एकदमै बुड़बक हो का
बिहार में बढ़ते सियासी पारे के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से खासमखास बातचीत बुड़बक हो का...‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारा एकदम गलत...

बोल हरि बोल
हरीश मलिक,
वरिष्ठ व्यंग्यकार और स्तंभकार
बिहार में चुनावी सियासत का पारा चढ़ने लगा है। इधर लालू के लाल एक-दूसरे पर लाल हो रहे हैं। और किडनी वाली बहना भी भाई को आंखें दिखा रही है। उधर सुशासन बाबू घोषणा पर घोषणा किए जा रहे हैं, लेकिन कितनी सीटों पर लड़ेंगे, इसका संपट नहीं बैठ रहा है। राहुल गांधी भी बिहार जाकर पीएम फेस बन आए हैं, लेकिन मजाल है कि एक बार भी तेजस्वी को सीएम फेस बताया हो। ऐसे हालात में लालू प्रसाद यादव जी के महल के पीछे उनकी भैंस-शाला में एक साक्षात्कार तो बनता है…
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सवाल – विपक्ष तो तेजस्वी यादव की पढ़ाई पर सवाल उठा रहा है कि वे नवीं फेल हैं!
लालू यादव: पढ़ाई से ज्यादा गुणी होना चाहिए। का होता है पढ़ाई से। लैरी एलिसन का नाम सुने हो ना। ऊ दुनिया का दूसरा सबसे पैसे वाला आदमी है। उसने किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री नहीं लिया। औउर तुम्हारे राजस्थान में ही देख लो। चपरासी बनने के लिए एमबीए, एमएड, इंजीनियर्स यहां तक की आरएएस-प्री पास किए हुए भी लाइन में लगे पेपर दे रहे हैं। कुछ फायदा हुआ पढ़ाई से! हरियाणा ओमप्रकाश चौटाला तो पहले सीएम बने, फिर जेल गए और वहीं से दसवीं पास की। देश के एक उप प्रधानमंत्री तो आठवीं पास थे। (हंसते हुए) अपना तेजस्वी तो उनसे आगे है।
सवाल – आपकी चारा घोटाला वाली इमेज के चलते तेजस्वी को नुकसान नहीं होगा?
लालू यादव: बिहार की जनता ने हमें माफ कर दिया। पर ई ससुरा मीडिया अभी तक ऊ चारा घोटाला के पीछे पड़ा है। अरे भइया, तनिक ये तो विचार करो कि ई घोटाला के बाद भी बिहार की हमारी जनता- जनार्दन ने हमें कितनी बार जिताया है कि नहीं। ई का मतबल जनता को घोटाले से कोई फर्क नहीं पड़ता है। फर्क पड़ता होता तो का बाद में हम सेंट्रल में रेल मिनिस्टर बन पाते? याद है ना, पूरे देश के रेल को हमने घाटे से उबार दिया था। पर मीडिया तो अब भी घाटे से ज्यादा घोटाला को याद करता है।
सवाल – लेकिन मीडिया ही नहीं, नई पीढ़ी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ है। ताजा उदाहरण तो नेपाल का ही है।
लालू यादव: एकदमै बुड़बक हो का। रील और नेट में फंसी नई पीढ़ी को ई याद नहीं रहता कि एक महीने पहले का हुआ था? तीस बरस में तो करीब-करीब दूसरी पीढ़ी भी जवानी की दहलीज पर है। उसे का लेना-देना कि तीन दशक पहले का हुआ था? और उस नेपाल के विद्रोह की जड़ में भी यही रील और सोशल मीडिया है। जब इसे बंद करेंगे तो युवा पीढ़ी तो नाराज होगी ही। हमने बिहार में ऐसा नहीं है।
सवाल- आपके तो अपने कुनबे में घमासान मचा है। तेजप्रताप छोटे भाई तेजस्वी के खिलाफ धमाल मचाए हुए हैं।
लालू यादव: आप ऊ कहावत तो सुने ही होंगे- पूत कपूत तो का धन संचय। पूत सपूत तो का धन संचय। धन को अपने पास बहुत है। सो हमने कहावत में धन की जगह सत्ता कर दिया है। यानी पूत यदि सपूत होगा तो उसके लिए सत्ता बनाने से कोई लाभ नहीं। वो खुद ही तेजस्वी की तरह यदुवंशी राजा बन जाएगा। और पूत यदि कपूत होगा तो वह सत्ता को लात मारकर खुद का विनाश कर लेगा। इसलिए हम इस ओर से निर्लिप्त हैं। और एक राज की बात बताएं। तेज प्रताप में खून तो अपना ही है ना। गलती से दो-चार सीट ले मिल भी गया तो हमरे ही चरणों में आएगा ना।
सवाल – तेजप्रताप ही नहीं आपको किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य भी तेजस्वी से नाराज हैं।
लालू यादव: सुनो भइया, किस घर में लड़ाई-झगड़ा नहीं होगा। घर में चार बर्तन होंगे को आवाज आएगी की नहीं। जो बिटिया अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर हमका अपनी किडनी दे सकती है। वो हमरी इत्ती सी बात भी ना मानेगी कि एक बार तेजस्वी को सीएमवा बनवा दो। फिर वो हम सबकी मदद करेगा। उसकी भी हर बात मानेगा।
सवाल – राहुल गांधी ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा दे रहे हैं। आपकी तरह एनडीए ने भी इसमें ‘वोट’ की जगह ‘चारा’ कर दिया है। ‘चारा चोर, गद्दी छोड़’ आप क्या कहेंगे?
