विश्व पटल पर छाई जैतारण की सीमेंट
राजस्थान के ब्यावर जिले का जैतारण क्षेत्र तेजी से सीमेंट हब के रूप में उभर रहा है। यहां बहुराष्ट्रीय सीमेंट कंपनियों के निवेश से रोजगार, बुनियादी ढांचे और भूमि मूल्यों में वृद्धि हुई है, वहीं सरकार...

चैनराज भाटी,
वरिष्ठ पत्रकार
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राजस्थान के ब्यावर जिले का जैतारण क्षेत्र आज तेजी से विश्व पटल पर एक सशक्त सीमेंट हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। कभी शांत और कृषि प्रधान माने जाने वाले इस इलाके ने अब औद्योगिक मानचित्र पर खास स्थान प्राप्त कर लिया है। बहुराष्ट्रीय सीमेंट कंपनियों के बड़े निवेश ने न केवल क्षेत्र की तस्वीर बदली है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है। जैतारण क्षेत्र में वर्तमान में चार बड़ी बहुराष्ट्रीय सीमेंट कंपनियों ने अपने प्लांट स्थापित किए हैं, जहां से देश के साथ-साथ विदेशों में भी सीमेंट की आपूर्ति की जा रही है। इन कंपनियों द्वारा करोड़ों डॉलर का निवेश किया गया है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के विकास पर दिखाई दे रहा है। सरकार को इन कंपनियों की खनन लीज से प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण योगदान है।
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जमीन उगल रही है चायना क्ले रूपी सोना
जैतारण क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी अपार खनिज संपदा है। यहां की जमीन में प्रचुर मात्रा में चायना क्ले पाया जाता है, जो सीमेंट निर्माण में एक अहम कच्चा माल है। यही कारण है कि प्रदेश में सर्वाधिक सीमेंट प्लांट अब इसी क्षेत्र में स्थापित हो रहे हैं। वर्तमान में रास में अंबुजा सीमेंट और बांगड़ श्री सीमेंट, टूकड़ा गांव में अल्ट्राटेक सीमेंट तथा निम्बोल में निरमेक्स कंपनी के प्लांट कार्यरत हैं। इन संयंत्रों से उत्पादित सीमेंट का निर्यात विदेशों तक किया जा रहा है।
बदली क्षेत्र की फिज़ा
एक साथ चार बड़े सीमेंट प्लांट लगने से जैतारण क्षेत्र की फिज़ा पूरी तरह बदल गई है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। सीमेंट उद्योग के विस्तार के साथ ही नए कस्बे और आवासीय कॉलोनियां बसने लगी हैं। होटल, ढाबे, ट्रांसपोर्ट, अस्पताल, मरम्मत कार्य और अन्य सहायक व्यवसायों को भी नया जीवन मिला है। इसके साथ-साथ खनिज गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि औद्योगिक विकास से क्षेत्र को व्यापक लाभ हुआ है, लेकिन स्थानीय युवाओं को सीमेंट फैक्ट्रियों में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने का मुद्दा लगातार उठता रहा है। लोगों का कहना है कि जिन संसाधनों पर उद्योग खड़े हैं, उनका पहला लाभ स्थानीय निवासियों को मिलना चाहिए। रोजगार में वरीयता को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से निरंतर मांग की जा रही है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्थानीय समाज की कुछ अहम मांगें भी सामने आई हैं-
– सीमेंट कंपनियों से होने वाले प्रदूषण से प्रभावित फसलों के लिए किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
– सीमेंट संयंत्रों के आसपास की सड़कों की हालत में सुधार किया जाए।
– औद्योगिक हादसों में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को समुचित मुआवजा मिले।
– सीमेंट उद्योग में कार्यरत मजदूरों के श्रम अधिकारों और सुरक्षा की प्रभावी रक्षा की जाए।
हर वर्ष 150 करोड़ रुपये का राजस्व
खनिज विभाग, जैतारण खण्ड के अनुसार, क्षेत्र में स्थापित चारों सीमेंट प्लांटों से सरकार को हर साल करीब 150 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। खनिज विभाग के एएमई स्वरूप सिंह गहलोत के अनुसार, यह क्षेत्र भविष्य में और भी बड़े औद्योगिक निवेश का केंद्र बन सकता है, जिससे राज्य और स्थानीय स्तर पर विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी। स्पष्ट है कि जैतारण क्षेत्र आज औद्योगिक प्रगति और आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। आवश्यकता है कि विकास के इस सफर में स्थानीय हित, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन को समान महत्व दिया जाए, ताकि यह प्रगति दीर्घकालिक और सर्वसमावेशी बन सके।
प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के प्रयासों से प्रदेश लगातार बढ़ रहा है आगे
राजस्थान एक मिनरल प्रदेश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से लगातार नई औद्योगिक इकाइयां लग रही है। इसी क्रम में जैतारण का सीमेंट हब बनना गौरव की बात है। केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार नीतियों के चलते प्रदेश लगातार औद्योगिक क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। जैतारण में सीमेंट इकाइयों के लगने से स्थानीय लोगों को रोजगार सहित आय बढ़ाने के स्रोतों में काफी फायदा पहुंच रहा है। भविष्य में इस दिशा में प्रदेश निरन्तर प्रगति करता रहेगा।
– अविनाश गहलोत, कैबिनेट मंत्री, राजस्थान सरकार।






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