ऑपरेशन ब्रह्मा: आशा की जलती लौ
भारत ने 'ऑपरेशन ब्रह्मा' के तहत म्यांमार में भूकंप राहत के लिए पांच सैन्य विमानों, एनडीआरएफ टीम और फील्ड अस्पताल की त्वरित सहायता...

बलवंत राज मेहता
वरिष्ठ पत्रकार
जब म्यांमार की धरती कांपी, तो केवल इमारतें ही नहीं गिरीं, बल्कि हजारों सपने भी मलबे के नीचे दब गए। भय और अंधकार के उस क्षण में, भारत ने उम्मीद की एक जलती लौ प्रज्वलित की—जिसका नाम था “ऑपरेशन ब्रह्मा।”
यह केवल एक राहत अभियान नहीं था, बल्कि एक ऐसे वटवृक्ष की शाखा थी, जो अपने पड़ोसियों को छांव देने को तत्पर रहता है। जब संकट की काली रात ने म्यांमार को अपने घेरे में लिया, तब भारत प्रकाश का दीपक बनकर आगे आया। पांच सैन्य विमानों की हवा में गूंजती गड़गड़ाहट किसी भय की नहीं, बल्कि मदद की पुकार थी। नौसेना के जहाज, उफनते समंदर में दौड़ते बादल बनकर राहत सामग्री लेकर चले, और भारतीय डॉक्टर एवं बचावकर्मी संजीवनी लेकर आए देवदूत की तरह आपदा पीड़ितों की सेवा में जुट गए।
जिस तरह सर्दी की कड़कड़ाती रात में एक गर्म शॉल किसी कांपते इंसान को जीवन का एहसास कराती है, उसी तरह ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ म्यांमार के जख्मों पर मरहम लगाने वाला एक आत्मीय स्पर्श था। भारत की यह मानवीय पहल बंजर भूमि पर खिलते कमल की तरह थी—जहां कोई उम्मीद नहीं थी, वहां भी मदद का एक नया सूरज उग आया।





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