एसआई भर्ती की रिपोर्ट पेश हो
जस्टिस समीर जैन की अगुवाई में कोर्ट ने सरकार को 21 फरवरी, 15 मई, और 26 मई 2025 तक निर्णय करने के लिए समय सीमा दी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि 26 मई तक निर्णय न होने पर वह हस्तक्षेप...

प्रवीण ढींगरा,
वरिष्ठ पत्रकार
– नीट में दूसरे की जगह परीक्षा देने वालों को कॉलेज ने निलंबित किया तो कोर्ट ने बहाल करते हुए कहा, कानून में अभाव, सरकार को लाना चाहिए नया कानून
– इधर, नकल व डमी अभ्यर्थियों के सहारे एसआई बने अभ्यर्थियों को भी कोर्ट से जमानतें मिली, अब सरकार कठघरे में है
एक जुलाई की तारीख प्रदेश में बेरोजगारों के साथ पुलिस की वर्दी पहन चुके बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इस दिन वर्ष 2001 की एसआई भर्ती परीक्षा के पेपर की खरीद-फरोख्त और डमी अभ्यर्थियों के मामलों से जुड़े केस की सुनवाई होनी है। सरकार को अपना फैसला बताना है कि वह भर्ती को रद्द कर रही है या बरकरार रख रही है। सरकार के एक मंत्री खुद इस भर्ती को लेकर सरकार को घेरे हुए है। सरकार कोर्ट के कठघरे में खड़ी है। सवालों के घेरे में भी। वह भी तब, जब पिछली सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में नकल को लेकर ‘असल’ और सख्त कानून बनाया, लेकिन एसओजी ने भर्ती के जिन आरोपी एसआई को गिरफ्तार किया, वे कोर्ट से जमानत पर हैं। इधर, नीट परीक्षा पास कर डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे कई अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने दूसरे की जगह परीक्षा दी। उन्हें भी पकड़ा गया। नकल के कानून के दायरे में लाया गया, लेकिन उनका भी मेडिकल कॉलेज से निलंबन बहाल हो गया। वो भी कोर्ट के आदेश से। कोर्ट ने यहां भी सरकार के कानून की बात की। राज्य व केंद्र सरकार से अपेक्षा जताई कि वे बड़ी संख्या में सामने आ रहे डमी अभ्यर्थियों को लेकर कानून लेकर आएगी। अब एक जुलाई को कोर्ट में सरकार अपना कौनसा फैसला लेकर आएगी, इस कसौटी पर भी सूबे के मुखिया का आंकलन होगा।
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राजस्थान टुडे, जुलाई 2025
दरअसल, भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं न केवल शिक्षा और रोजगार का प्रवेश द्वार हैं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों को साकार करने वाली परीक्षाएं भी हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा जैसी प्रक्रियाएं निष्पक्षता और पारदर्शिता की कसौटी पर खरी नहीं उतरी हैं। हाल के वर्षों में राजस्थान में इन परीक्षाओं में अनियमितताओं, खासकर नीट में प्रॉक्सी उम्मीदवारों और एसआई भर्ती में पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार खुद अपनों के सवालों से भी पशोपेश में है।
कोई ठग रहा तो कोई ठगा जा रहा
इसी साल, प्रदेश में नीट के नाम पर सामने आए ठगी के एक बड़े मामले में जयपुर मेट्रो थाने में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल बलवान सिंह सहित तीन लोग शामिल थे। ये लोग कथित तौर पर नीट का पेपर 40 लाख रुपए में बेचने का दावा कर रहे थे। हालांकि जांच में पता चला कि उनके पास कोई पेपर नहीं था, और यह धोखाधड़ी थी।
सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 भी पेपर लीक के कारण विवादों में रही। इस परीक्षा में 859 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन एसओजी की जांच में खुलासा हुआ कि पेपर राजस्थान लोक सेवा आयोग से प्रिंटिंग प्रेस में जाने से पहले ही लीक हो गया था। इस मामले में 100 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें 50 ट्रेनी एसआई और दो आरपीएससी सदस्य शामिल थे। अब तक, 45 ट्रेनी एसआई को बर्खास्त और 11 को निलंबित किया गया। एक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और उनके ट्रेनी एसआई बेटे को भी गिरफ्तार किया गया, जो इस घोटाले की गहराई को दर्शाता है। 10 आरोपियों, जिनमें 11 ट्रेनी एसआई शामिल थे, को जमानत दी गई, लेकिन एसओजी की अपील के बाद 11 अन्य की रिहाई पर रोक लगी।
कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार कानून लाए
नीट में प्रॉक्सी उम्मीदवारी, यानी किसी अन्य व्यक्ति को अपने स्थान पर परीक्षा देने के लिए भेजना, वैसे तो एक गंभीर अपराध है। बावजूद इसके नीट में प्रॉक्सी मामले राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और बिहार जैसे राज्यों में अधिक देखे गए हैं, जहां कोचिंग संस्थानों की संख्या और उम्मीदवारों की भीड़ ज्यादा है। चार साल पहले, 2021 में कोटा में कुछ प्रॉक्सी मामले दर्ज किए गए। इसके बाद ऐसे मामले और बढ़े। ऐसे ही चार छात्र पकड़े गए तो कॉलेज ने उन्हें निलंबित कर दिया। इनकी याचिका पर जस्टिस दिनेश मेहता की पीठ ने फैसला सुनाया कि इस तरह के कृत्य में शामिल उम्मीदवारों के प्रवेश को निलंबित, निष्कासित या रद्द करने की शक्ति प्रदान करने वाले किसी भी प्रावधान के अभाव में याचिकाकर्ताओं का निलंबन न केवल अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर था, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन था।
न्यायालय ने आगे कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मामला यह नहीं था कि उन्होंने किसी और को अपनी ओर से उपस्थित होने के लिए कहकर प्रवेश प्राप्त किया, बल्कि यह था कि उन्होंने किसी और की नकल करके परीक्षा दी। ऐसे मामले में उनकी अपनी योग्यता या मेडिकल पाठ्यक्रमों में एडमिशन पाने की पात्रता के बारे में कोई विवाद नहीं था, इसलिए सावधानी के साथ नरम रुख अपनाना पड़ा। याचिकाकर्ताओं के कृत्य के प्रति अस्वीकृति व्यक्त करते हुए और ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यायालय ने कहा कि अब समय आ गया कि केंद्र सरकार उचित कानून लाए।
सरकारें जागी, लेकिन फैसला नहीं कर पाई
राजस्थान पुलिस और एसओजी ने नीट से संबंधित धोखाधड़ी में कार्रवाई की। जयपुर के 40 लाख रुपए के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, और मोबाइल चैट व ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर सबूत जुटाए गए। वहीं, एनटीए ने 2024 के नीट विवादों के बाद बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत किया। एनटीए के महानिदेशक को हटाया गया, और इसे केवल प्रवेश परीक्षाओं तक सीमित किया गया।
इधर, 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजस्थान परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पारित किया, जिसमें पेपर लीक के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। यह कानून एसआई मामलों में लागू हुआ। फिर भी सरकार इस भर्ती में धांधली की जड़ तक नहीं पहुंच सकी है। सरकार ने अक्टूबर 2024 में छह सदस्यीय कैबिनेट समिति बनाई गई, जिसने एसओजी, महाधिवक्ता, और पुलिस मुख्यालय के साथ मिलकर परीक्षा रद्द करने की सिफारिश की। लेकिन सरकार ने अंतिम निर्णय नहीं किया।
भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार पर निर्णय में देरी के लिए आलोचना झेल ही रही है। कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने भर्ती रद्द करने की मांग की, लेकिन उनकी हालिया चुप्पी आंतरिक असहमति को दर्शाती है।
हाईकोर्ट की सक्रियता से दबाव में सरकार
दरअसल, 19 नवंबर 2023 को हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती प्रक्रिया पर यथास्थिति का आदेश दिया। ट्रेनी एसआई की पासिंग-आउट परेड और फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगाई। यह आदेश नवंबर 2024 में दोहराया गया। फरवरी 2025 में, कोर्ट ने आरपीएससी को “निष्क्रिय संस्था” कहकर आलोचना की, क्योंकि उसने आंतरिक मिलीभगत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करवाई। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को वित्तीय पहलुओं की जांच के लिए शामिल किया। जस्टिस समीर जैन की अगुवाई में कोर्ट ने सरकार को 21 फरवरी, 15 मई, और 26 मई 2025 तक निर्णय लेने के लिए समय सीमा दी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि 26 मई तक निर्णय न होने पर वह हस्तक्षेप करेगा। अब तारीख 1 जुलाई की तय है।






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