चालान नहीं भरा तो गाड़ी भी गई, लाइसेंस भी!
सरकार ट्रैफिक चालान न भरने वालों पर कड़ा शिकंजा कसने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत समय पर भुगतान न करने पर RC रद्द, लाइसेंस सस्पेंड और सभी परिवहन सेवाएं रोकी जा सकती...

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने और चालान को हल्के में लेने वाले वाहन चालकों के लिए अब चेतावनी नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई का समय आ गया है। केंद्र सरकार मोटर वाहन नियमों में ऐसे सख्त बदलाव करने जा रही है, जिनके लागू होते ही चालान न भरने वालों का वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) रद्द हो सकता है और ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। यह प्रस्ताव सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया है और इस पर राज्यों से राय मांगी जा रही है।
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अब तक ट्रैफिक चालान को लेकर आम धारणा रही है कि “बाद में देख लेंगे” या “अदालत में जुर्माना कम हो जाएगा।” लेकिन नए प्रस्तावित नियम इसी सोच पर लगाम लगाने के लिए लाए जा रहे हैं। सरकार का साफ मानना है कि देशभर में चालानों की वसूली बेहद कम है और इसी वजह से सड़क सुरक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है।
45 दिन में जुर्माना या आपत्ति, नहीं तो चालान माना जाएगा स्वीकार
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, चालान जारी होने के बाद वाहन चालक को अधिकतम 45 दिनों का समय मिलेगा। इस अवधि में उसे या तो जुर्माना भरना होगा या फिर दस्तावेजी सबूतों के साथ चालान को चुनौती देनी होगी। यदि कोई व्यक्ति इस समय-सीमा के भीतर न भुगतान करता है और न ही आपत्ति दर्ज कराता है, तो चालान अपने आप स्वीकार मान लिया जाएगा।
नई व्यवस्था में चालान भेजने की समय-सीमा भी तय कर दी गई है। चालान या तो 15 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से दिया जाएगा या फिर तीन दिनों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाएगा। सरकार का तर्क है कि समय पर सूचना मिलने के बाद लापरवाही का कोई बहाना नहीं चलेगा।
RC और लाइसेंस से जुड़ी सभी सेवाएं होंगी बंद
सबसे अहम और सख्त प्रावधान यह है कि जिन वाहन मालिकों या लाइसेंसधारकों पर चालान बकाया रहेगा, उनके किसी भी आवेदन पर आरटीओ स्तर पर कोई काम नहीं होगा। ऐसे वाहन और ड्राइविंग लाइसेंस को ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल पर “नॉट टू बी ट्रांजैक्टेड” की श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसका मतलब साफ है—RC ट्रांसफर, नवीनीकरण, लाइसेंस अपडेट, पता परिवर्तन जैसी सभी सेवाएं पूरी तरह से बंद।
जब तक चालान का निपटारा नहीं होगा, तब तक वाहन और लाइसेंस से जुड़ा कोई भी सरकारी काम संभव नहीं रहेगा।
उत्तर प्रदेश में सख्ती की शुरुआत, देशभर की तस्वीर
देश में ट्रैफिक चालानों का बकाया कितना बड़ा है, इसका अंदाजा उत्तर प्रदेश के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। यहां 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के चालान लंबित हैं। इसे देखते हुए राज्य में बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी की गई है। हजारों वाहनों और लाइसेंसधारकों को चिन्हित किया गया है, जिनके खिलाफ RC रद्द करने और लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
प्रस्ताव के मुताबिक, जिन वाहनों पर पांच या उससे अधिक चालान बकाया होंगे, उनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। ऐसे वाहन सड़क पर चलते पाए गए तो उन्हें अवैध माना जाएगा।
बार-बार नियम तोड़ने वालों पर खास नजर
नए नियमों में आदतन नियम तोड़ने वालों के लिए भी सख्त प्रावधान हैं। यदि कोई चालक तीन महीने तक ई-चालान नहीं भरता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। वहीं, एक वित्तीय वर्ष में रेड लाइट जंप या खतरनाक ड्राइविंग के तीन से ज्यादा चालान होने पर न्यूनतम तीन महीने के लिए लाइसेंस जब्त किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि ऐसे चालक न केवल नियमों की अवहेलना करते हैं, बल्कि सड़क पर दूसरों की जान के लिए भी खतरा बनते हैं।
क्यों जरूरी है यह सख्ती?
आंकड़े बताते हैं कि देशभर में केवल 40 प्रतिशत ट्रैफिक चालान ही वसूले जा रहे हैं। कुछ बड़े राज्यों और महानगरों में यह प्रतिशत और भी कम है। यही वजह है कि सरकार अब स्वैच्छिक अनुपालन के बजाय सख्त जवाबदेही की ओर बढ़ रही है।
ऑनलाइन पोर्टल के जरिए चालान को चुनौती देने की सुविधा भी दी जा रही है, ताकि लोगों को अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए नामित अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि समय पर विवादों का निपटारा हो सके।
वाहन चालकों के लिए साफ संदेश
यदि ये नियम लागू होते हैं, तो वाहन चालकों को अपनी लापरवाही की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। अब चालान को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। समय पर भुगतान या आपत्ति दर्ज कराना जरूरी होगा, वरना RC और लाइसेंस दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
फिलहाल मसौदे पर विचार चल रहा है, लेकिन संकेत साफ हैं—अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए “चलता है” वाला दौर खत्म होने वाला है।






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