‘वैभव’शाली भारत: युवा सेना ने छठी बार चूमा आसमान
हरारे स्पोर्ट्स क्लब में वैभव सूर्यवंशी की कीर्तिमान स्थापित करने वाली 175 रनों की पारी और भारतीय गेंदबाजों के सटीक प्रहारों ने इंग्लैंड का 28 साल पुराना सपना तोड़ा; भारत ने 100 रनों की विशाल जीत के...

अंडर-19 विश्व कप 2026 – ऐतिहासिक विजय
हरारे (जिम्बाब्वे)। भारतीय अंडर-19 टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भविष्य के सितारों को गढ़ने में भारत का कोई विकल्प नहीं है। शुक्रवार को खेले गए अंतिम मुकाबले में भारत ने इंग्लैंड को 100 रनों के भारी अंतर से पराजित कर छठी बार अंडर-19 विश्व कप की ट्राफी पर कब्जा किया। इस पूरे आयोजन के दौरान अपराजित रही भारतीय टीम ने न केवल खेल कौशल, बल्कि मानसिक सुदृढ़ता के मामले में भी प्रतिद्वंद्वी टीमों को काफी पीछे छोड़ दिया। 411 रनों का विशाल लक्ष्य खड़ा करना किसी भी अंतिम मैच के दबाव में एक अविश्वसनीय उपलब्धि है, जो इस टीम के निर्भीक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
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वैभव सूर्यवंशी: एक नए युग का सूत्रपात
इस विजय के निर्विवाद नायक वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने मात्र 80 गेंदों में 175 रनों की जो पारी खेली, वह किसी चमत्कार से कम नहीं थी। अपनी पारी में 15 चौके और 15 छक्के जड़कर उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों का आत्मविश्वास मैच के प्रारंभ में ही छिन्न-भिन्न कर दिया। वैभव का 55 गेंदों में शतक अंडर-19 विश्व कप के अंतिम मैच के इतिहास का सबसे तीव्र शतक है। उनकी बल्लेबाजी में शक्ति और समय के तालमेल का ऐसा संगम दिखा, जिसने उन्हें ‘मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ के साथ-साथ ‘प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ (कुल 439 रन) का सम्मान दिलाया। कप्तान आयुष म्हात्रे (53 रन) और गेंदबाजों में आर.एस. अंबरीश (3 विकेट) ने वैभव द्वारा रखी गई नींव पर विजय का भवन निर्मित किया।
विदेशी टीमों का संघर्ष और उभरते सितारे
यद्यपि भारत विजेता बना, किंतु इस प्रतियोगिता में अन्य विदेशी टीमों और उनके खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन से उज्ज्वल भविष्य की आशा जगाई। उप-विजेता इंग्लैंड की ओर से सेलेब फॉक्नर ने अंतिम मैच में 67 गेंदों पर 115 रनों की साहसी पारी खेलकर भारतीय खेमे को चुनौती दी। पूरे आयोजन की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ओलिवर पीक और तेज गेंदबाज विल मलयजुक, जिन्होंने जापान के विरुद्ध 51 गेंदों में शतक जड़ा था ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। वहीं अफगानिस्तान के फैसल शिनोजादा और पाकिस्तान के तेज गेंदबाज अली रज़ा ने भी अपनी प्रतिभा से विश्व भर के विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
भारतीय क्रिकेट की सुदृढ़ जड़ें
मोहम्मद कैफ (2000), विराट कोहली (2008), उन्मुक्त चंद (2012), पृथ्वी शॉ (2018) और यश धुल (2022) के नेतृत्व के पश्चात अब आयुष म्हात्रे (2026) का नाम इस प्रतिष्ठित सूची में सम्मिलित हो गया है। यह विजय केवल एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि भारत के जमीनी स्तर के क्रिकेट ढांचे की सफलता का प्रमाण है। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी अब केवल कच्ची प्रतिभा नहीं, बल्कि एक परिपक्व खिलाड़ी के रूप में विश्व पटल पर उभर रहे हैं, जो भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम भविष्य को सुनिश्चित करते हैं।






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