“आत्म-सम्मान के साथ शांति: नया भारत, नया सन्देश”
पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की इकाई ‘द रेजिडेंट फ्रंट’ द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ प्रारंभ किया। इस अभियान के अंतर्गत पाकिस्तान और...

“शांति भारत की नीति है, पर जवाब देना उसकी मजबूती”
(अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के माध्यम से भारत का बदला हुआ दृष्टिकोण)
– राकेश गांधी
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भारत की सांस्कृतिक परम्परा और ऐतिहासिक चेतना सदा से शांति और सह-अस्तित्व के मूल्यों पर आधारित रही है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे आदर्श भारतीय सभ्यता की नींव हैं। किंतु यह शांतिप्रियता कभी भी दुर्बलता का पर्याय नहीं रही। जब भी देश की संप्रभुता, सुरक्षा या सम्मान को ललकारा गया है, भारत ने संयम के साथ-साथ सशक्त प्रतिकार का परिचय दिया है। हालिया ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ इसकी ताजा मिसाल है, जिसने स्पष्ट कर दिया कि नया भारत अब हर चुनौती का निर्णायक उत्तर देना जानता है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की इकाई ‘द रेजिडेंट फ्रंट’ द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ प्रारंभ किया। इस अभियान के अंतर्गत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के कई प्रशिक्षण शिविर ध्वस्त कर दिए गए।
यह युग अब दूसरा गाल आगे करने का नहीं
वर्ष 2024-25 के दौरान नियंत्रण रेखा पर भारत-पाक संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। फरवरी 2021 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, हाल के महीनों में पाकिस्तान द्वारा 150 से अधिक बार युद्धविराम का उल्लंघन किया गया। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है। भारत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि अब वह यथासंभव शांति का पक्षधर अवश्य है, किंतु हर हमले का उत्तर केवल कूटनीति से नहीं, सामरिक शक्ति से भी दिया जाएगा। यह युग एक तमाचे के बाद अब दूसरा गाल आगे करना का बिल्कुल नहीं है। भारतीय सेना को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी उकसावे का जवाब त्वरित और प्रभावी ढंग से दिया जाए।
आंतरिक अस्थिरता पाक की अपनी समस्या
ऑपरेशन सिन्दूर के बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई का प्रयास किया, किंतु भारतीय सेना ने लगभग सभी प्रयासों को विफल कर दिया। चार दिनों के भीतर ही पाकिस्तान के आग्रह पर विचार- विमर्श के बाद 10 मई को युद्धविराम की घोषणा की गई, जो शाम 5 बजे से प्रभावी हुई। दुर्भाग्यवश, पाकिस्तान ने अपने पुराने रवैये पर लौटते हुए कुछ ही घंटों में सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन हमले और गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे उसकी नीयत स्पष्ट हो गई। पाकिस्तान की समस्या केवल भारत से नहीं, बल्कि उसकी अपनी आंतरिक अस्थिरता और सैन्य वर्चस्व से भी जुड़ी है। पिछले सात दशकों में उसकी सेना चार बार सत्ता पर काबिज हो चुकी है और आज भी वहां लोकतंत्र सेना की छाया में सांस ले रहा है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में भी पाकिस्तान को सीमापार आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है। वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत की कार्रवाई को आत्मरक्षा का वैध अधिकार बताया है।
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भारत की विदेश नीति का मूल स्वभाव संवाद और सह-अस्तित्व रहा है, लेकिन जब शांति की भाषा को कमजोरी समझा जाए, तो भारत को अपनी नीति के दूसरे पक्ष को उजागर करना आवश्यक हो जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) और अब ऑपरेशन सिन्दूर – ये सभी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब केवल विचारों का नहीं, बल्कि संकल्प और सामर्थ्य का भी प्रतिनिधि है। भारतीय सेना लगातार आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित की जा रही है – ड्रोन, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट निगरानी तंत्र और उच्च तकनीक वाले रडार प्रणाली इसके उदाहरण हैं। देश का जनमानस भी अब यह मान चुका है कि बार-बार के उकसावे का उत्तर सटीक और सशक्त कार्रवाई से ही संभव है।
शांति के लिए आतंकवाद का समूल नाश जरूरी
क्या भारत-पाक संबंधों में स्थायी शांति संभव है? उत्तर है— हां, लेकिन तभी जब पाकिस्तान आतंरिक सुधार करे, आतंकवाद का समूल नाश करे और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दे। भारत सदा संवाद का पक्षधर रहा है, पर अब यह संवाद समकक्षता के आधार पर होगा, झुकाव के नहीं। आज का भारत संयम की शक्ति के साथ आत्म-सम्मान और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है।






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