पूरी हुई ट्रम्प की नोबल पुरस्कार की मुराद
वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार का पदक भेंट कर इसे देश की आज़ादी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। हालांकि, ट्रंप ने...

वेनेज़ुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने वॉशिंगटन दौरे के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार का पदक भेंट कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। व्हाइट हाउस में हुई इस मुलाकात को माचाडो ने वेनेज़ुएला की आज़ादी की लड़ाई के लिए “ऐतिहासिक क्षण” बताया और कहा कि यह सम्मान देश को तानाशाही से मुक्त कराने के लिए ट्रंप की भूमिका की मान्यता है।
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यह मुलाकात ऐसे संवेदनशील दौर में हुई है जब कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी सुरक्षा बलों ने कराकास में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर उन पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। इस कार्रवाई के बाद वेनेज़ुएला की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव आया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की भूमिका पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
मुलाकात के बाद माचाडो ने कहा, “आज का दिन हम वेनेज़ुएलावासियों के लिए ऐतिहासिक है। हमने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार का पदक हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में सौंपा है।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “आपसी सम्मान और विश्वास का सुंदर संकेत” बताया। उन्होंने माचाडो को “असाधारण साहसी महिला” और “स्वतंत्रता सेनानी” कहा, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि वे उन्हें फिलहाल वेनेज़ुएला की नई नेता के रूप में समर्थन नहीं दे रहे हैं।
नेतृत्व को लेकर अमेरिकी रुख
हालांकि माचाडो के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन 2024 के विवादित चुनावों में जीत का दावा करता रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सत्ता परिवर्तन के बाद फिलहाल वेनेज़ुएला की कार्यवाहक सरकार की प्रमुख डेल्सी रोड्रीगेज़ से संवाद बनाए रखने का फैसला किया है। डेल्सी रोड्रीगेज़, जो मादुरो की पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं, को व्हाइट हाउस ने “सहयोगी और व्यवहारिक” नेता बताया है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि माचाडो “वेनेज़ुएला के लोगों की एक साहसी और प्रभावशाली आवाज़” हैं और राष्ट्रपति ट्रंप उनके साथ “खुले और सकारात्मक संवाद” की उम्मीद कर रहे थे।
नोबेल समिति की स्थिति
इस घटनाक्रम के बाद नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने स्पष्ट किया कि नोबेल पुरस्कार न तो साझा किया जा सकता है और न ही स्थानांतरित। समिति ने बयान में कहा, “नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद उसे रद्द, साझा या किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय हमेशा के लिए अंतिम होता है।”
नोबेल पीस सेंटर ने भी यह दोहराया कि “पदक का स्वामित्व बदला जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का खिताब नहीं।”
ऐतिहासिक संदर्भ और प्रतीकात्मक संदेश
माचाडो ने अपने भाषण में इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जैसे अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के नायक मार्क्विस डी ला फायेट ने जॉर्ज वॉशिंगटन का पदक सिमोन बोलिवर को दिया था, उसी परंपरा में आज वेनेज़ुएला के लोग “वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी” को स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रतीक पदक सौंप रहे हैं। उन्होंने इसे अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच भाईचारे का प्रतीक बताया।
तेल, कूटनीति और आगे की रणनीति
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप प्रशासन ने वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका ने 500 मिलियन डॉलर मूल्य का पहला वेनेज़ुएलाई तेल सौदा पूरा कर लिया है। इसके अलावा प्रतिबंधित तेल ले जाने वाले कई टैंकरों को भी जब्त किया गया है।
इसी बीच, वेनेज़ुएला सरकार का एक दूत वॉशिंगटन पहुंचने वाला है, जो अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर दूतावास फिर से खोलने की दिशा में प्रारंभिक कदम उठाएगा।
डेल्सी रोड्रीगेज़ ने भी कहा है कि वे अमेरिका के साथ कूटनीतिक संवाद से पीछे नहीं हटेंगी और “सम्मान के साथ बातचीत” के लिए तैयार हैं।
माचाडो द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार का पदक ट्रंप को सौंपना प्रतीकात्मक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका का आधिकारिक समर्थन अभी भी कार्यवाहक सरकार के साथ बना हुआ है, लेकिन यह कदम वेनेज़ुएला की सत्ता, कूटनीति और वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।






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