निष्क्रियता छोड़ें, प्रगति में भागीदार बनें
देश बदल रहा है, अब केवल सरकारी सहायता के भरोसे घर बैठना विकल्प नहीं है! नकारात्मक प्रचार को भूलिए; भारत की असली शक्ति उसके नागरिकों की मेहनत और उद्यमशीलता में है। यह आह्वान है, आलस्य त्यागकर राष्ट्र...

राकेश गांधी,
वरिष्ठ पत्रकार
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हाल के दिनों में, एक सुनियोजित प्रयास के तहत, सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय बहसों में भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर एक भ्रामक और निराशाजनक तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई है। इस प्रचार का मुख्य हथियार पड़ोसी देशों के साथ चुनिंदा, संदर्भ-रहित तुलनाएं हैं, जिनका उद्देश्य भारत जैसे आंतरिक रूप से समृद्ध राष्ट्र की छवि को धूमिल करना है। लेकिन हमें श्रेष्ठ नागरिकता के दायित्व से यह स्पष्ट करना होगा कि भारत का वास्तविक सामर्थ्य केवल कुछ उतार-चढ़ाव वाले आर्थिक आंकड़ों या राजनीतिक बयानबाज़ी की क्षणभंगुरता में नहीं है। हमारा सामर्थ्य सामूहिक संकल्प, अदम्य उद्यमशीलता और आत्मविश्वास से भरे भविष्य की नींव में निहित है। हैरानी इस बात की भी है कि देश का विद्वान व शिक्षित वर्ग भी इन झूठे व भ्रामक तस्वीर को ज्यों की त्यों आगे शेयर कर रहा है।
झूठे नैरेटिव का खंडन और आर्थिक गति का प्रमाण
जो नैरेटिव भारत को कमज़ोर दिखाने की कोशिश करता है, वह देश के विशाल और तेज़ी से बढ़ते आर्थिक आकार की अनदेखी करता है। भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संस्थान यह पुष्टि करते हैं कि यह जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। हमारी आर्थिक वृद्धि दर, जो अक्सर अन्य प्रमुख देशों से कहीं अधिक रहती है, देश की मज़बूत घरेलू मांग और उत्पादन क्षमता को दर्शाती है। पिछले एक दशक में करोड़ों भारतीयों का गरीबी रेखा से ऊपर उठना, जो कि संयुक्त राष्ट्र के बहुआयामी गरीबी सूचकांक में भी दर्ज है, हमारी प्रगति का सबसे बड़ा और ठोस प्रमाण है। ऐसे में, केवल राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय हितों के लिए गढ़े गए नकारात्मक प्रचार को सिरे से खारिज करना हमारा दायित्व है।
सामाजिक पूंजी और आत्मनिर्भरता का उदय
भारत की समृद्धि की नींव केवल सरकार के ख़ज़ाने या विदेशी निवेश पर नहीं टिकी है, बल्कि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हमारी सामाजिक पूंजी पर आधारित है। भारतीय महिलाओं ने हमेशा अपने घरों को आर्थिक स्थिरता का केंद्र बनाए रखा है। उनकी बचत और घर-परिवार के कुशल प्रबंधन की समझ ने देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को एक ऐसा अभेद्य कवच दिया है, जो किसी भी संकट में ढाल बनकर खड़ा रहता है। इस आंतरिक शक्ति के साथ ही, आज देश में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का उदय हो रहा है। रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर निर्माण, और डिजिटल भुगतान (जैसे यूपीआई) जैसे क्षेत्रों में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए भारत ने यह सिद्ध किया है कि वह केवल एक उपभोक्ता बाज़ार नहीं, बल्कि एक सृजनकर्ता और निर्यातक राष्ट्र है। यह आत्मविश्वास ही वैश्विक मंच पर हमारी बढ़ती साख का आधार है।
अब ‘इंतज़ार’ नहीं, ‘योगदान’ का समय
एक नागरिक के रूप में हमारा सबसे महत्वपूर्ण संदेश अब यहीं से शुरू होता है। भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां एक तरफ अपूर्व अवसर हैं, वहीं दूसरी तरफ दशकों पुरानी निष्क्रियता की जड़ें भी हैं। यह समझना होगा कि अब वह दौर समाप्त हो चुका है जब सरकारें केवल ‘बैठे-बैठे भोजन’ या निःशुल्क सहायता पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित करती थीं, और नागरिक केवल लाभार्थी बनकर इंतज़ार करते थे। देश की नीति बदल गई है, और नागरिक की भूमिका भी बदलनी चाहिए।
हमारा यह स्पष्ट आह्वान है कि अब किसी भी नागरिक को गरीबी या अभाव के नाम पर घर बैठे रहने का बहाना नहीं खोजना चाहिए। सरकारें आज कौशल विकास केंद्र, स्टार्ट-अप समर्थन, और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से हर हाथ को काम देने के अवसर पैदा कर रही हैं। ‘जन धन’ खातों से लेकर ‘डिजिटल साक्षरता’ तक, हर योजना का उद्देश्य आपको सक्षम बनाना है, न कि परजीवी बनाना।
गरीबी चुनौती जरूर, पर निष्क्रियता पाप
कर्म ही धर्म है। यदि हमारे पास दो स्वस्थ हाथ और काम करने का सामर्थ्य है, तो निष्क्रियता पाप है। गरीबी एक चुनौती है, लेकिन निष्क्रियता एक विकल्प है जिसे हमें त्यागना होगा। इस देश की प्रगति में सरकार 50 प्रतिशत का योगदान दे सकती है, लेकिन बाकी 50 प्रतिशत योगदान हम हर नागरिक को अपनी मेहनत, पसीने और ईमानदारी से देना होगा।
इस नए भारत को नकारात्मक प्रचार या राजनीतिक शोर नहीं रोक सकता, लेकिन इसे हमारी अपनी आलस्य और अकर्मण्यता ज़रूर रोक सकती है। आइए, हम इस प्रेरणादायक सच्चाई को स्वीकार करें कि हमारे शारीरिक सामर्थ्य की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब हम घर से बाहर निकलेंगे, काम करेंगे, और राष्ट्र के सामूहिक निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे। भारत को विश्वगुरु बनाने की इस यात्रा में, अब हर नागरिक की सक्रियता अनिवार्य है।






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