भारत में बढ़ता क्रोनी कैपिटलिज्म
वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में भारत की स्थिति एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। अंकों में ठहराव और क्रोनी कैपिटलिज्म की तेज बढ़त यह संकेत देती है कि राजनीतिक दावों के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं...

भ्रष्टाचार के वैश्विक संकेतक और सत्ता पूंजी की बढ़ती सांठगांठ
डॉ पीएस वोहरा,
आर्थिक मामलों के जानकार
भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है जिस पर भारत की वैश्विक स्थिति तकरीबन एक बार फिर से उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां एक दशक पहले थी। बीते दिनों वैश्विक स्तर पर बहुप्रतिष्ठित भ्रष्टाचार से संबंधित इंडेक्स (करप्शन परसेप्शन इंडेक्स) जिसे विश्व बैंक के आंकड़ों पर निर्धारित किया जाता है के अंतर्गत भारत 180 मुल्कों में से 96वें पायदान पर दर्ज हुआ है। ये भी बताना अत्यंत आवश्यक है कि भ्रष्टाचार से संबंधित विभिन्न मानकों पर भारत के द्वारा इस रिपोर्ट में प्राप्त किए किया गया कुल स्कोर 38 रहा है। वर्ष 2012 में यूपीए सरकार के शासन में ये स्कोर 36 था तथा वर्ष 2014 जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तब ये बढ़कर 38 हुआ। 2016 में ये एक बार फिर से बढ़कर 40 पहुंचा, वर्ष 2018 में इसने 41 के नंबर को छुआ। लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट दर्ज होती गई और वर्ष 2024 में ये 38 पर आ गया।
ज्ञात रहे कि करप्शन परसेप्शन इंडेक्स की इस रिपोर्ट के अंतर्गत जैसे-जैसे स्कोर बढ़ता है वैसे-वैसे भ्रष्टाचार मे कमी या उस पर नियंत्रण की स्थिति विश्व के अन्य मुल्कों की तुलना में सुधरती है। वर्तमान में डेनमार्क भ्रष्टाचार पर नियंत्रण या कमी पर विश्व में नंबर एक के पायदान पर है। इस संबंध में ये भी बताना अत्यंत आवश्यक है कि सोशल मीडिया के स्रोत ट्विटर पर अगर भारत में भ्रष्टाचार को खंगाला जाए तो आप तकरीबन हर दूसरे, तीसरे दिन, देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों की जानकारी पाएंगे। ऐसा ही ट्विटर पर एक मामला चेन्नई पोर्ट पर कस्टम अधिकारियों को यूपीआई के माध्यम से दी गई रिश्वत का था। इस मामले में तो लोगों ने कमेंट सेक्शन के अंतर्गत बहुत ताज्जुब व्यक्त किया कि हौसले इतने बुलंद है कि रिश्वत यूपीआई के माध्यम से ली जा रही है, जिसके साक्ष्य हर जगह उपलब्ध है, फिर भी कोई कार्यवाही नहीं। सोशल मीडिया इस तरह के अभिव्यक्तियों से भरा पड़ा है।
इसके अलावा एक अन्य पक्ष जो बहुत हैरतअंगेज है कि क्रोनी कैपियलिज्म पिछले कुछ अर्से से भारत में बड़ी तेजी से बढ़ा है। क्रोनी कैपियलिज्म में बड़े उद्योगपतियों, रसूखदार लोगों की सत्ता के साथ बहुत पारस्परिक तालमेल होता है। इस संबंध में वैश्विक रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि क्रोनी कैपियलिज्म वैश्विक जीडीपी का 1.5 प्रतिशत से बढ़कर अब 3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर भारत इसमें 9वे नंबर पर है जो कि भारत के लिए बड़ी ही विचित्र और खतरनाक स्थिति का सूचक है। क्योंकि भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी का मुल्क है। इस संबंध में और ताज्जुब तब हुआ जब इसमें चीन 21वें और अमेरिका 26वें स्थान पर है।
इन सबसे ये स्पष्ट है कि भारत में भ्रष्टाचार को रोकने या उसे नियंत्रित करने में राजनीतिक नारेटिव तो बहुत जल्दी तय हो जाता है और लोकतंत्र के अंतर्गत जनता ऐसी भावनाओं से बहुत जल्दी से आकर्षित भी होती है, परंतु स्थिति जस की तस ही रहती है। अब समय आ गया है, जब इस पक्ष पर भारत को बड़ी तेजी से अपनी स्थिति को नियंत्रण में करना होगा वरना वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भ्रष्टाचार के दाग के साथ ही लोगों के सामने आएगी।






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