डिजिटल देवता: एआइ के नए अवतार
एआइ अब सिर्फ़ काम में नहीं, धर्म, उत्सव और ज्योतिष में भी प्रवेश कर रहा है। रामलीला मंचन, वैदिक ज्ञान और जन्मकुण्डली विश्लेषण— सब अब डिजिटल रूप में सुलभ...

प्रो.(डॉ.) सचिन बत्रा,
वरिष्ठ पत्रकार
एआइ की दुनिया में कोई डिजिटल जादुई छड़ी आपके प्राम्पट यानि आदेशात्मक व्याख्या का अनुसरण करते हुए आपको मनोवांछित परिणाम सुलभ कराती है। वहीं दूसरी और कुछ चैटबॉट्स आपकी चर्चा से दिशा निर्देशित होकर इच्छित समाधान या कार्य को संपूर्ण करते हैं। अब तक एआइ तकनीक ऐसे ही आपके काम में हाथ बंटा रही थी, लेकिन उसका नया अवतार तो धर्म—कर्म की रीति पद्धति में भी पारंगत हो रहा है।
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इस बार भी हम दीपों के उत्सव की तैयारी करते हुए जगह- जगह रामलीला मंचन की घोषणाएं सुन रहे हैं। मजेदार बात तो यह है कि पिछले साल एक डिजिटल आर्टिस्ट माधव कोहली ने एआइ का उपयोग कर रामायण की 60 तस्वीरों को जीवंत कर दिया था। सोशल मीडिया पर उस महर्षि वाल्मीकि की संपूर्ण रामायण के आकर्षक फोटो प्रस्तुतिकरण को लोगों ने बहुत सराहा और उसे किताब का रूप देने की सलाह दी। इसमें बादलों व बिजली की गड़गड़ाहट से लेकर पार्श्व में जीव जंतुओं की आवाज लोगों को खास रास आई। इसी प्रकार दिल्ली की नवश्री धार्मिक रामलीला कमेटी ने पिछले वर्ष लाल किले पर रामलीला मंचन में एआइ इफैक्ट्स का भरपूर उपयोग किया। इसमें लाइट एंड साउंड और जंगल के दृष्यों ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया था। इस बार भी देशभर में रामजी की लीला में रंग भरने के लिए एआइ से प्रभावी लीलाएं रची जा रही हैं।
अब धर्म में भी एआइ औजार
धर्म में लोगों की इसी रुचि को देखते हुए एमआईटी, गूगल डीपमाइंड जैसी कई कंपनियां एआइ औजार विकसित कर वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत सहित लोकप्रिय ग्रंथों को मशीन लर्निंग से पढ़ा रही हैं। इसमें अनुवाद से लेकर संस्कृत श्लोकों और वेदों की शिक्षा के लिए एआइ के डिजिटल गुरु तो घर बैठे ही प्रशिक्षण और अभ्यास के आसान विकल्प मुहैया करा रहे हैं। अब तो ऐसा लगता है कि हमारे घर आने वाले पंडित जी को भी हम जल्दी ही उनके एआइ अवतार में देख पाएंगे। क्योंकि पूरी दुनिया में धर्म- कर्म के लिए एआइ समाधान भी घर बैठे धर्म व्यापार के नए रास्ते खोल रहा है। दुनिया की बात करें तो अमेरिका में एआइ धर्मगुरुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लिहाजा तकनीक विकास करने वाली कंपनियां उनके लिए एआइ टूल्स से लेकर चैटबॉट्स और एआइ असिस्टेंट का बाजार खोल बैठी हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये एआइ अवतार धर्मगुरुओं को धार्मिक शोध सहित प्रवचन लिखने में सहायता करते हैं। यही नहीं, प्रवचनों के सीधे प्रसारण के समय भी एआइ टूल्स की मदद से विविध भाषाओं में सटीक अनुवाद की सेवाएं भी खरीदी बेची जा रही हैं। हालांकि कुछ धर्मगुरू एआइ की मदद से शोध को तर्क सम्मत मानते हैं, लेकिन एआइ से उपदेश को नैतिकता के विरुद्ध माना जा रहा है।
