स्वस्थ हृदय के लिए बदलें आदतें
भारत में अचानक कार्डियक अरेस्ट और हृदय रोग से होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या ने हर वर्ग को चिंतित कर दिया है। खासतौर पर युवाओं में 30–40 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले...

साक्षात्कार
भारत में अचानक कार्डियक अरेस्ट और हृदय रोग से होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या ने हर वर्ग को चिंतित कर दिया है। खासतौर पर युवाओं में 30–40 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। राजस्थान में भी यह स्थिति गंभीर होती जा रही है। ऐसे में ज़रूरी है कि पाठकों तक सही जानकारी और बचाव के उपाय पहुंचें। इसी उद्देश्य से वरिष्ठ पत्रकार राकेश गांधी ने ज़ायडस हॉस्पिटल अहमदाबाद के वरिष्ठ कार्डियक एवं हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संदीप अग्रवाल से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
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सवाल: हाल के वर्षों में युवाओं में अचानक कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़े हैं?
डॉ. अग्रवाल: आजकल यह माना जाता है कि युवाओं में अचानक हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी हैं, लेकिन हाल ही में केएम हॉस्पिटल के प्रसिद्ध पैथोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप ने इस विषय में बताया कि हम पिछले 10-15 सालों से युवा मरीज़ों में हृदय में ब्लॉकेज की प्रक्रिया में वृद्धि देख रहे हैं, और इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे कि गतिहीन जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)। कोविड के बाद इंटरनेट पर बच्चों का या युवा लोगों का निर्भरता बहुत बढ़ गई है, और इसके कारण शारीरिक श्रम और शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। इसके अलावा, हमारे खाने-पीने के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आया है। आजकल ऐसा माना जाता है कि हमारे युवा मरीज़ों या युवा लोगों में मधुमेह और रक्तचाप की काफी समस्याएं पाई जाती हैं, जो पहले के ज़माने में बुज़ुर्गों में अधिक देखी जाती थीं। ये दो स्थितियां ऐसी हैं जिनके कारण हृदय से संबंधित रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, जागरूकता बढ़ने के कारण भी अब हृदय से संबंधित समस्याएं काफी जल्दी पता चल जाती हैं और कुछ लक्षण होने पर समय पर उपचार लेने की वजह से कई सारी समस्याएं टल भी जाती हैं। इसलिए, हार्ट अटैक युवाओं में अचानक से नहीं बढ़े हैं। ये पिछले 15-20 सालों से अपने रहने-सहने में बदलाव, अपनी दिनचर्या में बदलाव और जो हमारी मेडिकल कंडीशन्स हैं, या धूम्रपान व तम्बाकू का सेवन बढ़ने से ये दिक्कतें अधिक बढ़ी हैं।
सवाल: क्या कोरोना महामारी के बाद से हृदय रोग के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है?
डॉ. अग्रवाल: कोरोना महामारी के बाद निश्चित रूप से हम लोग देख रहे हैं कि हार्ट अटैक के मरीज़ बढ़ गए हैं, खासकर कम उम्र वाले मरीज़। इसके कारण स्पष्ट नहीं हैं। शायद ये जीवनशैली में बदलाव के कारण ही बढ़े हैं, या फिर ऐसा भी देखने में आया है कि कोरोना की वजह से हमारा रक्त का गाढ़ापन बढ़ सकता है और क्लॉटिंग होने का जोखिम बढ़ जाता है। अगर ये क्लॉट हृदय की धमनियों में बनते हैं, तो ये हार्ट अटैक की स्थिति पैदा कर सकते हैं। तो यह निश्चित रूप से कहना मुश्किल है कि कोरोना का सीधे तौर पर हार्ट अटैक से संबंध है या नहीं, लेकिन निश्चित रूप से जो हम प्रैक्टिस में देखते हैं, खासकर जिन युवा मरीज़ों को कोरोना हुआ था, उन मरीज़ों में हार्ट अटैक का जोखिम निश्चित रूप से बढ़ जाता है।
सवाल: युवाओं के बीच बढ़ते हृदय समस्याओं के पीछे मुख्य कारण क्या हैं – खानपान, तनाव या कुछ और?
