बीएमसी चुनाव में बिखरी शिवसेना से भाजपा फायदे में
शुरुआती रुझानों और परिणामों से साफ है कि यह चुनाव सीधे तौर पर राजनीतिक वर्चस्व और अस्तित्व की लड़ाई में बदल गया था। बीएमसी के 227 वार्डों में हुए चुनाव में करीब 1 करोड़ 3 लाख मतदाताओं ने अपने...

मुम्बई वृहन महानगर पालिका (बीएमसी) के गुरुवार को हुए चुनाव के नतीजे 16 जनवरी को आने शुरू हो गए हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा गठबंधन को फायदा नजर आ रहा है। शिवसेना के दोनों धड़ों की लड़ाई में भाजपा को फायदा हो रहा है। कांग्रेस ने भी कई पालिकाओं में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आ रही है।
शुरुआती रुझानों और परिणामों से साफ है कि यह चुनाव सीधे तौर पर राजनीतिक वर्चस्व और अस्तित्व की लड़ाई में बदल गया था। बीएमसी के 227 वार्डों में हुए चुनाव में करीब 1 करोड़ 3 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 10,232 मतदान केंद्रों पर कराई गई वोटिंग में लगभग 1,700 उम्मीदवार मैदान में थे। मेयर पद के लिए 114 सीटों का आंकड़ा निर्णायक माना जाता है।
गैर मराठियों ने दिया समर्थन
शुरुआती रुझानों में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का गठबंधन कड़ी टक्कर देता दिखा। कई वार्डों में भाजपा को बढ़त मिली, खासकर उन इलाकों में जहां उत्तर भारतीय, गुजराती और मध्यम वर्गीय मतदाताओं का प्रभाव अधिक है। वहीं मराठी बहुल इलाकों में शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के संयुक्त प्रभाव के संकेत मिले।
पहली बार बंटी शिवसेना
यह पहला बीएमसी चुनाव था जो शिवसेना के दो धड़ों में बंटने के बाद हुआ। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम रहा। रुझानों से संकेत मिला कि कुछ पारंपरिक शिवसेना गढ़ों में ठाकरे बंधुओं की रणनीति असर दिखा रही है, हालांकि यह प्रभाव पूरे शहर में समान नहीं रहा।
कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी का प्रदर्शन सीमित लेकिन कुछ वार्डों में निर्णायक भूमिका वाला रहा। मुस्लिम और दलित बहुल इलाकों में इन दलों को समर्थन मिलने के संकेत मिले, जिससे कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया।
तय होगी भविष्य की राजनीति
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार अभि जीत कांबले कहते हैं कि बीएमसी चुनाव के नतीजे केवल नगर निगम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र की भावी राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं। उनके मुताबिक, यदि ठाकरे बंधु मजबूत प्रदर्शन करने में सफल रहते हैं तो यह उनके राजनीतिक पुनरुत्थान का संकेत होगा। वहीं भाजपा-शिंदे गठबंधन के लिए मजबूत नतीजे मुंबई में उनकी बढ़ती पकड़ को और पुख्ता करेंगे।
कुल मिलाकर, चुनावी रुझान यह दर्शाते हैं कि बीएमसी में मुकाबला बेहद करीबी रहा है। स्पष्ट बहुमत या मजबूत बढ़त जिस भी पक्ष को मिलेगी, वह न केवल मुंबई की सत्ता बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करेगा।






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