राजनीति के क्षितिज पर पश्चिम से उदय हुआ रवि
यूं तो रवि पूर्व से उदय होता है, लेकिन राजनीतिक क्षितिज पर रवि का उदय किसी भी दिशा में हो सकता है। करीब 15 महीने पहले राजनीतिक क्षेत्र में एक ऐसे युवा सितारे का पश्चिम से उदय हुआ, जिसकी चर्चा लगातार...

राजस्थान टुडे ब्यूरो
यूं तो रवि पूर्व से उदय होता है, लेकिन राजनीतिक क्षितिज पर रवि का उदय किसी भी दिशा में हो सकता है। करीब 15 महीने पहले राजनीतिक क्षेत्र में एक ऐसे युवा सितारे का पश्चिम से उदय हुआ, जिसकी चर्चा लगातार जारी है। चर्चा का आलम यह है कि ना तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर यूजर्स और रील बनाने वालों को फुर्सत है, ना ही राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ियों व प्रशासनिक अधिकारियों को ठीक से सांस लेने दी जा रही है। इस युवा राजनीतिक सितारे का नाम रविंद्र सिंह भाटी है, जिसे उनके चाहने वाले प्यार से रवसा कहते हैं।
देश के पश्चिमी हिस्से में पाकिस्तान से सटी बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा क्षेत्र के 27 वर्षीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब 28 लाख फॉलोअर्स है। दूसरे नंबर पर जो राजनीतिज्ञ है, उनके फॉलोअर्स रविंद्र सिंह भाटी के आधे भी नहीं है। इस आंकड़े से ही समझा जा सकता है कि इस युवा ने किस कदर गदर मचा रखा है। साहस का आलम यह है कि थोड़े दिन पहले एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि जैसलमेर जिले के बईया गांव में ओरण भूमि बचाने की आपने जो मुहिम चला रखी है, वह भूमि राज्य सरकार ने गौतम अडानी की फर्म को सौर ऊर्जा के लिए आवंटित कर रखी है। प्रश्न पूरा होने से पहले ही वह तपाक से जवाब देते हैं-अडानी धणी थोड़ी ही है अर्थात अदानी मालिक नहीं है। असली मालिक जनता है और जिस जमीन के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं, वह हमारे पूर्वजों ने अपनी जान की बाजी लगाकर गोवंश के लिए आरक्षित की है। ऐसे में सरकार को झुकना पड़ेगा। करीब 62 दिन तक आंदोलन चलने के बाद 7 जनवरी को वास्तव में राज्य सरकार झुक गई और अडानी को आवंटित की गई गोचर भूमि को आवंटन के दायरे से बाहर कर दिया गया।
भाजपा के लिए गले की फांस
रविंद्र सिंह भाटी का क्रेज बच्चों से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक हर वर्ग में है। बीते विधानसभा चुनाव में रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय चुनाव लड़कर भाजपा व कांग्रेस दोनों को चित कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी की तो जमानत जप्त हो गई। विधानसभा चुनाव के ठीक बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाटी ने एक बार फिर निर्दलीय ताल ठोक दी। हालांकि इस बार वह चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी बमुश्किल अपनी जमानत बचाकर तीसरे नंबर पर रहे। रविंद्र सिंह को करीब 6 लाख वोट मिले। इन दो चुनाव के बाद भाटी भारतीय जनता पार्टी की आंख की किरकिरी और गले की फांस बने हुए हैं। भाजपा उन्हें अंदरखाने चित्त करने में लगी हुई है, लेकिन अभी तक कोई दांव काम नहीं कर रहा है। एक तरह से पार्टी खुद का नुकसान करती हुई नजर आ रही है। इसका नतीजा आने वाले पंचायत चुनाव में देखने को भी मिल सकता है।
अंदाज़-ए-बयां आक्रामक
युवा विधायक भाटी की शैली काफी आक्रामक है, जिसके चलते बीते 1 वर्ष में कई सुर्खियां बनी है। ताजा घटनाक्रम के तहत आधी रात को रविंद्र सिंह भाटी एक सोलर कंपनी के काम को रुकवाने अपने विधानसभा क्षेत्र के हड़वा गांव पहुंच जाते हैं। वह काम रुकवा देते हैं, जिस पर गांव के पूर्व सरपंच के साथ उनकी गरमा गरम बहस होती है। अगले दिन इस बहस का वीडियो सुर्खियां बन जाता है। इसी तरह एक महीने पहले बईया गांव में वह पुलिस जीप से दो युवाओं को नीचे उतरने का इशारा करते हैं, युवा उतर जाते है और पुलिस देखती रह जाती है। तीन दिन बाद जैसलमेर एसपी भाटी के खिलाफ राज कार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज करने का फैसला लेते हैं। इसी तरह कुछ महीने पहले बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का पक्ष रखते हुए भाटी गडरारोड के सहायक अभियंता को फटकार लगाते हैं। भाटी के जाने के बाद ग्रामीण अभियंता से भिड़ जाते है। युवा विधायक का यह आक्रामक अंदाज सरकारी मीटिंगों में भी अकसर देखने को मिल जाता है।
अलग ही धुन पर सवार
ऊर्जा से लबरेज रविंद्र सिंह भाटी अलग ही धुन पर सवार है। सुबह से लेकर शाम तक उन्हें सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है। बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा जिलों के अलावा राज्य व देश भर से आने वाले निमंत्रण उन्हें लगातार व्यस्त रखे हुए हैं। हालांकि वह अपना अधिकांश समय लोकसभा क्षेत्र बाड़मेर जैसलमेर व अपने विधानसभा क्षेत्र शिव को ही दे रहे है, लेकिन फिलहाल उनके पास समय देने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं है। उनके विधायक कोटे के कार्य भी सरकार ने किसी ने किसी बहाने अटका रखे हैं। अधिकांश स्वीकृतियां कागजों में ही है, वह धरातल पर नहीं उतर पाई है। इन हालात में भाटी ने जनता से जुड़े रहने का एक अलग ही तरीका निकाल दिया है। बीते 1 वर्ष में उन्होंने अपने क्षेत्र में निजी क्षेत्र के सहयोग से विभिन्न विदेशी भाषाओं के कोर्सेज, चिकित्सकों के विशेष दल के जरिए चिकित्सा शिविर, बुजुर्गों के लिए हरिद्वार की तीर्थ यात्रा, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए टूरिज्म फेस्ट जैसे कई कार्यक्रम चला रखे हैं। कुल मिलाकर फिलहाल वह युवा सनसनी बने हुए हैं।





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