डॉ. अग्रवाल: युवाओं में हृदय समस्याओं के बढ़ने का मुख्य कारण हमारी जीवनशैली में बदलाव ही है। पहले के ज़माने में जो शारीरिक श्रम, व्यायाम, शारीरिक खेल युवा पीढ़ी करती थी, अब वह काफी कम हो गया है। इसके अलावा, हमारा जो खानपान है वह काफी पश्चिमीकृत हो गया है, जिसमें वसायुक्त (Fatty) और तली हुई चीज़ों का उपयोग काफी बढ़ गया है। जंक फूड का उपयोग काफी बढ़ गया है। तो मुख्य कारणों में हमारी गतिहीन जीवनशैली के अलावा मोटापा और अनियमित तला हुआ खाना है। इसके अलावा, एक चीज़ हमारे देश में हम देखते हैं कि कम उम्र में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या काफी देखी जाती है। अगर ये दोनों अनडिटेक्टेड रह जाते हैं, तो 5-10 साल में ये हृदय की धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि नियमित जांच करानी चाहिए, खासकर 40 साल की उम्र के बाद। बाकी कारण जो हैं, अगर तंबाकू का सेवन या सिगरेट धूम्रपान कोई करता है, तो उसको निश्चित रूप से हृदय की परेशानी होने की आशंका बढ़ जाती है। तनाव हमारे जीवन का एक हिस्सा है और इसको पूरी तरह से खत्म करना लगभग असंभव है, लेकिन तनाव प्रबंधन सीखना बहुत ज़रूरी है। यह किसी भी प्रकार से किया जा सकता है, जैसे योग, ध्यान या खेलों के ज़रिए। हम कुछ समय अपनी सेहत के लिए निकाल सकते हैं। पारिवारिक इतिहास (Family History) हृदय रोग के लिए एक काफी महत्वपूर्ण कारण माना जाता है, और जिन मरीज़ों का पारिवारिक इतिहास बहुत मज़बूत है, जिनके माता-पिता में या एक करीबी परिवार में, जैसे भाई-बहनों में हृदय की समस्या हुई हो, उनको और ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत होती है। इन मरीज़ों में काफी कम उम्र से ही नियमित स्वास्थ्य जांच करने से जल्दी पता लगाया जा सकता है और बचाव किया जा सकता है।
सवाल: कार्डियक अरेस्ट से पहले कौन से चेतावनी संकेत दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं?
डॉ. अग्रवाल: कई बार मरीज़ों को हार्ट अटैक के सामान्य लक्षण नहीं होते हैं। सामान्य लक्षणों में सीने में दर्द होना, घबराहट होना, घबराहट के साथ पसीना आना, ये सामान्य हार्ट अटैक के या हृदय के लक्षण होते हैं। कई मरीज़ों को, खासकर मधुमेह के मरीज़ों को, ये लक्षण न होकर उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है, खासकर चढ़ाई या सीढ़ियां चढ़ने से। या फिर सीने में दर्द न होकर पीठ में दोनों कंधों के बीच में दर्द हो सकता है। कई बार ये दर्द जबड़े में हो सकता है या फिर कान में हो सकता है। तो ये लक्षण कभी-कभी नज़रअंदाज़ हो जाते हैं। काफी मरीज़ों को गैस्ट्रिक लक्षण ज़्यादा होते हैं। अगर मैं सामान्य सलाह दूं, तो कोई भी लक्षण जिससे आपकी चिंता बढ़ती हो या आपको ऐसा लगता हो कि ये ठीक नहीं है, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और एक बार बुनियादी जांच (Basic Test) हो जाए तो उससे थोड़ी स्पष्टता लाना आसान होता है कि जो भी आपके लक्षण हैं, वे हृदय से संबंधित हैं या नहीं। युवा मरीज़ों में अगर ऐसे कोई लक्षण हों, तो ख़ासकर उसको भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, यह मानकर कि युवा मरीज़ों में हार्ट अटैक नहीं होते हैं।
सवाल: बचाव के लिए किन आदतों को तुरंत बदलना चाहिए और कितनी उम्र से हार्ट चेकअप करवाना जरूरी है?
डॉ. अग्रवाल: बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव करना बहुत ज़रूरी है। कम उम्र से ही शारीरिक श्रम और खेल नियमित रूप से करना चाहिए। इसके अलावा, अगर आपकी पारिवारिक इतिहास (Family History) है, तो कम उम्र से, सामान्यतः 30-35 की उम्र से, एक बार नियमित जांच के लिए डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए। इसके अलावा, अगर आपकी कोई आदतें हैं, जैसे कि तंबाकू या सिगरेट धूम्रपान, उसको निश्चित रूप से बंद करना चाहिए। इसके अलावा, खाने-पीने पर ध्यान रखने की ज़रूरत है और अपनी ऊंचाई के अनुसार वज़न को सही सीमा में रखना ज़रूरी है।
सवाल: पाठकों के लिए आपका क्या संदेश होगा जिससे वे दिल की बीमारियों से सुरक्षित रह सकें?
डॉ. अग्रवाल: मेरा संदेश यही होगा कि पहले के ज़माने में हमारा मानना ऐसा था कि हार्ट अटैक 60-65 की उम्र के ऊपर ही होता था, लेकिन आजकल जैसा हम देख रहे हैं कि उम्र का और हार्ट अटैक का कोई संबंध नहीं बचा है। यहां तक कि युवा आयु वर्ग में भी हार्ट अटैक अचानक हो सकते हैं, जिसकी वजह से किसी की जान जा सकती है। इसलिए अगर आपको उच्च रक्तचाप है, मधुमेह है, तो उसको नियंत्रण में रखना बहुत ज़रूरी है। अगर आप धूम्रपान करते हैं या आप तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें बंद करना ज़रूरी है। अगर आप अनियमित खाना खा रहे हैं, वज़न ज़्यादा है, तो आपको जीवनशैली में बदलाव करना है, आहार पर नियंत्रण करना है और नियमित व्यायाम करने की ज़रूरत है। अगर हम बुनियादी रोकथाम योग्य कारकों का ख़्याल रखेंगे, तो मैं यह मानता हूं कि हमारा हार्ट अटैक का जोखिम काफी नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा किसी भी तरह के संकेतों को नज़रअंदाज़ न करके उनका पूरी तरह से जांच कराएं, जिससे कोई भी ब्लॉकेज आपकी शुरुआती अवस्था में पता लगाकर उसका उचित उपचार हो सके।






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