आर्थिक दबावों के बीच सहयोग का सूत्र
तानजियान में सम्पन्न शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 25वीं शिखर बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका की टैरिफ नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव बना रही हैं। इस पृष्ठभूमि में एशियाई देशों का एकजुट होकर...

अमेरिकी टैरिफ नीतियों की आंधी के बीच एशियाई देशों की साझा रणनीति
राजस्थान टुडे,
न्यूज डेस्क
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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 25वीं शिखर बैठक हाल ही में चीन के तानजियान में सम्पन्न हुई। यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका अपनी टैरिफ नीति से वैश्विक व्यापारिक संतुलन को चुनौती दे रहा है। एशियाई देशों का इस परिस्थिति में एकजुट होना न केवल सामयिक है, बल्कि भू-राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा देने वाला भी है। बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों को साझा सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और आर्थिक साझेदारी के एक मजबूत ढांचे से जोड़ना रहा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बहुपक्षवाद का समर्थन करते हुए “ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव” का खाका पेश किया। उन्होंने ऊर्जा सहयोग मंच के विस्तार और एससीओ विकास बैंक की स्थापना का प्रस्ताव दिया। इस पहल के साथ उन्होंने अमेरिकी प्रभुत्व से दूरी बनाने और एक नए वैश्विक संतुलन की ओर बढ़ने का आह्वान किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी एससीओ को “वास्तविक बहुपक्षवाद” का मंच करार दिया। उन्होंने डॉलर पर निर्भरता घटाकर आपसी मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का आह्वान किया। यह कदम एशियाई देशों को पश्चिमी दबावों से अपेक्षाकृत स्वतंत्र बनाने में सहायक हो सकता है।
सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर
भारत के लिए यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर, इन तीन स्तंभों को भारत की प्राथमिकता बताया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि भारत सहयोग की राजनीति चाहता है, किसी भी तरह की निर्भरता की नहीं। यह यात्रा विशेष भी रही, क्योंकि सात वर्षों बाद भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व ने आमने-सामने मुलाकात कर संबंध सुधारने की इच्छा जताई। भारत और रूस के बीच भी गहन बातचीत हुई। उर्वरक, अंतरिक्ष, सुरक्षा और संस्कृति जैसे विषयों पर सहयोग को और मजबूती देने की सहमति बनी। मोदी ने रणनीतिक स्तर पर भारत-रूस संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी” करार दिया। यह संदेश अमेरिका सहित पश्चिमी जगत को साफ इशारा है कि भारत अपनी कूटनीति को बहुपक्षीय और संतुलनकारी बनाए रखेगा।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी बैठक भारत के लिए लाभकारी रही। एससीओ सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। भारत लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि आतंकवाद किसी एक देश या क्षेत्र का संकट नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती है। इस पर सर्वसम्मति से सहमति भारत की रणनीति को मजबूत बनाती है।
एआइ के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
बैठक की एक और खासियत तकनीकी सहयोग रही। सदस्य देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में साझेदारी को गहराने पर सहमति जतायी। भारत ने इस सहयोग की रूपरेखा में समान अवसर सुनिश्चित करने पर बल दिया। यह कदम भविष्य की डिजिटल प्रतिस्पर्धा में भारत और पड़ोसी देशों के लिए बराबरी का अवसर उपलब्ध करा सकता है। पाकिस्तान के साथ हालांकि रिश्तों में कोई नई पहल देखने को नहीं मिली। प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी। यह संकेत है कि संबंध सुधारने की दिशा में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। सही मायने में तानजियान एससीओ सम्मेलन भारत के लिए एक बहुपक्षीय मंच का अवसर है। अमेरिका के बढ़ते दबावों के बीच यदि भारत अपने पड़ोसियों के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को ठोस परियोजनाओं में ढालने में सफल होता है, तो यह न केवल उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी संतुलनकारी भूमिका निभाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
तानजियान एससीओ शिखर सम्मेलन 2025
- स्थान – तियानजिन, चीन
- तिथि – 31 अगस्त–1 सितंबर 2025
- भागीदारी – चीन, भारत, रूस, पाकिस्तान, मध्य एशियाई देश, ईरान आदि
- मुख्य विषय – सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी रणनीति, ऊर्जा सहयोग, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- भारत की भूमिका – मोदी ने “सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर” को प्राथमिकता बताया
- सुरक्षा पहलू – पहलगाम हमले की कड़ी निंदा, आतंकवाद विरुद्ध साझा संकल्प
- नवीनता – एआइ सहयोग का प्रस्ताव, एससीओ विकास बैंक की अवधारणा






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