कोविड फिर दे रहा है दस्तक: डर की नहीं, सावधानी की ज़रूरत
ओमिक्रॉन की उप-प्रजातियां जैसे केपी.2 और केपी.3 इन मामलों के पीछे माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे "सार्स-कोव-2 वायरस का एक नया, हालांकि अपेक्षाकृत कम घातक रूप" मान रहे हैं, जो तेज़ी से फैलता...

सिंगापुर और हांगकांग जैसे विकसित शहर-राज्यों में हाल के हफ्तों में कोविड-19 के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। नया वेरिएंट— विशेषकर ओमिक्रॉन की उप-प्रजातियां इन मामलों के पीछे मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे “सार्स-कोव-2 वायरस का एक नया, हालांकि अपेक्षाकृत कम घातक रूप” मान रहे हैं, जो तेज़ी से फैलता है लेकिन गंभीर लक्षण कम उत्पन्न करता है। बावजूद इसके, एशियाई देशों में एक बार फिर चिंता की लहर दौड़ने लगी है। भारत के लिए भी यह वक्त डरने का भले ही नहीं है, पर सजग रहने का जरूर है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाल ही में स्वास्थ्य अधिकारियों ने दिल्ली में आयोजित एक समीक्षा बैठक में बताया कि देश में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और भारत सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट हो गई है। सूत्रों की मानें तो देश में 19 मई 2025 तक कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या 257 है, जो नगण्य है और ये सभी मामले ज्यादा गंभीर नहीं हैं। इनमें से किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है।
नई लहर की शुरुआत अमेरिका से
कोविड की इस नई लहर के बारे में बताया जा रहा है कि इसकी शुरुआत वैसे तो अमेरिका में हुई, जहां ओमिक्रोन के नए सब-वेरिएंट तेजी से फैले। अमेरिका में कुल मामलों के 25 प्रतिशत इसी सब-वेरिएंट से जुड़े हैं। इसके बाद ये वेरिएंट एशियाई देशों खासकर सिंगापुर और हांगकांग में कुछ तेज़ी से फैलने लगे। विशेषज्ञों की मानें तो इस वायरस ने पुनः जीन परिवर्तन के जरिए अपनी संरचना थोड़ी बदली है, जिससे यह अधिक संक्रामक हो गया है, हालांकि गहराई से देखें तो इसकी घातकता अभी भी सीमित है।
सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, मई के पहले सप्ताह में कोविड मामलों की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग दोगुना है। हांगकांग में भी मामले बढ़े हैं, हालांकि अस्पतालों में भर्ती होने वालों की संख्या फिलहाल नियंत्रण में है। इन दोनों देशों में वैक्सीन कवरेज बेहतर है, फिर भी वृद्ध और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों में संक्रमण बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में हम ये मान सकते हैं कि कोविड का वायरस भले ही अपना स्वरूप बदल रहा हो, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वह मौका मिलते ही सक्रिय होता है— और इसे ही सतर्कता का पहला संकेत मान सकते हैं।
भारत के संदर्भ में क्या खतरे?
भारत का जनसंख्या घनत्व, स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता और सामाजिक व्यवहार, किसी भी नए संक्रमण को यहां तीव्र गति से फैलने का अवसर दे सकते हैं। वर्ष 2021 की भयावह लहर के अनुभव से हम समझ सकते हैं कि वायरस को कम आंकने की गलती दोहराई नहीं जानी चाहिए। ये सही है कि नया वेरिएंट भले ही कम घातक हो, लेकिन संक्रमितों की संख्या बढ़ जाए, तो अस्पतालों की व्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचा बिगड़ते देर नहीं लगती।
सावधानी बरतने की जरूरत
निगरानी और परीक्षण बढ़ाया जाए: हवाई अड्डों पर विदेश से आने वालों की स्क्रीनिंग सक्रिय होते रहना जरूरी है, खासकर उन देशों से आने वालों की, जहां मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर लोगों के लिए सतर्कता: इन्हें संक्रमण से बचाने के लिए पुनः वैक्सीन की बूस्टर खुराक पर विचार किया जाना चाहिए।
जनजागरूकता शुरू हो: मास्क, हाथ धोने और भीड़भाड़ से बचने जैसे व्यवहार को प्रोत्साहित किया जाए, लेकिन बिना डर व घबराहट के।
सरकारी डेटा पारदर्शी हो: कोविड से जुड़े आंकड़ों को नियमित रूप से सार्वजनिक करना आवश्यक है, ताकि अफवाहों की जगह तथ्य सामने आएं।
ये सही है कि कोविड अब हमारे बीच नया नहीं रहा। यह एक ‘एंडेमिक’ यानी स्थानीय स्तर पर मौजूद बीमारी बन चुका है, जो समय-समय पर सिर उठाएगा। ऐसे में डर की नहीं, बल्कि विवेक और सजगता- समझदारी की ज़रूरत है। भारत के पास अनुभव भी है, वैक्सीन भी, और अब अपेक्षाकृत जागरूक जनता भी। यदि सरकार और नागरिक मिलकर संयम और सतर्कता से काम लें, तो यह नया उभार भी एक छोटी सी लहर बनकर ही रह जाएगा, हमें डराएगा नहीं।






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