धार्मिक पर्यटन से बदलती तकदीर
पहले माना जाता था कि जो लोग बुजुर्ग हो गए हैं, वे ही धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं, लेकिन अब ये मिथक भी टूट चुका है। बुजुर्गों से ज्यादा युवा अब धार्मिक स्थलों पर पहुंच रहे हैं। मंदिरों व अन्य...

पर्यटन : आस्था से आर्थिक समृद्धि का सफर
मधुलिका सिंह,
वरिष्ठ पत्रकार
विविधता में एकता की मिसाल कहे जाने वाला भारत धार्मिक आस्थाओं और पुरातात्विक धरोहरों के लिए भी ख्यात रहा है। यहां की धार्मिक यात्राएं सदियों से चली आ रही हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करने का व्यापक अभियान शुरू हुआ है। काशी कॉरिडोर, अयोध्या के भव्य राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल कॉरिडोर जैसे परियोजनाओं ने धार्मिक पर्यटन की दिशा बदल दी है।
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2024 में भारत ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति की है। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की ओर आकर्षित हुए हैं। धार्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि यह अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है।
बुजुर्ग ही नहीं, युवा भी पहुंच रहे
पहले माना जाता था कि जो लोग बुजुर्ग हो गए हैं, वे ही धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं, लेकिन अब ये मिथक भी टूट चुका है। बुजुर्गों से ज्यादा युवा अब धार्मिक स्थलों पर पहुंच रहे हैं। मंदिरों व अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वालों में बड़ी संख्या में लड़के और लड़कियां दिखेंगे। ये इंटरनेट और सोशल मीडिया का ज़माना है, इसलिए तस्वीरें-रील्स बनाने वाली जनरेशन भी धार्मिक स्थलों पर जा रही है। धार्मिक स्थलों का प्रचार-प्रसार कर रही है। पर्यटन मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घरेलू पर्यटकों की कुल संख्या लगभग 1.7 बिलियन थी, जिनमें से करीब 60 प्रतिशत धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले थे। राम मंदिर अयोध्या के उद्घाटन के बाद जनवरी से मई 2024 तक लगभग 4.2 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। साथ ही उत्तरप्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज में भी श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई। धार्मिक पर्यटन से भारत को प्रतिवर्ष 45,000 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है।
पर्यटकों के बढ़ने से बढ़ा मंदिरों का राजस्व
राम मंदिर अयोध्या के उद्घाटन के बाद जनवरी से मई 2024 तक लगभग 4.2 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।
कांवड यात्रा, अमरनाथ यात्रा और चारधाम यात्रा में 2024 की गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी हुई। केवल चारधाम यात्रा में ही 60 लाख से अधिक तीर्थयात्री शामिल हुए। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अनुसार 2024 में भारत के प्रमुख मंदिरों से कुल कमाई लगभग 65,000 करोड़ रुपए रही, जो धार्मिक पर्यटन से होने वाली कुल आय का एक बड़ा हिस्सा है। 2024 में धार्मिक पर्यटन से अनुमानित 90,000 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है।
राजस्थान में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि
राजस्थान की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत सदियों पुरानी है। यहां के मंदिर, मेला, और धार्मिक स्थल भारत के धार्मिक पर्यटन में खास पहचान रखते हैं। 2024 में राजस्थान ने धार्मिक पर्यटन में जबरदस्त उछाल देखा। राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई बुनियादी ढांचागत विकास योजनाएं लागू कीं। राजस्थान धार्मिक पर्यटन नीति 2024 के अंतर्गत राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपए का विशेष बजट जारी किया। उदयपुर में पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना बताती हैं, पिछले कुछ सालों में धार्मिक टूरिज्म बढ़ा है। राजस्थान में भी कई धार्मिक सर्किट हैं, जिन्हें विकसित किया जा सकता है। मेवाड़ में श्रीनाथजी, द्वारकाधीश, एकलिंगजी, सांवलियाजी, चारभुजानाथ, अंबिका माता सहित कई बड़े मंदिर हैं, जहां लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं। उदयपुर में नीमच माता मंदिर रोप-वे शुरू होने पर श्रद्धालु बढ़ेंगे। मेवाड़ और वागड़ के मंदिरों का सर्किट तैयार किया जा रहा है। त्रिपुरा सुंदरी, घोटिया आंबा, बेणेश्वर धाम, द्वारकाधीश, चारभुजानाथ आदि में भी विकास कार्य कराए जाएंगे। इससे धार्मिक पर्यटन और बढ़ेगा।
राज्यवार धार्मिक पर्यटन से आय (2024):
राज्य अनुमानित आय (करोड़ रुपये में)
उत्तर प्रदेश — 22,000
उत्तराखंड — 9,500
तमिलनाडु — 7,800
महाराष्ट्र — 6,200
राजस्थान — 5,500
कर्नाटक — 4,000
आंध्र प्रदेश — 3,800
गुजरात — 3,200
बिहार — 2,000
अन्य राज्य — 5,000
कुल — 90,000
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पर्यटकों को खींचने में राजस्थान के शीर्ष मंदिर:
1. खाटू श्यामजी मंदिर (सीकर)
श्रद्धालुओं की संख्या: लगभग 2.76 करोड़ (2024)
विशेषता : यह मंदिर विशेष रूप से फाल्गुन मेले के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
2. गोविंद देवजी मंदिर (जयपुर)
श्रद्धालुओं की संख्या: लगभग 1.65 करोड़ (2024
विशेषता : जयपुर का यह मंदिर भक्तों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
3. ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह (अजमेर)
श्रद्धालुओं की संख्या: लगभग 1.31 करोड़ (2024)
विशेषता : यह दरगाह मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
4. सांवलिया सेठ मंदिर (चित्तौड़गढ़)
श्रद्धालुओं की संख्या: लगभग 1.26 करोड़ (2024)
विशेषता : यह मंदिर विशेष रूप से सांवलिया सेठ के भक्तों के लिए प्रसिद्ध है।
5. नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर
श्रद्धालुओं की संख्या: लगभग 1.20 करोड़ (2024)
विशेषता : यह मंदिर श्री कृष्ण के एक स्वरूप को समर्पित है और विशेष रूप से श्रीनाथजी के दर्शन के लिए प्रसिद्ध है।
6. रामदेवरा मंदिर (रामदेवरा, जैसलमेर)
श्रद्धालुओं की संख्या: विशेष रूप से भाद्रपद माह में आयोजित मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं।
विशेषता: यह मंदिर बाबा रामदेव जी को समर्पित है और यहां आयोजित होने वाला मेला विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, यातायात सुविधाएं, सफाई और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निरंतर सुधार आवश्यक है। राजस्थान में पर्यटन सर्किट के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाना, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और सतत पर्यटन विकास पर ध्यान देना होगा। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग से धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई परियोजनाएं और निवेश आएंगे, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।






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