खैरात बांटो, चुनाव जीतो
आमतौर पर ईमानदार राजनेता की छवि वाले नीतीश इस बार कठिन राजनीतिक चुनौती में घिरे दिखाई पड़ रहे हैं। राज्य में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। एक तरफ विपक्ष के नेता नीतीश के प्रति हमलावर हैं तो दूसरी...

बिहार चुनाव
राधा रमण,
वरिष्ठ पत्रकार
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बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर में प्रस्तावित है। वर्तमान सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर तक है। जाहिर है इससे पहले विधानसभा का चुनाव संपन्न हो जाएगा। चर्चा है कि चुनाव आयोग की टीम अक्टूबर के पहले सप्ताह में पटना आने वाली है। चुनाव की घोषणा उसी समय की जाएगी। इससे पहले प्रधानमंत्री का इस साल का आठवीं बार बिहार दौरा 30 सितंबर को प्रस्तावित है। वह पटना में मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
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दूसरी ओर, कर्ज के मकड़जाल में गले-गले तक उलझे बिहार में इस बार खैरातों की बारिश हो रही है। पिछले 20 वर्षों से सत्ता की कमान संभालने वाले और हाथ बांधकर खर्च करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार जनता के लिए सरकार का खजाना खोल दिया है। आमतौर पर ईमानदार राजनेता की छवि वाले नीतीश इस बार कठिन राजनीतिक चुनौती में घिरे दिखाई पड़ रहे हैं। राज्य में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। एक तरफ विपक्ष के नेता नीतीश के प्रति हमलावर हैं तो दूसरी तरफ एनडीए के सहयोगी भी लंगड़ी मारने को तैयार बैठे हैं। सहयोगी दलों के नेता यह तो कहते हैं कि इस बार चुनाव नीतीश के चेहरे पर लड़ा जाएगा, लेकिन चुनाव के बाद सरकार किसकी अगुवाई में बनेगी, यह बताने को कोई तैयार नहीं है। शायद, इसीलिए नीतीश ने इस बार सरकार का खजाना खोल दिया है। उन्होंने वृद्धावस्था और विधवा पेंशन की राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इसके अलावा करीब एक करोड़ महिलाओं के खाते में रोजगार के लिए 10 हजार रुपये की शुरुआती रकम भेज दी है। इसके तहत कुल दो लाख रुपये प्रति महिला दिये जाने हैं। तीन माह बाद इसका परीक्षण किया जाएगा कि कितनी महिलाओं ने रोजगार प्रारंभ किया है। प्रगति संतोषजनक पाये जाने पर आगे की रकम दी जाएगी। इसके अलावा 16 लाख 4 हजार 929 श्रमिकों को प्रति श्रमिक 5 हजार की दर से वस्त्र भत्ता मद में 802 करोड़ 46 लाख 45 हजार रुपये पिछले 17 सितंबर को ट्रांसफर कर दिये गए हैं। इन पैसों की वसूली नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों को 120 यूनिट बिजली मुफ्त देने, पत्रकारों की मासिक पेंशन 15 हजार करने, बिहार के हर पंचायत में विवाह मंडप बनाने के लिए 50 लाख प्रति पंचायत देने के लिए यानी कुल 8 हजार 53 पंचायतों में 4 हजार 260 करोड़ रुपये कैबिनेट से मंजूर करा दिया है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का वेतन 7 हजार से बढ़ाकर 9 हजार करने और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 1000 से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दिया है। बिहार कैबिनेट ने राज्य के स्कूलों में मिड-डे मील के रसोइयों का मानदेय 1650 रुपये से बढ़ाकर 3300 रुपये कर दिया है। इसके अलावा राज्य के लगभग साढ़े 21 लाख बेरोजगारों को एक हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की भी घोषणा की गई है। बेरोजगारों को यह भत्ता फिलहाल तीन साल तक दिया जाएगा। विकास मित्रों को टैबलेट खरीदने के लिए 25 हजार रुपये दिये जाएंगे। साथ ही उनका परिवहन भत्ता 1900 से बढ़ाकर 2500 रुपये और स्टेशनरी भत्ता 900 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा शिक्षा सेवकों को स्मार्ट फोन खरीदने के लिए 10 हजार रुपये दिये जाएंगे। यह सभी घोषणाएं तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
