सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष में भारत की धड़कन
धरती की गोद में जन्मी, किंतु आकाश की ऊँचाइयों तक अपने सपनों को उड़ान देने वाली सुनीता विलियम्स केवल एक अंतरिक्ष यात्री नहीं, बल्कि साहस, समर्पण और अनंत संभावनाओं की जीवंत मिसाल हैं। भारतीय मूल की इस...

धरती की गोद में जन्मी, किंतु आकाश की ऊँचाइयों तक अपने सपनों को उड़ान देने वाली सुनीता विलियम्स केवल एक अंतरिक्ष यात्री नहीं, बल्कि साहस, समर्पण और अनंत संभावनाओं की जीवंत मिसाल हैं। भारतीय मूल की इस अमेरिकी नागरिक ने जब अंतरिक्ष में कदम रखा, तो उनके साथ केवल विज्ञान की प्रयोगशालाएँ नहीं थीं, बल्कि उनके दिल में भारत की धड़कन भी थी।गुरुत्वाकर्षण की सीमाओं को लांघते हुए, जब उन्होंने शून्य गुरुत्व में अपनी यात्रा पूरी की, तो ऐसा लगा मानो एक भारतीय नारी ने नभ को अपनी बाहों में समेट लिया हो। तारों के बीच रहकर भी उनके मन में गीता का ज्ञान, भारतीय संस्कृति की गर्माहट और अपने पूर्वजों की सीख जीवंत रही। जब उन्होंने अंतरिक्ष में गीता का पाठ किया, तो यह केवल आध्यात्मिकता नहीं थी, बल्कि अपने मूल से गहरे जुड़ाव का प्रतीक था।सुनीता की यह यात्रा केवल उनकी नहीं थी, यह हर भारतीय के हौसले और सपनों की यात्रा थी। जब वे अंतरिक्ष से धरती पर लौटीं, तो उनके शब्दों में भारत के प्रति विशेष स्नेह झलका। उन्होंने कहा कि हर भारतीय में कुछ अलग करने की क्षमता है, और यह गौरव की बात है कि भारत से आने वाले लोग पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके लिए भारत केवल पूर्वजों की भूमि नहीं, बल्कि एक भावना है, जो हर भारतीय को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।सुनीता की यह उपलब्धि हर उस बेटी के लिए एक संदेश है, जो सितारों से आगे जाने का हौसला रखती है। उनकी कहानी सिद्ध करती है कि चाहे कोई भी सरहद क्यों न हो, भारतीय मूल का साहस और जज़्बा किसी भी सीमा से बड़ा होता है।





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