रफ़्तार का नया भारतीय युग
सुनील गावस्कर के दौर में गेंद को 'सम्मान' देना कला थी, आज अभिषेक और तिलक जैसे युवा उसे 'सीमा पार' भेजना धर्म मानते हैं। भारतीय क्रिकेट में रोहित-सूर्या से शुरू हुई निडरता की यह लहर अब एक ऐसी सुनामी...

आधुनिक क्रिकेट का बदलता व्याकरण
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बदलाव की लहरें अक्सर आती रही हैं, लेकिन वर्तमान दौर में जो परिवर्तन हम देख रहे हैं, वह केवल बदलाव नहीं बल्कि एक ‘पूर्ण रूपांतरण’ है। यह ठीक वैसा ही है जैसे दुनिया एनालॉग से डिजिटल और अब डिजिटल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में प्रवेश कर चुकी है। जिस गति से तकनीक ने हमारे जीवन की प्रोसेसिंग स्पीड को बढ़ाया है, ठीक उसी तर्ज पर रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव की विरासत को आगे बढ़ाते हुए अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों ने टी-20 क्रिकेट की ‘प्रोग्रामिंग’ ही बदल दी है।
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हाल ही में महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने एक बड़ी दिलचस्प बात कही। उन्होंने स्वीकार किया कि जितनी गेंदों पर वे अपना खाता खोलने के लिए संघर्ष करते थे या पिच का मिजाज समझते थे, आज की नई नस्ल के बल्लेबाज उतनी ही गेंदों पर अर्धशतक जड़कर पवेलियन में आराम कर रहे होते हैं। गावस्कर का यह बयान आत्म-ग्लानि नहीं, बल्कि उस युग परिवर्तन की स्वीकारोक्ति है, जहां समय ‘बचाने’ का नहीं बल्कि समय को ‘निचोड़ने’ का नाम है।
आधुनिक युग के सूत्रधार हैं रोहित-सूर्या
इस क्रांति की नींव रोहित शर्मा ने रखी। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप से लेकर टी-20 वर्ल्ड कप तक, रोहित ने खुद को एक ‘एंकर’ से एक ‘विनाशक’ में बदला। उन्होंने संदेश दिया कि कप्तान का काम केवल पारी को अंत तक ले जाना नहीं, बल्कि पहली गेंद से विरोधी के मनोबल को कुचलना है। उनके साथ सूर्यकुमार यादव ने क्रिकेट के मैदान को 360 डिग्री के कैनवास में बदल दिया। सूर्या की बल्लेबाजी में वह ‘एआई’ जैसी सटीकता है, जो फील्डर के खड़े होने से पहले ही गैप ढूंढ लेता है। उन्होंने यह साबित किया कि अब क्रिकेट केवल सीधे बल्ले का खेल नहीं, बल्कि कोणों और गणनाओं का विज्ञान है।
प्रोसेसिंग स्पीड का अपग्रेड है नई पौध
अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे युवाओं को देखना ऐसा है जैसे किसी सुपर-कंप्यूटर को काम करते देखना। अभिषेक शर्मा जब मैदान पर उतरते हैं, तो वे गेंद की ‘मेरिट’ नहीं देखते, बल्कि गेंदबाज की ‘मंशा’ पर प्रहार करते हैं। उनके पास वह ‘फियरलेस’ सॉफ्टवेयर है जो उन्हें पहली गेंद पर छक्का मारने के लिए प्रेरित करता है। वहीं तिलक वर्मा और ईशान किशन ने साबित किया है कि तकनीक अगर ताकत के साथ मिल जाए, तो क्रिकेट के मैदान पर कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। तिलक की बल्लेबाजी में जहां एक ओर क्लास झलकता है, वहीं दूसरी ओर उनकी ‘स्ट्राइक रोटेशन’ और बड़े शॉट्स लेने की क्षमता उन्हें भविष्य का सबसे घातक बल्लेबाज बनाती है।
खत्म हुआ ‘विकेट’ का मोह
इन बल्लेबाजों ने टी-20 के सबसे पुराने उस डर को खत्म कर दिया है और वो है ‘विकेट गिरने का डर’। पुराने दौर में विकेट बचाना एक सुरक्षित निवेश की तरह था, जहां आप अंत के लिए रन बचाकर रखते थे। लेकिन आज की रणनीति ‘नेट-रन-रेट’ और ‘इम्पैक्ट’ पर टिकी है। अब विकेट का जाना केवल एक नई शुरुआत है। ईशान किशन की आक्रामकता और तिलक वर्मा की क्लासिकल पावर यह दर्शाती है कि भारतीय क्रिकेट का ‘बेंच स्ट्रेंथ’ अब केवल खिलाड़ियों की संख्या नहीं, बल्कि प्रतिभा का एक पावरहाउस है। आज का युवा बल्लेबाज जानता है कि अगर वह आउट भी हो गया, तो डगआउट में उसके जैसा ही कोई दूसरा ‘पावर-हिटर’ अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
एआई युग और क्रिकेट का तालमेल
आज का क्रिकेट डेटा और विश्लेषण का खेल है। जिस तरह एआई एल्गोरिदम सेकंडों में करोड़ों सूचनाओं को प्रोसेस करता है, वैसे ही अभिषेक और तिलक जैसे खिलाड़ी पलक झपकते ही गेंदबाज की ग्रिप, लेंथ और फील्डिंग की बनावट को भांप लेते हैं। अब ‘वेट एंड वॉच’ की नीति पुरानी पड़ चुकी है। अब ‘हिट एंड डोमिनेट’ का युग है। तकनीक की ही तरह इन खिलाड़ियों की ‘मसल मेमोरी’ इतनी तेज है कि वे मुश्किल से मुश्किल गेंद पर भी असंभव दिखने वाले शॉट खेल जाते हैं।
गावस्कर की तपस्या बनाम अभिषेक की आतिशबाजी
सुनील गावस्कर के दौर में क्रिकेट एक तपस्या थी, जहां धैर्य की परीक्षा होती थी। लाल गेंद के सामने घंटों टिके रहना महानता का मानक था। आज क्रिकेट एक ‘हाई-स्पीड थ्रिलर’ है। गावस्कर का 60 ओवर में 36 रन बनाना उस समय की रक्षात्मक तकनीक की पराकाष्ठा थी, लेकिन आज अभिषेक शर्मा का 15 गेंदों पर 50 रन बनाना आधुनिक कौशल का शिखर है। यह तुलना किसी को छोटा या बड़ा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि विकास की कहानी बयां करने के लिए है। जिस तरह हम अब बैलगाड़ी से सीधे हाइपर-लूप की कल्पना कर रहे हैं, क्रिकेट भी उसी गति से अपने पुराने ढर्रे को छोड़ चुका है।
क्या है अगला स्टेशन?
भारतीय क्रिकेट अब उस दौर में पहुंच गया है जहां ‘पारी को संवारने’ वाले बल्लेबाजों की जगह ‘मैच को खत्म करने’ वाले योद्धाओं की मांग है। रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव ने जिस मशाल को जलाया है, उसे अभिषेक, तिलक और ईशान ने एक ज्वाला में बदल दिया है। यह नई पीढ़ी केवल तेज क्रिकेट नहीं खेल रही, बल्कि वे आने वाले कल के क्रिकेट का एक ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार कर रहे हैं, जहां केवल और केवल रफ्तार का राज होगा। क्रिकेट अब केवल खेल नहीं रहा, यह मानवीय कौशल और आधुनिक गति का एक अद्भुत सिंफनी बन गया है।






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