‘दिल’ के लिए जरूरी सही ‘ईंधन’
आजकल युवाओं में बढ़ रहे कार्डियक अरेस्ट का कारण हमारी अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान है। हमारे लिए ये जानना बहुत जरूरी हो गया है कि कैसे हमारी थाली में रखा हर निवाला हमारे दिल को प्रभावित करता है, और...

मधुलिका सिंह,
पत्रकार एवं लेखिका
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आज के दौर में हृदय रोग और कार्डियक अरेस्ट अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। यह एक चौंकाने वाली सच्चाई है कि 12-15 साल के स्कूली बच्चों से लेकर 25-30 वर्ष के युवा तक इसका शिकार हो रहे हैं। यह एक गंभीर चेतावनी है जो हमारी आधुनिक जीवनशैली और, सबसे बढ़कर, हमारे खानपान की आदतों की ओर इशारा करती है। इस आलेख में हम इसी बात पर गहराई से नज़र डालेंगे कि कैसे हमारी थाली में मौजूद भोजन और हमारी दिनचर्या अनजाने में हमारे दिल को कमजोर कर रही है, और आयुर्वेद हमें कैसे सही रास्ता दिखा सकता है।
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थाली और दिल का गहरा रिश्ता
डाइटीशियन डॉ. रूही ज़हीर के अनुसार, हमारी थाली में रखा हर निवाला दिल की धड़कन को प्रभावित करता है। आजकल छोटे बच्चों व युवाओं में भी हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। इनका मूल कारण अस्वस्थ जीवनशैली (जैसे जंक फूड, मोबाइल/टीवी पर ज्यादा समय, व्यायाम की कमी), अनियमित दिनचर्या, अत्यधिक मानसिक तनाव, पढ़ाई का दबाव, मोटापा, मधुमेह और हाई बीपी जैसी समस्याएं हैं।
हृदय रोगों से बचाव के लिए आहार में ये बदलाव ज़रूरी हैं:
सात्त्विक और पौष्टिक आहार : बच्चे व बड़े सभी सात्त्विक आहार लें, जिसमें दूध, घी, फल, हरी सब्ज़ियां, दलिया और मूंग दाल शामिल हों।
हानिकारक खाद्य पदार्थों से दूरी : जंक फूड, पैकेज्ड फूड, कोल्ड-ड्रिंक्स, ज्यादा तला-भुना और मैदा से बने भोजन का सेवन बिल्कुल कम करें।
हृदय-हितकर फल : रोज़ाना आंवला, द्राक्ष (अंगूर), अनार और सेब जैसे फल ज़रूर खाएं।
भोजन का दबाव नहीं : भोजन हल्का और पचने योग्य हो, बच्चों पर ज्यादा खाने का दबाव न डालें।
आयुर्वेद के अनुसार हृदय-हितकारी जीवनशैली
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. इकबाल खान गौरी के अनुसार, आयुर्वेद हृदय रोगों की रोकथाम के लिए हल्का, सात्त्विक, ताजे फल-सब्ज़ियों, साबुत अनाज, दालें और हृदय-हितकारी औषध द्रव्यों का सेवन करने की सलाह देता है।
1. आहार और पोषण
हितकर आहार : जौ (यव), गेहूं (गोधूम), पुराने चावल (शाली), मूंग दाल, मसूर दाल, हरी सब्ज़ियां (परवल, लौकी, तोरी, करेला, पालक, मेथी) और ताजे फल (आंवला, अनार, सेब, अमरूद, द्राक्षा) हृदय के लिए उत्तम हैं।
तेल और घी : अल्प मात्रा में गोघृत, तिल का तेल, सरसों का तेल और अलसी का तेल उपयोग करें।
मसाले : लहसुन, अदरक, हल्दी, दालचीनी, अजवाइन और काली मिर्च रक्त शुद्धि और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सहायक होते हैं।
अहितकर आहार : अत्यधिक तैलीय, तले-भुने, मसालेदार और फास्ट-फूड से बचें। अत्यधिक नमक, चीनी, मैदा और जंक फूड भी हानिकारक हैं। मांस, ज्यादा दही और बहुत भारी भोजन का सेवन न करें।
2. दिनचर्या और विहार
ब्राह्ममुहूर्त जागरण : सुबह सूर्योदय से पहले उठने से मन प्रसन्न रहता है और रक्त संचार अच्छा होता है।
नियमित व्यायाम : रोज़ाना 30-45 मिनट हल्का व्यायाम (पैदल चलना, योगासन) करें। बच्चों को खुले मैदान में खेलने दें, केवल मोबाइल/टीवी पर न रखें। दिन भर बैठने की बजाय शारीरिक गतिविधियां ज़रूरी हैं।
योगासन और प्राणायाम : भुजंगासन, शवासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, सूर्य नमस्कार जैसे आसन और अनुलोम-विलोम, भ्रामरी व नाड़ीशोधन जैसे प्राणायाम दिल व फेफड़ों को मज़बूत बनाते हैं।
अभ्यंग (तेल मालिश) : सप्ताह में 2-3 बार तिल तेल/सरसों तेल से शरीर की मालिश रक्त प्रवाह को सुधारती है।
सोने की आदतें : रात को समय पर सोएं (6-8 घंटे की नींद ज़रूरी है)। भारी भोजन के बाद तुरंत न लेटें और दिन में सोने की आदत से बचें।
3. मानसिक स्वास्थ्य
तनाव, क्रोध और चिंता हृदय रोगों के प्रमुख कारण हैं। इनसे बचने के लिए प्रतिदिन 10-15 मिनट ध्यान करें। मधुर संगीत सुनें, सकारात्मक पुस्तकों का अध्ययन करें और अच्छे संग का महत्व समझें।
विशेष आयुर्वेदिक उपाय और सुझाव
अर्जुन की छाल : यह आयुर्वेद में हृदय का श्रेष्ठ रसायन है। इसका नियमित सेवन (काढ़ा या चूर्ण) हृदय के लिए बहुत उत्तम है।
अन्य उपाय : आंवला, लहसुन और द्राक्षा का नियमित प्रयोग करें। शतावरी और अश्वगंधा तनाव और हृदय की कमजोरी में उपयोगी हैं। हफ्ते में 1 दिन फलाहार/उपवास करके हृदय और पाचन को विश्राम दें।
बच्चों के लिए विशेष : आंवला, शहद और हल्का च्यवनप्राश (डॉक्टर की सलाह से) बच्चों के हृदय और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अच्छा है। ताज़ा दूध में आधा चम्मच घी और 1 इलायची मिलाकर पीना मस्तिष्क और हृदय को बल देता है।
आहार नियम : समय पर भोजन करें। भोजन को शांति और प्रसन्नता से ग्रहण करें। नियमित गर्म जल या हर्बल जल (जीरा, अजवाइन, मेथीदाना युक्त) पिएं।
हमारे शरीर का दिल उसका इंजन है। जिस तरह गाड़ी के इंजन को सही ईंधन की ज़रूरत होती है, उसी तरह हमारे दिल को भी स्वस्थ रहने के लिए सही खानपान और जीवनशैली की आवश्यकता है। उम्र चाहे कोई भी हो, एक संतुलित थाली, पर्याप्त व्यायाम और मानसिक शांति ही वह ईंधन है जो दिल को सुचारू रूप से चलाता है। याद रखें, सिर्फ 4 मिनट में सीपीआर देकर किसी की जान बचाई जा सकती है।






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