अजीब बात है कि विदेशों में रहने वाले अपने धर्मगुरुओं पर आश्रित नहीं रहना चाहते। ऐसे में करोड़ों लोग अपनी गोपनीय बातें चैटबॉट्स से साझा कर रहे हैं। वहां बाइबल चैट ऐप को 3 करोड़ से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया और हैलो नामक एप ने तो नेटफ्लिक्स और टिकटॉक को पछाड़कर एप्पल स्टोर में पहले पायदान को हासिल किया है। द न्यूयार्क टाइम्स को आहियो क्रिस्टा ने बताया कि अब उसे रात को तीन बजे अपने धर्मगुरु को परेशान करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उसके पास एआइ गुरु है। ऐसे में अमेरिका में पिछले दशकों में करीब 4 करोड़ लोग धार्मिक स्थलों पर आना- जाना छोड़ चुके हैं। वहीं एआइ ऐप प्रे डॉट कॉम को अब तक लगभग तीन करोड़ लोग डाउनलोड कर चुके हैं।
काम आसान और दाम भी वाजिब
एआइ की मदद से कठिन और भारी भरकम खर्च वाले काम आसानी और वाजिब दाम के नवीन अवसर पैदा हो रहे हैं। जिसका सफल इस्तेमाल धर्म के साथ आय के कर्म को भी संबल दे रहा है। एक रोचक जानकारी यह है कि कर्नाटक में एक पुजारी ने बिना कैमरे और स्टार के दुनिया की पहली एआइ फिल्म बना डाली। वहां सिद्देहल्ली गांव के पुजारी नरसिम्हा मूर्ति ने दस लाख खर्च कर फिल्म को खुद ही प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया। वैसे मदद के लिए उन्होंने एक ग्राफिक डिजाइनर नूतन की सहायता से फिल्म बनाने के लिए 30 प्रकार के एआइ टूल्स व सॉफ्टवेयर का उपयोग किया। 95 मिनट की उस फिल्म में बारह गाने और किरदार सहित आवाज भी एआइ से ही बनाई गई हैं।
अब एआइ से भविष्य जानने की ललक
अब बात करते हैं ज्योतिष की, तो वैदिक पद्धति से मशीन लर्निंग का प्रशिक्षण देकर एआइ चैटबॉट्स विकसित कर लिए गए हैं। ऐसे में भविष्य जानने के लिए लोग अब मोबाइल पर चैटबॉट्स से सलाह ले रहे हैं। ज्योतिष के लिए एआइ ऐप जैसे एस्ट्रोजीपीटी, ओरैकल, कुण्डली-जीपीटी, एस्ट्रो-निदान, स्टारडस्ट, सेल्फ-गेजर, जेफरी सेलावी, एस्ट्रॉनी, टेरा मास्टर, प्लॉट-जीपीटी और टेरो-नोवा जैसे स्वचालित ऐप्स लोगों की जन्मकुण्डली का आंकलन, विश्लेषण, नई कुण्डली निर्माण और पूर्वानुमान सहित संवाद करने वाले चैटबॉट्स ग्राहकों से सवाल- जवाब या चर्चा कर पूर्वानुमान सुलभ करा रहे हैं। यानि कि ऐसा माना जा सकता है कि आगे चलकर एक एआइ पंडितजी अपने 360 आयामी डिजिटल रूप से, एक ही समय पर सैकड़ों विवाह, मंत्रोच्चार से संपन्न करा रहे होंगे।
हालांकि धार्मिक कार्यों ही नहीं आयोजनों में भी एआइ कभी संरक्षक तो कभी प्राण रक्षक साबित हो रहा है। उदाहरण के लिए गत वर्ष आयोजित हुए महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में हजारों सीसीटीवी कैमरों और एआइ ड्रोन की मदद से भीड़ को नियमित करने और निर्देशित करने के लिए एआइ निगरानी और चौकसी की गई। जिसकी चर्चा नीति आयोग ने राष्ट्रीय एआइ नीति निर्माण के लिए की थी। इसी प्रकार अयोध्या में दीपोत्सव में लगभग 500 ड्रोन के जरिए दर्शकों ने रामायण से संबंधित आकृतियों को आसमान में दर्शाया गया। जिन्हें एआइ आप्टिमाइजेशन और पाथ- प्लानिंग सॉफ्टवेयर की मदद से संचालित किया गया। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ ऐसे ड्रोन को भीड़ संयोजन के लिए उपयोग किया जाता है तो दूसरी ओर धर्म ग्रंथों का ज्ञान प्रसारित करने के लिए हवा में किरदार व कलाकृतियां बनाई जाती हैं। कुल मिलाकर एआइ के नए औजार संस्कृति और ज्ञान का प्रसार करने के लिए बहुउपयोगी साबित हो रहे हैं।






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