इससे पहले भी राज्य सरकार तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को एकमुश्त 25 हजार रुपये, कन्या उत्थान योजना के तहत लड़की के जन्म होने पर 5 हजार रुपये, लड़की के 9वीं पास करने पर साइकिल खरीदने के लिए 3 हजार रुपये, इंटरमीडिएट पास करने पर 10 हजार रुपये और ग्रेजुएट करने पर 50 हजार रुपये देती रही है। साथ ही पहली से 12वीं तक यूनिफार्म खरीदने के लिए हर साल 600 से 1200 रुपये का अनुदान अलग से देती रही है। यही नहीं गरीब कन्याओं को विवाह के लिए भी 50 हजार रुपये सरकार देती रही है।
बिहार की माली हालत भी जान लो
अब बिहार सरकार की माली हालत भी जान लेना समीचीन होगा। आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार पर वर्ष 2024-25 में कुल 3 लाख 62 हजार 036 करोड़ का कर्ज था। अगले साल इसके 4 लाख करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है। जानकर आश्चर्य होगा कि राज्य सरकार पर प्रतिदिन 63 करोड़ व्याज की देनदारी रहती है। नीतीश की नई घोषणाओं से राज्य पर करीब 34 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसकी भरपाई की सरकार के पास फिलहाल कोई योजना नहीं है। फिर भी धड़ल्ले से खैरात बांटे जा रहे हैं।
राज्य के ग्राम कचहरी सचिवों को पिछले नौ माह से वेतन नहीं मिला है। सचिवों के संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोरख लाल यादव कहते हैं कि हमारे मानदेय पर ही हमारा परिवार टिका है। हमारे बच्चे दशहरा, दीपावली और छठ महापर्व कैसे मनाएंगे? यही हाल सरकारी अनुदान से चलने वाले कॉलेज के प्राध्यापकों और कर्मचारियों का है। नियमितीकरण की मांग को लेकर वे वर्षों से गुहार लगाते रहे हैं। ऐसे ही एक अनुदान प्राप्त कॉलेज के प्राध्यापक डॉ रामनाथ चौधरी कहते हैं कि ‘जवानी में कॉलेज में ज्वाइन किया था, बुढ़ापा आ गया। पूरा वेतन अभाव में बीता। कभी समय से वेतन नहीं मिला। ‘बिहार के बेरोजगार अपनी मांगों को लेकर पटना आते हैं तो पुलिस डंडे से उनका सिर फोड़ देती है। लोगबाग निराश और हताश हैं। बिहार देश का गरीब राज्य है। रोजगार का साधन नहीं होने से राज्य के लोग पलायन को मजबूर हैं। राज्य की अधिकांश आबादी 5 किलो अनाज के भरोसे है। फिर भी नेता हकीकत से इतर लोगों को सब्जबाग दिखाने से बाज नहीं आते।
हमाम में सभी नंगे
ऐसा भी नहीं है कि बिहारवासियों को अकेले नीतीश कुमार ही सब्जबाग दिखा रहे हैं। मुझे कहने दीजिए कि इस मामले में हमाम में सभी नंगे हैं। प्रधानमंत्री इस साल अब तक सात बार बिहार आ चुके हैं। वह जब भी आते हैं हजारों करोड़ की घोषणाएं कर जाते हैं। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान आरा की एक चुनावी सभा में उन्होंने केंद्र से 125 लाख करोड़ का पैकेज बिहार को देने की घोषणा की थी। 2022 में भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने ही कई मौकों पर कहा था कि प्रधानमंत्री की घोषणाएं ढपोरशंखी थीं। यानी प्रधानमंत्री ने जितना बोला था उतनी रकम नहीं मिली। अब मिल जाएगी, इसकी गारंटी कौन लेगा? शायद इसीलिए प्रधानमंत्री के बिहार आगमन पर राजद सुप्रीमो लालू यादव गाहे-ब-गाहे सोशल मीडिया पर कहते रहते हैं कि ‘साहेब, अगली बार जुमला सुनाने कब आइएगा।’
