सुविधा पर भारी समय का प्रलोभन
तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स ने खरीदारी की परिभाषा बदल दी है। 10 मिनट में सामान पहुंचाने की सुविधा उपभोक्ताओं को आकर्षित तो कर रही है, लेकिन इसके साथ बढ़ रही है अनावश्यक खरीदारी, नकली व एक्सपायरी...

क्विक कॉमर्स ऐसे बदल रहा खरीदारी की आदत
जया शर्मा,
लेखक व पत्रकार
Table Of Content
बीते दिनों मैंने ई-कॉमर्स कम्पनी से एक स्मार्टफोन ऑर्डर किया, रात को एक बजे ऑर्डर बुक हुआ और एक बजकर 10 मिनट पर फोन की डिलीवरी भी हो गई। इसी तरह बीते महीने रात 10.45 बजे की जयपुर से ऋषिकेश की ट्रेन थी, लास्ट मिनट पैकिंग के दौरान हैंडबैग की चेन टूट गई…, उसी समय ऑनलाइन हैंडबैग ऑर्डर किया, दस से 15 मिनट के अंदर बैग आ गया।
ये उदाहरण बताते हैं कि देश में क्विक कॉमर्स का दायरा राशन या डेली रूटीन के सामान से आगे बढ़ गया है। अब स्मार्टफोन या टैबलेट जैसे लग्जरी आइट्म्स भी 10 मिनट में डिलीवर हो रहे हैं। दिवाली सीजन में क्विक कॉमर्स एप के जरिए ऑर्डर की मात्रा में 120 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
दस मिनट में सामान मंगवाने की प्रेक्टिस उपभोक्ताओं को रास तो आ रही है, लेकिन जितनी आरामदायक यह लगती है, उतनी है नहीं। तुरंत अपनी जरूरत की चीजें मिलने की सुविधा ने उपभोक्ताओं को अनियोजित शॉपिंग की आदत डाल दी है और जिस तरह के ऑफर दिए जा रहे हैं, उसमें ग्राहक वस्तु की ज्यादा कीमत देने को भी तैयार है।
धोखाधड़ी के मामले
क्विक कॉमर्स की रफ्तार बढ़ने के साथ धोखाधड़ी के मामले भी बढ़े हैं। बीते एक साल में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन में ऑनलाइन खरीदारी में ठगी की शिकायतें लगातार आ रही हैं। खासकर डार्क स्टोर्स, जहां पर सामान एकत्रित करके रखा जाता है, उन जगहों पर कई तरह की अनियमित्ताएं देखने को मिली हैं। देशभर के डार्क स्टोर पर हुई छापेमारी में डार्क स्टोर्स का डार्क सीक्रेट नजर आया। यहां एक्सपायरी डेट के डेयरी प्रोडक्ट, अनहाईजीन फूड आइट्म्स, फंगस लगी सब्जियां और फल मिले हैं। इधर, नामी ऑनलाइन कम्पनियों के वेयरहाउस में नकली इलेक्ट्रॉनिक आइट्स और गैजेट्स जब्त किए गए हैं। फर्जी आइएसआई मार्का के अलावा नकली ब्रैंड के उपकरण मिले हैं। अब जरा सोचिए, 10 मिनट में जो सामान आप अपने घर मंगवा रहे हैं, वे न सिर्फ आपकी सेहत को बिगाड़ सकते हैं, बल्कि नकली व गुणवत्ताहीन होने के चलते जान को भी जोखिम में डाल सकते हैं।
डार्क स्टोर का डार्क सीक्रेट
क्विक कॉमर्स कम्पनियां खाद्य पदार्थों को लेकर लापरवाही बरत रही हैं। बीते दिनों उपभोक्ताओं ने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए क्विक कॉमर्स से जुड़ीं कई शिकायतें शेयर की हैं। जिनमें बटर, एक्सपायरी आइसक्रीम और दूध जैसे नकली या गुणवत्ताहीन प्रोडक्ट के बारे में शिकायत दर्ज करवाई है। फिर जिस रफ्तार से क्विक कॉमर्स कम्पनियां डार्क स्टोर्स खोल रही हैं, उसी को लेकर उपभोक्ता संरक्षण निकाय ने भी चिंता व्यक्त की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण, एफएसएसएआई ने भी एक एडवाइजरी जारी की थी कि इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की डिलीवरी उसकी एक्सपायरी डेट से कम से कम 45 दिन पहले होनी चाहिए। ज्यादातर क्विक कॉमर्स कम्पनियां एफएमसीजी ब्रांडों से शेल्फ लाइफ के अंत के करीब पहुंच चुके बेकार स्टॉक को सस्ती कीमत पर खरीद रहे हैं और ऐसी वस्तुओं पर भारी छूट देकर बेचते हैं। ऐसे में उपभोक्ता के सामने खरीदते समय पारदर्शिता की कमी रहती है।
टियर टू शहरों में बढ़ रहा चलन
एक रिपोर्ट के मुताबिक क्विक कॉमर्स सेवा टियर-2 शहरों में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अब छोटे शहरों के उपभोक्ताओं पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। भारत में क्विक कॉमर्स बाजार 2030 तक 57 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में उपभोक्ता को सचेत रहकर प्रोडक्ट्स खरीदने चाहिए।
क्विक कॉमर्स उपभोक्ताओं पर कुछ इस तरह डाल रहा प्रभाव
मनोवैज्ञानिक ट्रिगर-
जब आपको पता है कि कोई चीज आपके पास कुछ ही मिनटों में आ जाएगी तो आप उसे खरीदने के लिए ज्यादा आकर्षित रहेंगे। ऐसे में क्विक डिलीवरी उपभोक्ताओं को वस्तु खरीदने में एक मनोवैज्ञानिक ट्रिगर के रूप में काम करती हैं। अब आप खुद सोचिए जल्दबाजी उपभोक्ताओं को भारी भी पड़ सकती है।
ज्यादा कीमत देने को तैयार-
कई बार क्विक कॉमर्स कम्पनियां उपभोक्ताओं का जरूरत का सामान समय पर देकर उनका विश्वास जीत लेती हैं, शुरू में डिस्काउंट देती हैं। धीरे—धीरे उपभोक्ता की आदत बदल जाती है और जल्दी सामान मिलने की स्थिति में ज्यादा कीमत देने को तैयार हो जाते हैं। महंगी वस्तुएं खरीदने का भार उपभोक्ता पर ही पड़ता है।
ऑफर का जाल-
क्विक कॉमर्स कम्पनियां उपभोक्ताओं को जल्दबाजी में खरीदारी के लिए प्रेरित करती है। कुछ सीमित समय के ऑफर फिर तेज डिलीवरी विकल्पों के जरिए उपभोक्ताओं को फंसाया जाता है। जैसे स्नैक्स या फिर कोल्डड्रिंक व पर्सनल केयर के प्रोडक्ट सबसे अधिक खरीदी जाने वाली आवेगपूर्ण वस्तुओं में से हैं, जिन्हें इन दिनों अनावश्यक खरीदा जा रहा है।
उपभोक्ता क्यों करें-
उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान कोई वस्तु नकली या गुणवत्ताहीन मिलती है, या फिर वे डार्क पैटर्न का अनुभव करते हैं तो वे राष्ट्रीय उपभोक्ता हैल्पलाइन के टोल फ्री नम्बर 1915 पर शिकायत कर सकते हैं, या फिर उपभोक्ता फोरम की मदद ले सकते हैं।






No Comment! Be the first one.