लालू यादव: देखिए, हमें तो लगता है कि राहुल गांधी का ई नारा एकदमै गलत है। आप जरा हमारा जमाना याद कीजिएगा। पूरा का पूरा बूथ ही कैप्चरिंग हो जाता था। हजारों मतपेटिकाओं की लूट हो जाती थी। ऊ थी वोट चोरी। आजकल का है, करोड़ों मतदाताओं के प्रदेश में दो-चार हजार वोट इधर-उधर हो गया, ये कौनो बड़ी बात नहीं है। इससे घंटा फरक नहीं पड़ेगा। नारा होना चाहिए- माई जोड़, गद्दी छोड़। यानी हमारा माई (मुस्लिम+यादव) फेक्टर जुड़कर धड़ल्ले से सरकार बनाएगा। ऊ सुशासन बाबू को गद्दी छोड़कर जाना पड़ेगा। ई हमरी भी गारंटी है।
सवाल – तेजस्वी को सीएम फेस राहुल क्यों नहीं बना रहे हैं? जबकि तेजस्वी ने उनको पीएम फेस बता दिया है!
लालू यादव: अरे बुड़बक! ऊ कौउन होता है सीएम फेस बनाने वाला, जो खुद इतने बड़े राजनीतिक जीवन में कभी सीएम ना बन पाया है। सीएम फेस तो हम बनाएंगे। हमारी राबड़ी जी बनाएंगी। बिहार की जनता-जनार्दन बनाएगी।
सवाल – तेजस्वी की जीत-हार के बीच आपके जमाने के जंगलराज का भी खूब जिक्र हो रहा है। जनता फिर जंगलराज लाएगी?
लालू यादव: पहले तो तुम ई समझो कि जंगलराज का होता है? जंगल माने जंगल और राज माने राजा। मतबल जिस जंगल में राजा होता है, यानी कि शेर। उसको जंगलराज कहा जाता है। और बिहार के शेर हम हैं और तेजस्वी शेर का बचवा। तो जंगल का राजा तो वही बनेगा ना। अब तुम कहोगो के ऊ विरोधी लोग तो जंगलराज का मतबल अपहरण, हत्या, फिरौती बताते फिरते हैं। इस परिभाषा से भी तुमका हम समझा देते हैं। मानो कि तुम्हारी महरारू का कोई अपहरण करके ले गया। वो उससे मारपीट, हत्या, दुष्करम कुछ भी कर सकता है ना। तुम का चाहोगे। कइसन भी महरारू सही-सलामत घर में वापस आ जाए। चाहे उसकी कोई भी ‘कीमत’ देनी पड़े। यही ना! अब यदि तुम्हारे चाहे मुताबिक कुछ ‘कीमत’ लैके कोई तुम्हारी महरारू को बचा लाता है तो तुम खुश होगे कि दुखी। बिल्कुल सही, बहुत ज्यादा खुश होगे। ऐसे ही बिहार की जनता भी खुश रही और बार-बार हमारे ‘राज’ को चुनती रही। बिहार की जनता को पुलिस से ज्यादा हमरी सरकार पर भरोसा था।
चलते-चलते: अच्छा लालू जी, आपने बहुत समय दिया। अब चलते हैं…नमस्ते जी।
लालू: जय श्रीकृष्णा…सलाम वालुकम। हम धर्मनिरपेक्ष हैं, इसलिए चुनाव तक यही अभिवादन चलेगा।






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