जब नृत्य साधना बन जाए
गुरु राघव राज भट्ट से कथक,परम्परा और गुरु-शिष्य पर राकेश गांधी का विशेष...
इस विशेष संवाद में हम मिलते हैं ऐसे कलाकार से जिनके लिए कला केवल मंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि जीवन साधना है। चार दशक से कथक, लोक और जनजातीय कला को जीने वाले गुरु, कलाकार और रचनाकार राघव राज भट्ट के साथ यह आत्मीय चर्चा उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि उस अंतर्यात्रा को समझने का प्रयास है जहां
नृत्य प्रार्थना बन जाता है। अच्छा लगे तो लाइक व कमेंट जरूर करें…






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