकृतिक रूप से लोगों को सुकून भरा अहसास कराता है।
साधना और ध्यान जरूरी
ध्यान, प्राणायाम और आत्मचिंतन जैसी साधनाएं इंसान के आभामंडल के विकास में महत्वपूर्ण हैं। इनका निरन्तर अभ्यास मानसिक शांति और ऊर्जा संतुलन को बढ़ाते हैं। उदाहरण के लिए, योगाचार्य या साधक नियमित साधना से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक ऊर्जा को संचित करते हैं, जिससे उनका औरा अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक बनता है। ध्यान से मन शांत होता है और जब मन शांत होता है तो इंसान अपने भीतर की ऊर्जा से जुड़ता है, और उसका आभामंडल स्वाभाविक रूप से आकर्षक हो जाता है।
सकारात्मक संगति का प्रभाव
हमें ये भी खासतौर से ध्यान में रखना चाहिए कि हम जिन लोगों के साथ समय बिताते हैं, उनका प्रभाव भी हमारे औरा पर पड़ता है। श्रेष्ठ चरित्र, सकारात्मक व उत्साही लोगों का सान्निध्य हमारे औरा को आकर्षक बनाता है। इसके विपरीत नकारात्मक या कुकर्मी लोगों की संगति इंसान के आभामंडल को क्षति पहुंचाते हैं। ऐसे में सकारात्मक और प्रेरणादायक संगति को चुनना भी बेहतर जीवन के लिए जरूरी है।
औरा केवल ऊर्जा का दर्पण ही नहीं, वरन आत्मविश्वास का स्रोत भी है। जब इंसान अपने मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप जीता है, तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और लोगों को प्रेरित करने वाला बनता है। हालांकि औरा को हम एक आध्यात्मिक अवधारणा मान सकते हैं, लेकिन आधुनिक विज्ञान ने भी इसे समझने की कोशिश की है। शोध बताते हैं कि मानसिक स्थिति और भावनात्मक संतुलन के आधार पर ही हमारे शरीर के विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र बदलते रहते हैं। ये तय मानिए कि जब कोई व्यक्ति सकारात्मक भावनाओं व मानसिक संतुलन में जी रहा होता है, तो उसका शरीर नकारात्मक ऊर्जा को कम और सकारात्मक ऊर्जा को अधिक उत्सर्जित करता है, जो उसे आकर्षक बनाती है। अतः हमें ये मानना चाहिए कि औरा को विकसित करने के लिए जैसे ही हम मानसिक और भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक विचार, मर्यादित कर्म, नियमित साधना और सकारात्मक संगति जैसे गुणों को अपनाते हैं, तो हमारा औरा न केवल हमारी आंतरिक ऊर्जा को शक्तिशाली बनाता है, बल्कि यह दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनता है। औरा केवल व्यक्तित्व की चमक नहीं, बल्कि जीवन की सकारात्मक ऊर्जा और महान मूल्यों का प्रतीक भी है।






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