प्रधानमंत्री शास्त्री जी की जोधपुर यात्रा: अक्टूबर 1965 में देशभक्ति की मिसाल
वाक्या 29 अक्टूबर 1965 का है, जब भारत-पाक युद्ध के बाद प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जोधपुर आए। यह केवल एक यात्रा नहीं थी—यह राष्ट्र की आत्मा से संवाद...

वाक्या 29 अक्टूबर 1965 का है, जब भारत-पाक युद्ध के बाद प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जोधपुर आए। यह केवल एक यात्रा नहीं थी—यह राष्ट्र की आत्मा से संवाद था।
जैसे ही उनका काफिला स्टेशन से स्टेडियम की ओर बढ़ा, लगता था रेत के कण भी जयकारे लगा रहे हों। हवा में धूल थी, पर लोगों की आंखों में चमक सोने जैसी थी। पूरे शहर ने उन्हें सिर-आंखों पर बैठा लिया।
मंच पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने भीड़ को देखा—उसमें जोश था, प्रेम था, विश्वास था। उन्होंने कहा— “जवान गोली से नहीं, गाली से डरे। हम शांति चाहते हैं, पर कोई हमारी परीक्षा ले, तो हम जवाब देना जानते हैं।”
फिर उन्होंने जोधपुर की तारीफ करते हुए कहा— “इस धरती की एक खासियत है—यह मीठा बोलती है। यहां की रेत भी बोलती है!” ये शब्द जैसे मरुस्थल की रेत पर अमिट अक्षरों की तरह उभर गए।
उसी दिन, जोधपुर ने देशभक्ति की मिसाल पेश की। जनता ने सेना के लिए ₹2.80 लाख की धनराशि और 10 किलो सोना भेंट किया। यह महज योगदान नहीं था—यह जोधपुर की वीरता, श्रद्धा और देशप्रेम की सुनहरी चमक थी।
उस दिन जोधपुर सिर्फ एक शहर नहीं रहा—वह देशभक्ति की सुनहरी रेखा बन गया।






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