सही समय पर सीपीआर से बच सकती है जान
विश्व में रोज़ हज़ारों व्यक्ति किसी भी कारणवश आकस्मिक मृत्यु का शिकार होते हैं। ये समझा जाता है की अगर इन सबको समय पर सीपीआर मिल जाए तो इनमें से 80 प्रतिशत को जीवित अस्पताल पहुंचाया का सकता है और...

डाॅ. साकेत गोयल,
हृदयरोग विशेषज्ञ, कोटा
विश्व में रोज़ हज़ारों व्यक्ति किसी भी कारणवश आकस्मिक मृत्यु का शिकार होते हैं। ये समझा जाता है की अगर इन सबको समय पर सीपीआर मिल जाए तो इनमें से 80 प्रतिशत को जीवित अस्पताल पहुंचाया का सकता है और इनमें से एक तिहाई सकुशल घर भी वापस जा सकते हैं। इसीलिए हमें सीपीआर अवश्य सीखना चाहिए। यह हमारे घर, कार्यस्थल या समाज में कभी भी, कहीं भी किसी का जीवन बचा सकता है।
सीपीआर – कार्डिओ पल्मोनरी रिस्सिटेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हमें व्यक्ति के दिल और फेंफड़ों का कार्य कर, मस्तिष्क को रक्त का संचार देना है| किसी भी आपात स्थिति में अगर कोई व्यक्ति बेहोश हो जाता है तो उसे होश में लाने की प्रक्रिया ही सीपीआर है। यह आपात स्थिति हार्ट-अटैक, रोड दुर्घटना, इलेक्ट्रिक शॉक, डूबना, दम घुटना आदि कुछ भी हो सकती है। इसमें रोगी को उसके सीने के बीच के हड्डी पर हाथ रखकर दोनों हाथों से जोर-जोर से पुश किया जाता है, ताकि व्यक्ति का हृदय वापस चलना शुरू हो जाए यही सीपीआर होता है। ऐसे में सबसे पहले आपको यह सीख लेना भी जरूरी है कि सामने वाले व्यक्ति को किस प्रकार सीपीआर देना है और ना आप कुछ गलत कर बैठ सकते हैं।
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सीपीआर देने का तरीका
तुरंत एम्ब्युलेंस बुलाएं, ताकि एमरजेंसी रूम तक पहुंचने से पहले चिकित्सीय कर्मचारी मरीज को जीवन रक्षक उपचार देना शुरू कर सकें।
– व्यक्ति को किसी कठोर सतह पर लेटाएं
– सीपीआर की विधि बेहोश व्यक्ति के दाहिनी तरफ से करें
– दोनों हाथों के उंगलियों को एक दूसरे में फंसाकर हथेलियों के तरफ छाती के मध्य भाग पर रखें
– 100-120 प्रति मिनट की गति से हाथों को छाती पर 5 सेन्टीमीटर की गहराई तक जोर से दबाएं
– इसके साथ-साथ आप उस व्यक्ति को मुंह से अपना मुंह लगाकर उसके शरीर में सांस फूंके।
– कृपया इस गति को बीच में ही न रोके, क्योंकि एक मिनट के विलंब की वजह से बचने की संभावना 10 प्रतिशत प्रति मिनट से कम हो सकती है
– जल्द से जल्द बेहोश व्यक्ति को नज़दीकी अस्पताल में ले जाएं
आजकल अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा पारंपारिक चेस्ट कॉम्प्रेशन और माउब-टू-माउथ ब्रीदिंग देने के बजाय केवल हाथों से सीपीआर देने की सिफरिश की जाती है। यह माना जाता है की केवल सही तरीक़े से चेस्ट कम्प्रेशन करने पर 80-90 प्रतिशत सीपीआर प्रक्रिया पूरी हो जाती है। अपने एक जीवन में किसी एक व्यक्ति को भी जीवन देना, आपके लिए एक सौभाग्य की बात है।
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हल्के में न लें शुरुआती लक्षणों को
युवाओं में हृदय रोग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लाइफस्टाइल डिसऑर्डरहै। स्क्रीन टाइम बढ़ने और शारीरिक सक्रियता घटने से उनकी धमनियां समय से पहले ही कठोर हो रही हैं। यह प्रीमेच्योर हार्ट डिजीज का सबसे बड़ा कारण है। लंबे समय तक तनाव और खराब खानपान भी एक बड़ी वजह है, जिससे 30 की उम्र में ही धमनियों में अवरोध (ब्लॉकेज) बनने लगता है। युवा अक्सर चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। सीने में हल्का दर्द, सांस फूलना, थकान या पसीना आना हार्ट डिजीज के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि समय रहते चेतना और अनुशासन अपनाया जाए तो इन खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
डॉ. अनिल शर्मा
एमडी मेडिसिन, जयपुर






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