स्मार्ट सिटी का सपना, 12 करोड़ की बर्बादी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमींदोज हुए अजमेर के ‘सात अजूबों’ की कहानी दरअसल आधुनिक विकास, प्रशासनिक अदूरदर्शिता और पर्यावरणीय अनदेखी का ऐसा उदाहरण है, जिसे पूरे देश को देख-समझ लेना...

अजमेर के सात अजूबों की सच्ची कहानी
रमेश शर्मा,
वरिष्ठ पत्रकार
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अजमेर की आनासागर झील किनारे बने सेवन वंडर्स पार्क को जमींदोज़ कर दिया गया। स्मार्ट सिटी के नाम पर 12 करोड़ की लागत से खड़े किए गए विश्व-धरोहरों के प्रतिरूप सब बेकार और गैरकानूनी साबित हुए। इस पूरे मामले में अधिकारियों की अदूरदर्शिता और सरकारी सिस्टम की लापरवाही उजागर हुई। कोर्ट की रूलिंग से साफ है कि इस प्रोजेक्ट में नियोजन से लेकर क्रियान्वयन तक हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों ने पर्यावरणीय कानूनी प्रावधानों को न सिर्फ ताक में रखा, अपितु जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद किया। अजमेर के सेवन वंडर्स पार्क का गिराया जाना देशभर के लिए एक नजीर है कि शहरी विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन, सार्वजनिक हित और नियमों का पालन अनिवार्य है। मास्टर प्लान और वेट लैंड नियमों की अवहेलना को लेकर यह राजस्थान में पहली बड़ी कार्रवाई है।
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यह मामला शुरू हुआ जब पूर्व भाजपा पार्षद अशोक मलिक ने मार्च 2023 में एनजीटी में याचिका दायर कर आनासागर झील के वेटलैंड क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण तथा मास्टर प्लान उल्लंघन का मुद्दा उठाया। सवाल उठने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी निष्क्रिय रहे। आखिरकार मामला एनजीटी, फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रशासन को जमकर फटकारते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने में जल निकायों और वेटलैंड की सुरक्षा को नज़रअंदाज करना हैरान करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, “आपकी कार्यप्रणाली से ऐसा नहीं लगता कि आप अजमेर को स्मार्ट बनाना चाहते हैं। हमें आश्चर्य है कि जल निकायों और आर्द्रभूमि की सुरक्षा के बिना कोई शहर कैसे स्मार्ट बन सकता है, और उन पर अतिक्रमण करके शहर कैसे स्मार्ट बन सकते हैं।” यह टिप्पणी पूरे सिस्टम के यह मुंह पर गहरा तमाचा है।
आदेशों की अनदेखी
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और कड़ी टिप्पणी के पीछे अहम वजह यह है कि इसमें मास्टर प्लान, वेटलैंड नियम, पर्यावरण अधिनियम और कोर्ट के पूर्व आदेशों की अनदेखी कर सैकड़ों टन कंक्रीट, स्टील से बने ढांचे अति—संवेदनशील क्षेत्र में खड़े कर दिए गए। पार्क के निर्माण और संचालन में जब शुरुआती आपत्तियां उठीं, वह वक्त चेत जाने का था। पर शासन की चुप्पी और जिम्मेदार अफसरों की अनदेखी ने इस अवैध निर्माण को बेराकटोक चलने दिया। अंततः कार्रवाई तब हुई जब मामला हाईकोर्ट, एनजीटी और अंत में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। प्रशासनिक सुस्ती पर कोर्ट ने फटकार लगाई। छह महीने में आदेश की पालन नहीं होने पर अंतिम चेतावनी के बाद पीला पंजा चला।
एनजीटी ने 11 अगस्त 2023 को इस पार्क को अवैध निर्माण करार देकर हटाने के आदेश दिए। इसके बाद भी एडीए ने जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट में अपील डाली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश बरकरार रखा और मुख्य सचिव को तलब कर पूरे ढांचे के ध्वस्तीकरण के लिए कड़ी समय सीमा निर्धारित कर दी। मुख्य सचिव को भी 25 फरवरी, 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना पड़ा और हलफनामा पेश करके ध्वस्तीकरण के लिए छह महीने का समय मांगा गया। बार-बार चेतावनी के बाद प्रशासन को 17 सितंबर 2025 तक पार्क पूरी तरह हटाने का आदेश मिल गया। सेवन वंडर्स पार्क 12 मार्च 2025 से ही बंद कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रशासन के पास अंतिम विकल्प केवल ‘पीला पंजा’ चलाने का रह गया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि महज निर्माण हटाने से समस्या हल नहीं होगी, आगे वेटलैंड की बहाली, जलधारा और जैव विविधता की पुनर्स्थापना भी जरूरी है।
किसकी जवाबदेही, कैसी कार्रवाई?
ढांचा अब ढहाया जा चुका है। सवाल अब भी कई खड़े हैं कि क्या मात्र निर्माण का हट जाना समाधान है? करोड़ों की लागत, पूरा सरकारी सिस्टम, लेकिन जिम्मेदारी किसकी? स्मार्ट सिटी परियोजना का काम सीईओ, जिला कलक्टर, नगर निगम आयुक्त और एडीए आयुक्त जैसे जिम्मेदार आईएएस अधिकारियों की देखरेख में हुआ, इसी के तहत इतना बड़ा निर्माण हुआ। हालांकि, सेवन वंडर्स के निर्माण की जवाबदेही किसी पर निर्धारित नहीं की गई। सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर निर्माण की अनुमति देने की जिम्मेदारी किसकी है। परियोजना के लिए किसे जवाबदेह ठहराया जाएगा, जिसमें नियमों की अनदेखी करके करोड़ों रुपए खर्च किए गए।
आनासागर का भविष्य
आनासागर झील सिर्फ अजमेर का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों और पारिस्थितिकी का अहम केंद्र है। यूरोप और एशिया के दो दर्जन से अधिक देशों के प्रवासी पक्षी आनासागर झील के किनारे आकर डेरा डालते हैं। झील का निर्माण 12वीं सदी में हुआ। सैकड़ों सालों से यह जीवन, पर्यावरण और पर्यटन जुड़ा है। वेटलैंड बहाली, मिट्टी एवं जलधारा सुधार और स्थानीय जैवविविधता की पुनर्स्थापना, प्रशासन की अगली सबसे बड़ी चुनौती है।
दुनिया के ये 7 अजूबे किए थे स्थापित
– स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, अमेरिका
– एफिल टॉवर, फ्रांस
– लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा, इटली
– ताजमहल, आगरा
– पिरामिड ऑफ गीज़ा, मिस्र
– क्राइस्ट द रिडीमर,ब्राज़ीलकोलोसियम, रोम
इस तरह आया फैसला
11 मार्च 2023: पूर्व भाजपा पार्षद अशोक मलिक ने एनजीटी में याचिका दायर की।
अगस्त 2023: एनजीटी ने इसे अवैध ठहराया।
जनवरी 2024: एडीए ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
25 फरवरी 2025: मुख्य सचिव को कोर्ट में पेश होना पड़ा।
17 मार्च 2025: सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश दिया।
12 मार्च 2025: पार्क बंद कर दिया गया।






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