सुप्रीम कोर्ट ने आसमान से ज़मीन पर उतारी बात
सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारी सीजन में हवाई किराए की बेतहाशा वृद्धि पर नाराजगी जताते हुए जोधपुर का उदाहरण दिया है। अदालत ने इसे यात्रियों का शोषण बताते हुए डीजीसीए से जवाब तलब किया और केंद्र को 23 फरवरी...

आप इसे मज़ाक समझें या संयोग—लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने हवाई किराए की मनमानी पर चोट करने के लिए जोधपुर का उदाहरण चुन लिया। त्योहारों के मौसम में उड़ान भरना आम आदमी के लिए सपना बनता जा रहा है और अब इस सपने की कीमत पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
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त्योहारी सीजन और टिकट का ‘सर्ज प्राइस’
जनहित याचिका में आरोप है कि त्योहारी सीजन आते ही विमानन कंपनियां किराए और अतिरिक्त शुल्कों में ऐसा उतार-चढ़ाव करती हैं कि यात्री शोषण का शिकार हो जाता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने साफ कहा कि हवाई किराए में अत्यधिक वृद्धि किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराई जा सकती।
जोधपुर कोर्ट में कैसे पहुंच गया?
सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने एएसजी अनिल कौशिक से दो टूक कहा—दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के हवाई किराए पर नजर डालिए।अदालत ने टिप्पणी की कि भले ही अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों का किराया स्थिर रहा हो, लेकिन जोधपुर जैसे गंतव्यों के लिए टिकट के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं। यानी छोटे शहर, बड़ा किराया—यही अदालत की चिंता है।
शोषण या व्यापार ?
खंडपीठ ने हवाई किराए में बेतहाशा वृद्धि को यात्रियों का शोषण बताया और डीजीसीए से जवाब तलब कर लिया। अदालत ने संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो वह इस मामले में निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेगी। जनहित याचिका में हवाई किराए और अन्य शुल्कों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
केंद्र को मोहलत, सवाल कायम
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी तक स्थगित कर दी गई।लेकिन सवाल अब भी हवा में है—क्या हवाई सफर सिर्फ त्योहारों में अमीरों का शौक बनकर रह जाएगा ?
आम यात्री की उड़ान
जोधपुर का जिक्र सिर्फ एक शहर का नाम नहीं, बल्कि उन तमाम छोटे शहरों की कहानी है, जहां त्योहारों में घर पहुंचने की कीमत आम आदमी की जेब से बाहर चली जाती है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं—देखना होगा कि यह उड़ान किराए की ऊंचाई को जमीन पर ला पाती है या नहीं।






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