जनता को सब्जबाग दिखाने में महागठबंधन के नेता भी कम नहीं हैं। हालांकि बिहार में अभी तक किसी पार्टी ने चुनावी घोषणा-पत्र जारी नहीं किया है। फिर भी समय-समय पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सरकार बनने पर माई-बहन मान योजना के तहत राज्य की हर महिला को 2500 रुपये प्रतिमाह देने, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन की राशि 1500 रुपये करने, लाखों बेरोजगारों को नौकरी और रोजगार देने, मेडिकल, इंजीनियरिंग और तकनीकी की पढ़ाई कर रही छात्राओं की फीस माफ करने अथवा 75 प्रतिशत अनुदान देने, राज्य की लड़कियों को पढ़ाई के दौरान बस-ट्रेन में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की बात करते रहे हैं। कांग्रेस और वामदल भी तेजस्वी के सुर में सुर मिलाते रहते हैं।
सब्जबाग दिखाने में पीके भी पीछे नहीं
बिहार की सियासत में तीसरा कोण बनने को आतुर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को भी मुफ्त की योजनाओं से परहेज नहीं हैं। प्रशांत किशोर पुराने चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। वह जानते-समझते हैं कि जनता को बिना सब्जबाग दिखाये बात नहीं बनेगी। इसीलिए वह ‘परिवार लाभ कार्ड’ बनाने की बात करते हैं। इसके तहत प्रत्येक परिवार को प्रति माह 20,000 हजार रुपये की सहायता देने की बात करते हैं। इसमें बिहार में ही रोजगार के जरिये प्रत्येक बेरोजगार को 12 हजार रुपये वेतन देने, घर के बुजुर्ग, दिव्यांग अथवा विधवा को हर महीने 2 हजार रुपये, नकदी फसलों के लिए किसानों को 2500 रुपये प्रति महीना देने, महिलाओं को 4 फीसदी व्याज पर पांच लाख का कर्ज देने (इससे हर माह 2500 रुपये की व्याज बचत होगी) और गरीब परिवार के स्कूली बच्चों को शिक्षा के लिए प्रति माह एक हजार रुपये देने की बात करते हैं। दरअसल, प्रशांत का पूरा जोर राज्य से पलायन रोकने पर है। उनका कहना है कि यदि बिहार के मेधावी पलायन नहीं करेंगे, तभी बिहार की बदहाली दूर होगी। इसके लिए बिहार में ही बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और हरियाणा में खैरात की योजनाएं सरकार बनाने में काफी कारगर रही हैं। देखना दिलचस्प होगा कि बिहार के लोग किसके झांसे में फंसते हैं या बचते हैं।
बहरहाल, बिहार में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। गांव-गली से लेकर चौक-चौराहों पर सियासी चर्चा आम है। पिछले दिनों राजद ने बिहार अधिकार यात्रा निकाली थी जो दस जिलों जहानाबाद, नालंदा, मुंगेर, बेगुसराय, मधेपुरा, खगड़िया, सुपौल, समस्तीपुर, वैशाली होते हुए पटना में समाप्त हुई। फिलहाल भाजपा की ‘चलो जीते हैं’ रथयात्रा निकाली जा रही है। इसमें लोगों को प्रधानमंत्री के जीवन पर आधारित फिल्म दिखाई जा रही है। पिछले दिनों बाढ़ में इस रथयात्रा पर लोगों ने गुस्से में पथराव कर दिया था। दरभंगा और वैशाली में प्रधानमंत्री की मां को गाली देने का मामला भी बिहार में तूल पकड़ रहा है। और तो और, 15 सितंबर को पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन करने गए प्रधानमंत्री ने खुद इस मुद्दे को धार दी। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार कहते हैं कि सभ्य समाज में गाली-गलौज ठीक बात नहीं है। लेकिन मैं पूछते-पूछते थक गया, भाजपा का कोई नेता अथवा मीडिया का कोई मित्र यह बताने को तैयार नहीं है कि सिरफिरे ने प्रधानमंत्री की माता जी को कौन सी गाली दी है।






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